स्पेशल रिपोर्ट

पाकिस्तान जल्द बनने जा रहा है दुनिया का दूसरा सीरिया, टीएलपी की मांगों के कारण पूरा देश जा सकता है गृहयुद्ध की चपेट में – चंद्रकांत मिश्र (एडिटर इन चीफ)


दंगाई और पाक पुलिस आमने-सामने (फाईल फोटो)

इस्लामाबाद। पाकिस्तान इस समय अपने सबसे ख़तरनाक दौर में चल रहा है। ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान में जारी मुद्दे यदि जल्द नहीं सुलझाएं गए तो इसमें कोई शक नहीं है कि पाकिस्तान जल्द दुनिया का दूसरा सीरिया बन जाएगा,हालात दिन ब बेहद नाजुक होते जा रहे हैं। प्रधानमंत्री इमरान खान और पाक सेना के बीच अब संतुलन दिन ब दिन बिगड़ता हीं जा रहा है। वजह भी साफ है,प्रतिबंधित कट्टरपंथी संगठन तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) के खिलाफ कार्रवाई करने के इमरान खान के आदेश को पाकिस्तानी सेना ने मानने से साफ इनकार कर दिया था, बता दें कि टीएलपी ने इस साल अप्रैल और अक्टूबर में लाहौर,कराची,इस्लामबाद सहित पाकिस्तान के कई हिस्सों में अपनी मांगों को लेकर खूनी संघर्ष किया था।

सेना के इस फैसले से हतोत्साहित इमरान खान सरकार अब टीएलपी के साथ किए गए समझौते को 10 दिन के अंदर सार्वजनिक करने की तैयारी में है। सोमवार को राष्ट्रीय सुरक्षा पर संसदीय समिति की कार्यवाही के दौरान इस समझौते को सार्वजनिक करने का फैसला लिया गया। बताते चले कि इस साल अप्रैल माह में भी इमरान सरकार ने टीएलपी के आगे घुटने टेकते हुए समझौता किया था। उस समय तो पाकिस्तान में गृहयुद्ध की नौबत आ गई थी,और उस समय टीएलपी ने कई पुलिसकर्मियों को भी कैद कर लिया था।

रिपोर्ट में पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों द्वारा साफ किया गया है कि पाकिस्तान सरकार और टीएलपी के बीच समझौता कैसे हुआ ? और इतने दिनों तक इसको गुप्त क्यों रखा गया ? इन अधिकारियों ने यहां तक कहा कि उनका प्राथमिकता सड़कों को कब्जायें टीएलपी के समर्थकों को हटाना था। उधर समझौते को गुप्त रखने का कारण भी सामने आया है जिसमें कहा गया है कि सरकार और सेना को डर था कि अगर प्रारंभिक समझौते को सार्वजनिक किया गया तो एक बड़ी बहस शुरू हो सकती थी,इतना ही नहीं, इससे समझौते पर अमल करने में भी दिक्कत आती,जिससे देश में बड़े उपद्रव होने की आशंका थी।

वहीं, पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल कमर जावेद बाजवा ने 29 अक्टूबर को हुई राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में इस मुद्दे पर अपनी राय रखी थी, जिसे उन्होंने राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व के एक होकर टीएलपी के कार्यकर्ताओं पर बल प्रयोग के सभी फायदे और नुकसान के बारे में बताया था,इस दौरान जनरल बाजवा ने यह भी साफ किया था कि अगर वे लोग टीएलपी के खिलाफ बल प्रयोग की कीमत चुकाने के लिए तैयार हैं तो सेना कार्रवाई करेगी। उन्होंने इस दौरान लाल मस्जिद और मॉडल टाउन की घटना का भी उल्लेख किया।

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने 27 अक्टूबर को कैबिनेट की बैठक में प्रधानमंत्री इमरान खान के हवाले से कहा था कि सरकार किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने और चुनौती देने की अनुमति नहीं देगी। फवाद चौधरी ने टीएलपी को एक उग्रवादी संगठन करार दिया था। इस दौरान उन्होंने यह भी दावा किया था कि टीएलपी का भारत के साथ संबंध है,जहां बाद में पाकिस्तान सरकार ने इसी टीएलपी के साथ समझौता कर सभी कार्यकर्ताओं को रिहा कर दिया था।
फिलहाल इसमें कोई संदेह नहीं है कि यदि समझौता सार्वजनिक हुआ तो निश्चित रूप से पाकिस्तान में एक नई बहस का जन्म होगा जो कि बाद में गृहयुध्द में बदल सकता है।
बताते चले कि टीएलपी की मांगों में एक प्रमुख मांग है कि पाकिस्तान में तालिबान शासित अफगानिस्तान के तर्ज पर शरिया कानून लागू हो जो कि पाकिस्तान में बिल्कुल भी असंभव है,ऐसे में सरकार घोर धर्म संकट में है चूंकि सरकार ने टीएलपी के साथ समझौते में इस प्रमुख मांग पर हामी भर चुकी है,तो इसलिए यदि इस समझौते पर अमल नही किया गया तो निश्चित रूप से सीरिया जैसे हालात बनने में देर नहीं लगेगी,क्योंकि अभी हाल ही में पाकिस्तान ने टीएलपी का ट्रेलर देख चुकी है और सेना सरकार की मदद नहीं कर पायेगी, चूंकि सेना में भी शरिया कानून और टीएलपी समर्थकों के प्रति सहानुभूति है।

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