इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

“सीक्रेट ऑपरेशन” की बड़ी पड़ताल,भारतीय खुफिया ऐजेंसी के हाई वैल्यू टारगेट दाऊद के भतीजे “सोहैल” को ISI ने हीं अमेरिका से सुरक्षित पहुंचाया पाकिस्तान, जबकि टारगेट पर पिछले काफी समय से जारी थी भारतीय ऐजेंसियों की पूरी फिल्डींग – चंद्रकांत मिश्र (एडिटर इन चीफ)


सांकेतिक तस्वीर।

नई दिल्ली/वाशिंगटन। इंडियन इंटेलीजेंस ऐजेंसी और मुंबई पुलिस के एक ज्वाइंट आॅपरेशन को तब बड़ा झटका लगा जब उन्हें मालूम हुआ कि उनका हाई वैल्यू टारगेट अंडरव‌र्ल्ड डान दाऊद इब्राहिम का भतीजा “सोहैल कासकर” अमेरिका से भारतीय ऐजेंसियों को चकमा देकर दुबई के रास्ते पाकिस्तान पहुंचने में सफल हो गया। वहीं “सीक्रेट-ऑपरेशन” की पड़ताल में पता चला कि सोहैल के सुरक्षित पाकिस्तान निकल जाने में पाकिस्तानी ऐजेंसी ISI की पूरी भूमिका रही है। बता दें कि सोहैल को भारत वापस लाने के लिए भारतीय खुफिया ऐजेंसियां और मुंबई पुलिस लंबे वक्त से कोशिश कर रही थी।

बताते चले कि सोहैल कासकर को ‘नार्को आतंकवाद’ (नशीले पदार्थो या उससे कमाए गए धन का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए करना) के आरोप में अमेरिकी ऐजेंसियों ने दानिश अली के साथ पकड़ा था। दानिश को तो भारत लाने में भारतीय ऐजेंसियां सफल रही,लेकिन इंटरनेशनल प्रोटोकॉल के चलते सोहैल को लाने में देरी की वजह से भारतीय ऐजेंसियां इंतज़ार में थी।

लेकिन भारतीय ऐजेंसियों की हवा तब टाइट हो गई जब उन्हें सोहैल के कुछ फोन कॉल से पता चला कि वे जिसके इंतज़ार में बैठे रहे वो तो कबका दुश्मन देश पाकिस्तान बाहिफाजत पहुंच चुका है,कितना बड़ा धोखा मिला है भारत को ? जिसका कि कभी सपने में भी ख्याल नहीं था,अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है कि अमेरिका ने उसे भारत को नहीं सौंपकर देश से बाहर कैसे जाने दिया ?

वहीं,जब यह प्रकरण “सीक्रेट-ऑपरेशन” न्यूज पोर्टल के संज्ञान में आया तो इस विषय में संबंधित सूत्रों से संपर्क किया गया जहां पर यह जानकारी सामने आई कि पाकिस्तानी खुफिया ऐजेंसी इस मिशन पर तभी से सक्रिय थी जब सोहैल के पार्टनर दानिश को भारतीय ऐजेंसियां भारत वापस ले जा चुकी थी,इसके बाद से ही ISI पूरी तरह से अलर्ट पर थी और जैसे ही मौका मिला ISI सोहैल को सुरक्षित पाकिस्तान पहुंचाने में सफल हो गई,दरअसल ISI के इस पूरे मिशन को सफल बनाने में ISI के अमरीकी ऐजेंटों ने भरपूर मदद की और भारतीय ऐजेंसियां सिर्फ भरोसे और इंतज़ार पर बैठी रह गयी और दुश्मन अपने इस मिशन को अंजाम देने में सफल हो गया,और भारतीय ऐजेंसियां सिर्फ हाथ मलती रह गयी।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2001 में दानिश दुबई गया,जहां उसकी मुलाकात सोहैल कासकर से हुई। फिर दोनों तस्करी के धंधे में लग गए,सोहैल दक्षिण अफ्रीका में हीरे की तस्करी के मामले में गिरफ्तार हो गया। जेल से छूटने के बाद दोनों स्पेन गए जहां वे अमेरिकी ऐजेंसियों के रडार पर आ गए। वर्ष 2014 में अमेरिकी ऐजेंसियों ने दोनों को ड्रग और हथियारों की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया,जहां 12 सितंबर, 2018 को सोहैल को दोषी ठहराया गया। इसके बाद से ही भारतीय ऐजेंसियां उसे भारत लाने की कोशिश में लग गयी,जहां अमेरिका और भारत के बीच हुए वर्ष 2005 की एक संधि के तहत उसे भारत को सौंपा जाना था,लेकिन ऐसा हुआ नहीं,और भारत के इस हाई वैल्यू टारगेट को सुरक्षित उसके असली ठिकाने पाकिस्तान पहुंचने दिया गया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *