इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

मिडिल-ईस्ट से लेकर रूस और यूरोप तथा चीन ये सभी बैठे हैं बारूद की ढेर पर, यदि जल्द कोई शांति की दिशा में सार्थक कदम नहीं उठा तो महाविनाश से बचना असंभव – चंद्रकांत मिश्र (एडिटर इन चीफ)


पोलैंड सीमा पर शरणार्थी (फाईल फोटो)

नई दिल्ली। दुनिया इस समय मिडिल-ईस्ट से लेकर भारत-चीन,ताइवान होते हुए रूस और यूरोपिय देशों तक बारूद की ढेर पर बैठी हुई है, बस एक चिंगारी हीं काफी होगा तीसरे विश्व युद्ध के लिए। ये सभी देश अपने दुश्मन देशों के विरूद्ध घातक हथियारों को तैनात कर चुके हैं और अब कपटपूर्ण तरीके से बातचीत कर रहे हैं जो कि परिणाम शून्य है।
एक तरफ बातचीत तो दूसरे फ्रंट पर घातक हथियारों की तैनाती जो कि साफ संकेत है कि यदि निकट भविष्य में जल्द परस्पर तनाव को संबंधित देश समाप्त नहीं किये तो वह दिन दूर नहीं जब दुनिया विनाश के मुंह में समा जायेगी, और इस बार तो ऐसा समझ में आ रहा है कि जितना नुकसान प्रथम और द्वितीय विश्वयुद्ध में नहीं हुआ था उससे कहीं अधिक इस तीसरे विश्वयुद्ध में होगा, वजह साफ है,चूंकि पहले की अपेक्षा अब अधिक घातक हथियार मौजूद हैं।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर इजरायल पूरी फील्डिंग पर है तो वहीं तालिबान को लेकर भी उसके पड़ोसियों के साथ-साथ अमेरिका व यूरोपीय संघ भी।

चीन की बात करें तो इस समय ताइवान और भारत ज्यादा प्रभावित दिख रहे हैं जो कि दोनों देश अपनी तैयारियों में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
तो वहीं रूस और बेलारूस के चलते यूक्रेन व पोलैंड काफी तनाव में है जिसको लेकर अमेरिका के साथ-साथ पूरा यूरोपीय देश यूक्रेन और पोलैंड के साथ खड़े दिख रहे हैं।

कुल मिलाकर इस समय दुनिया के जितने भी देश अपने दुश्मन से तनाव में है उन सभी देशों में एक बात कामन दिखाई दे रही है जिसे संयोग कहा जाए या और कुछ, कि जिन मुद्दों को लेकर तनाव बना हुआ है वे सब पिछले कुछ महिनों से ही सामने आयें है, हालांकि कुछ मुद्दे पुराने भी है लेकिन हाल की कुछ घटनाएं ज्यादा प्रभावी दिख रही है मसलन, तालिबान का अफगानिस्तान में काबिज होना, वही बेलारूस के माध्यम से पोलैंड सीमा पर शरणार्थी संकट का पैदा होना,तो यूक्रेन बार्डर पर भी रूसी फौज का भारी जमावाड़ा,तो वहीं नाटों फौज का ब्लैक सी में युद्धाभ्यास करना जिससे रूस की भृकुटी तनी हुई है, चीन दक्षिण सागर को लेकर खुराफात तो कर ही रहा था अब वह ताइवान और भारत को टारगेट कर रहा और इसी कड़ी में जापान के एक द्वीप समूह पर भी अपने लड़ाकू विमानों को भेजने का क्रम जारी रखा हुआ है।
कुल मिलाकर ऐसा दिखाई दे रहा है कि महत्वाकांक्षी देश दुनिया को महाविनाश की ओर ढकेलने से परहेज करते नहीं दिख रहे हैं, और आने वाले महाविनाश की कल्पना मात्र से बदन के रोयें कंपायमान हो जा रहे हैं,
बेहतर होगा कि स्थाई शांति की स्थापना में सार्थक कदम उठें तो सबका हित होगा।

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