
डूरंड लाइन (फाईल फोटो)
काबुल/इस्लामाबाद। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच डूरंड लाइन को लेकर जारी सैकड़ों साल का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है,जबकि इस समय तालिबान का शासन है अफगानिस्तान में लेकिन फिर भी विवाद कम होने का नाम नहीं ले रहा है,बता दें कि अफगान तालिबान और पाकिस्तान के बीच पहले से बेहतर तालमेल होने के खातिर पिछले साल अफगानिस्तान में जारी जंग के दौरान पाकिस्तानी सेना ने भरपूर मदद की थी जिससे संभावना थी कि अफगानिस्तान में तालिबान शासन आने के बाद यह विवाद समाप्त हो सकता है,लेकिन ऐसा हुआ नहीं। और अब रिपोर्ट आ रही है कि “डूरंड लाइन” पर पाकिस्तानी सेना और तालिबान के बीच हाल के दिनों में कई झड़पें हुई हैं। जहां अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने काबुल में पाक दूतावास के साथ सीमा पर गोलीबारी की घटनाओं पर अपना कड़ा विरोध दर्ज करना जारी रखा है।
बताते चले कि स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि तालिबान के लड़ाकों ने बॉर्डर पर गोलीबारी की है और अफगानिस्तान और पाकिस्तान सीमा पर पाकिस्तान की चौकियों को तोड़ दिया है। वहीं अफगानिस्तान के टोलो न्यूज चैनल के हवाले से रिपोर्ट सामने आ रही है कि इस सप्ताह के शुरू में एक पाकिस्तानी सैन्य हेलिकॉप्टर को गोली मार दिए जाने के बाद तालिबान और पाकिस्तानी केसैनिक दक्षिण-पश्चिमी अफगानिस्तान के निमरोज प्रांत में डूरंड रेखा पर हाई अलर्ट पर है।
दरअसल,अफगान विदेश मंत्रालय ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तानी सेना के अधिकारी खोस्त प्रांत के जाजी मैदान जिले के निवासियों को क्षेत्र छोड़ने या गंभीर परिणाम भुगतने के लिए चेतावनी जारी कर रहे थे। यह भी देखा गया है कि पाकिस्तान सीमा बलों ने डूरंड लाइन के साथ आवासीय क्षेत्रों को निशाना बनाते हुए गोलीबारी का सहारा लिया था।
वहीं,बॉर्डर पर जारी घटनाओं के कारण दोनों पक्षों के बीच संबंधों में गिरावट आई है। द्विपक्षीय संबंधों में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान पर नजर रखने वाले लोगों का कहना है कि डूरंड लाइन को लेकर तालिबान बहुत दृढ़ है। ऐसे में दोनों पक्षों को बातचीत के जरिए मसले को सुलझाना चाहिए और विवाद को और आगे नहीं बढ़ने दिया जाना चाहिए।
गौरतलब है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान से लगती सीमा जो डूरंड लाइन है,इसका हजारों साल का इतिहास है, इस सीमावर्ती इलाकों के नागरिक सीमा के आर-पार यानि इधर भी और उधर भी रहते हैं,जो कि ये लोग आपस में सगे संबधी है,इसलिये ये लोग डूरंड लाइन पर बाड़ या घेराबंदी का विरोध करते हैं,जिसका समर्थन अफगानिस्तान की सरकार करती रहती है,यही वजह है कि काबुल में किसी की भी सत्ता हो वह हर हाल में डूरंड लाइन पर पाकिस्तान द्वारा बाड़बंदी या घेराबंदी का विरोध करता है, चूंकि अफगानिस्तान में जब तालिबान की सत्ता वापसी हुई तो इस्लामाबाद को विश्वास था कि तालिबान हर हाल में डूरंड लाइन पर घेराबंदी का समर्थन करेगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं और जब भी पाक फौज जबरदस्ती घेराबंदी की कोशिश करती है तो उसे अफगानिस्तान के कड़े प्रतिरोध का सामना करना पड़ता है, इसीलिए संघर्ष अभी भी जारी है।
