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पंजशीर के शेर की 20वीं बरसी पर उनके कब्र को तालिबानी आतंकियों ने तोड़ दिया, इस हरकत से भारी आक्रोश है अफगानी नागरिकों में – श्रीराम पांडेय (सब एडिटर)

नई दिल्ली। खबर है कि तालिबानी आतंकियों ने पंजशीर घाटी में नार्दन एलायंश आर्मी के आदर्श रहे ‘पंजशीर के शेर’ के नाम से मशहूर दिवंगत अहमद शाह मसूद का मकबरा तोड़ दिया है । अफगान रिबेल कमांडर अहमद शाह मसूद को नॉर्दन एलायंस आर्मी का संस्थापक भी माना जाता है। अहमद शाह मसूद की छवि अफगानिस्तान में नेशनल हीरो की तरह है। स्थानीय मीडिया के अनुसार अहमद शाह मसूद का मकबरा तोड़े जाने को लेकर अफगानिस्तान में लोगों में गुस्सा है। अहमद शाह मसूद वही शख्स थे, जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी तालिबान को कड़ी चुनौती दी थी। इतना ही नहीं, उनके समय में तालिबान तो क्या रूसी फौज भी पंजशीर पर कब्जा नहीं कर सकी थी।
आज अहमद शाह मसूद की हत्या की 20वीं बरसी भी है। अमेरिका में 9/11 हमले के ठीक दो दिन पहले यानी 9 सितंबर 2001 को अलकायदा ने अहमद शाह मसूद की हत्या कर दी थी। अहमद शाह मसूद ताजिक समुदाय से ताल्लुकात रखने वाले सुन्नी मुसलमान थे। इंजीनियरिंग किए हुए अहमद शाह मसूद साम्यवाद के कट्टर आलोचक थे।

रूसी आर्मी ने इन्हें पकड़ने के लिए पंजशीर घाटी में नौ बार मिलीट्री आपरेशन भी किया था,लेकिन किसी भी सूरत में उन्हें सफलता नहीं मिली। सोवियत सैनिक जो भी असलहे और गोला-बारूद मंगवाते थे उन्हें मसूद के लड़ाके बारूदी सुरंग बिछाकर उड़ा देते थे। सोवियत सेना को करारी शिकस्त देने के कारण अहमद शाह मसूद को पंजशीर का शेर की उपाधि दी गई। सोवियत सेना के जाने के बाद पेशावर समझौते के तहत अहमद शाह मसूद को 1992 में अफगानिस्तान का रक्षा मंत्री बनाया गया।

तालिबान ने अभी हाल ही में दावा किया था कि उसने पंजशीर घाटी पर अपना पूरा कब्जा जमा लिया हैै। हालांकि, तालिबान का विरोध कर रहे अहमद शाह मसूद के बेटे अहमद मसूद ने कहा है कि आखिरी सांस तक वो तालिबान के खिलाफ लड़ते रहेंगे। उन्होंने पंजशीर पर तालिबान के पूर्ण कब्जे से इनकार भी किया है।

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