इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

80 के दशक में पाकिस्तान के “परमाणु मिशन” को बर्बाद करने का टास्क दिया गया था इजरायल की घातक खुफिया ऐजेंसी “मोसाद” को, पहले CIA को दी गई थी जिम्मेदारी,CIA इस मिशन पर हुई फेल, तब मोसाद ने संभाला मोर्चा – चंद्रकांत मिश्र (एडिटर इन चीफ)


परमाणु परीक्षण का सांकेतिक तस्वीर।

यरूशलम/तेलअवीव। इजरायल की खुफिया ऐजेंसी “मोसाद” को लेकर उसके अतीत से जुड़ी उसके एक खतरनाक सीक्रेट ऑपरेशन का जिक्र सामने आया है,जिसमें यह दावा किया गया है कि वर्ष 1980 के दौरान “मोसाद” ने उन जर्मन एवं स्विस कंपनियों को टारगेट करते हुए उन पर घातक बमों से हमला किया था,जो कंपनियां उस समय पाकिस्तान के परमाणु हथियार कार्यक्रम में पाकिस्तान की भरपूर सहायता की थी। चूंकि इजरायल को डर था कि पाकिस्तान के परमाणु संपन्न होने से उसके अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा ना पैदा हो जाए,दरअसल,मंगलवार को इजरायल के एक मीडिया समूह ने स्विस के एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से मोसाद के इस आॅपरेशन को रिपोर्ट किया था।

दरअसल,इजरायली मीडिया समूह ने एक प्रमुख स्विस दैनिक के हवाले से यह रिपोर्ट किया कि अमेरिकी खुफिया ऐजेंसी जब इन विदेशी कंपनियों द्वारा पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम में जारी सहयोग को रोकने या पाकिस्तान के इस मिशन को बर्बाद करने में असफल हुई तब इजरायली ऐजेंसी मोसाद ने मोर्चा संभालते हुए पाकिस्तान को मदद पहुंचाने वाली इन तीन विदेशी कंपनियों पर तीन घातक हमले को अंजाम दी और इन कंपनियों को धमकाया भी,कि वें किसी भी स्थिति में पाकिस्तान के परमाणु मिशन में कोई मदद ना करें।

हालांकि,मोसाद की यह कोशिश काफी हद तक कामयाब भी रही,और पाकिस्तान का परमाणु मिशन अगले कई सालों तक प्रभावित भी रहा,लेकिन मई 1998 में जब भारत अपने परमाणु मिशन को कामयाब करने में सफल रहा तो पाकिस्तान ने भी 28 मई 1998 को बलूचिस्तान प्रांत में एक साथ पांच भूमिगत परमाणु परीक्षण किया और पाकिस्तान का यह पहला सार्वजनिक परीक्षण था। उसके बाद उसी साल 30 मई को भी पाकिस्तान ने दूसरा परमाणु परीक्षण किया। वहीं NZZ ने दावा किया कि पाकिस्तान और ईरान ने 1980 के दशक में परमाणु हथियार विकसित करने के लिए एक ज्वाईंट आॅपरेशन के तहत ये दोनों देश एक साथ मिलकर इस आॅपरेशन को आगे बढ़ाने पर काम किया,जहां इस दौरान जर्मन और स्विस कंपनियों ने उनके परमाणु कार्यक्रम में सहायता की।

हालांकि,बर्न और वाशिंगटन के अभिलेखागारों के दस्तावेजों में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं कि जिससे यह साबित होता है कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को प्रभावित करने का टास्क मोसाद को दिया गया था, वहीं इसी कड़ी में एक स्विस इतिहासकार एड्रियन हैनी के हवाले से यह भी साफ करने की कोशिश की गई है कि मोसाद, स्विस और जर्मन कंपनियों पर हुए बम हमलों में शामिल थी। फिलहाल,मोसाद के इस आॅपरेशन को साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है लेकिन उल्लिखित रिपोर्ट्स में मिले संकेतों के आधार पर प्रथम दृष्ट्या यह साबित होता है कि पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम को प्रभावित करने की पूरी जवाबदेही CIA की थी लेकिन जब CIA अपने मिशन को सफल करने नाकामयाब हो गई तब इस मिशन को पूरा करने की जिम्मा मोसाद को दी गई,और मोसाद अपने इस आॅपरेशन को पूरा करने में काफी हद तक सफल भी रही।

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