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पाकिस्तानी अखबार का बड़ा दावा, इमरान और पाक आर्मी चीफ ने बड़ी मजबूरी में TLP के साथ किया समझौता, सीक्रेट आॅपरेशन ने दावें को किया खारिज – चंद्रकांत मिश्र/राकेश पांडेय


इमरान खान (फाईल फोटो)

इस्लामाबाद। पाकिस्तान में तहरीक-ए-लब्बैक के आगे इमरान सरकार के झुकने पर तहलका मचाने वाला खुलासा हुआ है,और खुलासा किसी और ने नहीं बल्कि खुद पाकिस्तान के एक मीडिया समूह ने किया है जिसमें यह दावा किया गया है कि फ्रांस के राजदूत को पाकिस्तान से निकालने की मांग कर रहे TLP और इमरान सरकार के बीच एक सीक्रेट एगरीमेंट हुआ था। जिसमें कथित खुलासे में यह कहा गया है कि यह समझौता इमरान खान ने बेहद मजबूरी में किया था। दरअसल, इमरान चाहते थे कि लब्बैक की नाजायज शर्तों के आगे सरकार नहीं झुकेगी और आंदोलन को सख्ती से दबा दिया जायेगा। लेकिन,पाक आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद ने इमरान सरकार से साफ करते हुए कह दिया कि पाक आर्मी TLP के खिलाफ मैदान में नहीं उतरेगी, फिर मजबूरी में इमरान सरकार को पीछे हटना पड़ा और न चाहते हुए TLP से समझौता करना पड़ा।

बताते चले कि यह पूरा बवाल फ्रांस की वजह से मचा हुआ है,क्योंकि फ्रांस में पिछले साल इस्लाम से संबंधित कुछ कार्टून प्रकाशित किया गया था जिससे ज्यादातर इस्लामी देशों में इस हरकत का घोर विरोध हुआ इसी कड़ी में पाकिस्तान में भी TLP ने चार मांगों को लेकर 6 बार हिंसक आंदोलन किया, इस हिंसक झड़प के दौरान 9 पाकिस्तानी पुलिसकर्मीयों की हत्या कर दी गई थी फिर इस्लामाबाद में टी एल पी द्वारा मार्च शुरू किया गया जिसके बाद इमरान सरकार ने तमाम सुरक्षाबलों की तैनाती कर दी थी। सड़कों पर कंटेनर लगायें गए,बड़े बड़े खडढा खोदा गया। भयावह स्थिति के बाद सरकार और TLP के बीच एक गुप्त समझौता हुआ।
जहां अब पाकिस्तान के मीडिया समूह ने एक बड़ा दावा करते हुए रिपोर्ट किया है कि इमरान सरकार इस आंदोलन को पूरी ताकत से कुचलना चाहती थी लेकिन पाक आर्मी चीफ ने अपने हाथ खड़े कर लिये, अब आर्मी चीफ के हाथ खड़े करने के पीछे दूसरा तर्क दिया गया कि पाक आर्मी में पंजाब मूल के बहुत लोग हैं और इस राज्य के बहुत लोग TLP से भी जुड़े हैं चूंकि मामला धर्म से जुड़ा हुआ है जिससे पाक सेना में बगावत हो सकती थी क्योंकि जब आंदोलनकारियों के खिलाफ सैन्य बल का प्रयोग होता तो जाहिर सी बात है सेंटीमेंटल मुद्दा खड़ा हो जाता और सेना का एक बड़ा तबका सरकार और सेना के खिलाफ में जा सकता था।

लेकिन सीक्रेट आॅपरेशन को पाकिस्तानी अखबार के इस दावें में बड़ा झोल नजर आ रहा है चूंकि यह मामला धर्म और देश के बाहर के देश फ्रांस से जुड़ा हुआ है,और यह घटना अब स्थानीय न होकर इंटरनेशनल मुद्दा बन चुका है चूंकि TLP के मांगों में पाकिस्तान से फ्रैंच राजदूत को बाहर करने की भी एक मांग शामिल हैं और इमरान सरकार आंदोलनकारियों की सभी शर्तें मानने को तैयार हैं अब ऐसे में फ्रांस के साथ-साथ तमाम यूरोपीय देशों और आंदोलन के दौरान मारे गए पुलिसकर्मीयों के साथी पुलिसकर्मियों के आक्रोश को पाकिस्तान की सेना और सरकार कैसे झेलती ? इसलिए प्रायोजित तरीके से विक्टीम कार्ड खेलने की योजना के अनुसार पाकिस्तानी अखबार ने सरकारी इशारें पर इस मनगढ़न्त खुलासे का ढोंग रचा है और इस फर्जी दावें के सहारे इमरान खान और पाक आर्मी चीफ बाजवा की इमेज को बचाने की नाकाम कोशिश हुई है और कुछ नहीं। इसलिए सीक्रेट आॅपरेशन न्यूज पोर्टल समूह पाकिस्तानी अखबार के इस मनगढ़न्त व फर्जी खुलासे को सिरे से खारिज करता है।

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