
इस्लामाबाद। सालों-साल से पाकिस्तान की जुल्म-ज्यादती झेल रहे बलूचों की स्थिति दिन ब दिन और भी गंभीर होती जा रही है,और इस पूरे हरकत को अंजाम दे रही है पाकिस्तान की सेना और खुफिया ऐजेंसी,जो कि आये दिन सुनियोजित तरीके से बलूचों को गायब करना,हत्या करना कभी-कभी लाश भी गायब कर देना यही सब पिछले कई दशकों से हो रहा है।
बता दें कि पाकिस्तान की सुरक्षा ऐजेंसियों द्वारा विशेष रूप से ISI द्वारा बलूचिस्तान में एक्स्ट्रा ज्यूडिशियल किडनैपिंग के कई मामले सामने आए हैं। यहां अपहरण और जबरन गायब होने के मामलों को लेकर दुनिया भर में कई विरोध प्रदर्शन हुए हैं। पाकिस्तान आर्मी का बलोच लोगों पर ये कहर दो दशकों से अधिक समय से जारी है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जबरन गायब होने की बात अब आम है,क्योंकि प्रांत के कोहलू जिले से कथित तौर पर 348 लोग लापता हैं। रिपोर्टों के अनुसार,पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में कोहलू जिले के उपायुक्त द्वारा 348 नामों वाले जबरन गायब होने की सूची जारी की गई थी।
लिस्ट में कथित तौर पर बलूचिस्तान से गायब हुए लोगों के 22,600 नाम थे। हाल ही में, छात्रों ने पाकिस्तान की राजधानी में प्रेस क्लब के सामने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसमें साथी छात्र हफीज बलूच की रिहाई की मांग की गई थी, जिसे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों ने जबरन गायब कर दिया था।
वहीं पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने पहले बलूचिस्तान और बाकी पाकिस्तान में जबरन गायब होने की एक ताजे रिपोर्ट पर गहरी चिंता व्यक्त की थी,जिसमें हाल ही में इस्लामाबाद विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर छात्र हफीज बलूच भी शामिल था।
इस दौरान आयोग ने एक बयान में कहा कि बलोच कथित तौर पर खुजदार में गायब हो गया था,जहां वह एक स्थानीय स्कूल में स्वयंसेवा करता है।
गौरतलब है कि बलूचिस्तान में पिछले कई दशकों से लापता लोगों की मौत हो जाती है,उनके क्षत-विक्षत शवों को खाई में फेंक दिया जाता है। उन्हें नजरबंद किया जा जाता है, डिटेंशन सेंटर में बंद कर दिया जाता है। और इस पूरी घटना को अंजाम देने में सिर्फ पाकिस्तानी ऐजेंसियों का ही नाम आता है,हालांकि कई आंदोलन पहले भी चले और आज भी चल रहे हैं लेकिन पाकिस्तान की हुकूमत पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
