
सांकेतिक तस्वीर।
ताइपे/बीजिंग। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच अक्सर चर्चा मे रहने वाला चीन अब अपनी एक और हरकत के चलते एक बार फिर दुनिया के मीडिया में छाया हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि इस समय चीनी वायु सेना और नौसेना के लड़ाकू विमान, युद्धपोत, एयरक्राफ्ट कैरियर दक्षिण चीन सागर से लेकर पूर्वी चीन सागर तक आक्रामक गश्त कर रहे हैं। जिसमें चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर “लियाओनिंग” ने भी अपने एस्कॉर्ट्स ग्रुप के साथ पूर्वी चीन सागर में दो हफ्तों तक ड्रिल किया है।
कहा जा रहा है कि ड्रिल के दौरान चीनी एयरक्राफ्ट कैरियरों से उड़े लड़ाकू और गश्ती विमानों ने ताइवान के नजदीक तक उड़ान भरी। जहां सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि उन्होंने ताइवान के पूर्व में जाने के लिए इस हफ्ते की शुरुआत में मियाको जलडमरूमध्य को पार किया है। हालांकि, इस दौरान चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर के मूवमेंट पर जापानी सेल्फ डिफेंस फोर्सेज ने कड़ी नजर बनाकर रखी।
वहीं प्लैनेट लैब्स की सैटेलाइट तस्वीरें के आधार पर बताया गया है कि चीन के इस एयरक्राफ्ट कैरियर को अपने बैटल ग्रुप के साथ जापान के येयामा द्वीप समूह के दक्षिण में लगभग 85 समुद्री मील और ताइवान से 160 समुद्री मील पूर्व में फिलीपीन सागर में देखा गया है।
बता दे कि इसी सप्ताह के बीते शुक्रवार को जापानी रक्षा मंत्री नोबुओ किशी ने बताया कि चीन के लियाओनिंग एयरक्राफ्ट कैरियर से 3 मई और 9 मई के बीच लगभग 100 से अधिक उड़ानें भरी गईं। इस ड्रिल में शेनयांग जे -15 लड़ाकू विमान,एंटी सबमरीन वॉरफेयर विमान और हेलीकॉप्टर भी शामिल थे।
दावा किया जा रहा है कि लियाओनिंग कैरियर ग्रुप में टाइप 055 क्लास क्रूजर/डिस्ट्रॉयर नानचांग, तीन टाइप 052D डिस्ट्रॉयर, एक टाइप 052C डिस्ट्रॉयर, एक टाइप 054A फ्रिगेट और एक अज्ञात टाइप 901 रिप्लेसमेंट शिप शामिल है। लियाओनिंग अपनी ऑपरेशनल तैनाती के दौरान कभी भी इतनी दूर तक नहीं गया था। मियाको जलडमरूमध्य ताइवान के उत्तर-पूर्व में जापान के रयुकू और येयामा द्वीप समूह को अलग करता है। हालांकि यह इलाका अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में आता है, इस कारण चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर के इस रास्ते गुजरने पर जापानी नौसेना ने कोई आपत्ति नहीं जताई है।
बताते चले कि इसके पहले इसी साल के अप्रैल में लियाओनिंग अपने एस्कॉर्ट्स ग्रुप के साथ दक्षिण चीन सागर अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियरों के एक समूह के बिलकुल नजदीक आ गया था। उस समय दोनों ही देशों के नौसैनिकों ने एक दूसरे की तस्वीरें भी कैद की थीं। भारी तनाव के बावजूद अमेरिका के थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और माकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडी ग्रुप ने युद्धाभ्यास को जारी रखा था। अमेरिका ने तब दावा किया था कि उनका यह अभ्यास किसी भी देश को चुनौती देना नहीं बल्कि स्वतंत्र नौवहन को बनाए रखना था। जबकि,बीजिंग ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि अमेरिकी युद्धपोत लगातार उकसावे और तनाव बढ़ाने वाली हरकतों को अंजाम दे रहे हैं। फिलहाल,चीन के इस ताजे हरकत को लेकर प्रभावित देश लगातार चीन की हरकतों पर बारीकी से नजर रखने के साथ-साथ पूरी तरह से अलर्ट पर है।
