स्पेशल रिपोर्ट

लद्दाख बार्डर पर चीनी सेना से भारतीय फौज अब त्रेतायुग के हथियारों से लड़ेगी, त्रिशूल,वज्र और दंड जैसे हथियारों से मोर्चा लिया जाएगा देश के दुश्मनों से – हेमंत सिंह (स्पेशल एडिटर)

नई दिल्ली। भारतीय सेना लद्दाख बार्डर पर चीनी सेना से मोर्चा लेने के लिए त्रेता,द्वापर के युगों में युद्ध में प्रयोग किये जाने वाले हथियारों का इस्तेमाल करने की तैयारी में जुट गई है। दरअसल वर्षो से LAC बार्डर पर भारत-चीन के बीच जारी तनाव के चलते 29 नवंबर 1996 को दोनों देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था। इस समझौते के अनुसार दोनों ही पक्ष एक-दूसरे के ख़िलाफ़ किसी तरह की ताक़त का प्रयोग नहीं करेंगे।

बताते चले कि इसी समझौते की वजह से चीनी सेना भी ऐसे हथियारों का प्रयोग करती है जो गैर-पारंपरिक हैं। ऐसे में अब भारतीय सेना भी दुश्मन को उसी के भाषा में जवाब देने के लिए तैयार है ।

दरअसल लद्दाख बार्डर इसी समझौते के कारण सैन्य हथियारों का प्रयोग की मनाही है लेकिन चीनी सेना लाठी-भाले,डंडा और रॉड से भारतीय फौज पर हमला करती है।

चीनी सेना की इस हरकत का जवाब देने के लिए भारतीय सेना भी ऐसे ही हथियारों से लैस हो गई है,जिससे बिना शांति समझौता तोड़े चीनी सेना को माकूल जवाब दिया जा सके। बताते चले कि भारतीय सेना के पास अब वज्र, त्रिशूल,सैपर पंच,भद्र और दंड जैसे हथियार मौजूद है।
बता दे ये सभी हथियार बिजली से चार्ज होते हैं और जब इनका इस्तेमाल किया जाता है तो इन हथियारों से बिजली का झटका महसूस होता है, मतलब इन हथियारों जब भी दुश्मन पर हमला किया जाता है तो ये हथियार दुश्मन के शरीर में बिजली का करंट जैसा चोट देता है।

उल्लेखनीय हैं बीते 15-16 जून 2020 की रात गलवान घाटी में भारत और चीनी सैनिकों के बीच हुए हिंसक झड़प में चीन के सैनिकों ने कीलदार लोहे की रॉड से हमला किया था। ऐसे में अब भारतीय सेना भी उन्हें जवाब देने के लिए इस तरह के हथियारों से लैस होने की पूरी तैयारी में है।
क्योंकि अघोषित युद्ध तक इन्ही हथियारों से दुश्मन का मुकाबला होगा।

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