एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

अमेरिका को बड़ा झटका देते हुए सउदी ने चीन के साथ किया घातक समझौता, चीनी सेना के लिए जासूसी करने वाली कंपनी को मिला सउदी में ठिकाना, टारगेट बनेंगें खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने – राकेश पांडेय (स्पेशल एडिटर)


सांकेतिक तस्वीर।

रियाद। एक ओर जहां रूस-यूक्रेन जंग के बीच अमेरिका और पूरा नाटों समूह उलझे हुए हैं तो वही दूसरी तरफ चीन,वाशिंग्टन के खिलाफ लगातार सक्रिय है। जहां इस बीच तीन दिन के सऊदी अरब दौरे पर पहुंचे चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) के साथ मिलकर अमेरिका को बहुत बड़ा झटका दे दिया है। वहीं,सउदी-चीन के बीच हुई डील से पेंटागन की हवाईयां उड़ गई है। दरअसल,अमेरिका जिस डील से बचने की कोशिश कर रहा था उसे चीन और सऊदी अरब ने अब साइन कर लिया है।

दरअसल,इस डील से चीन की “हुवावे इलेक्ट्रॉनिक्स” कंपनी अब सऊदी अरब में सर्विस देगी। बता दे कि चीन की यह कंपनी 5G नेटवर्क के बहाने दूसरे देशों में चीन के लिए जासूसी करने के लिए बदनाम है। इसीलिए भारत समेत दुनिया के कई देशों ने चीन के इस हुवावे कंपनी से कोई डील नहीं किया,लेकिन सउदी ने इसे साइन कर अमेरिका को बड़ा झटका दिया है। बताया जा रहा है कि जिनपिंग की सऊदी विजिट के दौरान अब तक चीन और सऊदी अरब के बीच 30 अरब डॉलर के 20 ट्रेड एग्रीमेंट साइन हुए हैं। इसके अलावा कुछ और डील्स को लेकर दोनों देशों में बातचीत चल रही है।

बताते चले कि हाल के महीनों में सऊदी और अमेरिका के बीच रिश्ते खराब रहे हैं। यही वजह है कि बुजुर्ग किंग के सुधारवादी बेटे MBS ने देश के लिए नए विकल्प तलाशे।
सऊदी और चीन के बीच गुरुवार रात स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की डील भी हुई। जिनपिंग को रियाद में ग्रैंड वेलकम मिला। पहले उनके प्लेन और बाद में कार को रॉयल गार्ड्स ने एस्कॉर्ट किया। हर जगह सऊदी और चीन के फ्लैग नजर आए। MBS ने जिनपिंग के सम्मान में स्पेशल डिनर भी होस्ट किया।

वहीं, इस डील को लेकर रूसी मध्यस्थता की रिपोर्ट सामने आ रही है। क्योंकि,माना जा रहा है कि सऊदी-चीन डील कराने में पर्दे के पीछे रूस का भी हाथ है। अब ऐसे में अमेरिका का चिंतित होना स्वभाविक है। क्योंकि,खाड़ी देशों में अमेरिका के कई मिलिट्री और एयरबेस हैं। ऐसे में अमेरिकी ऐजेंसियों को शक है कि चीन,अमेरिका के तमाम सैन्य ठिकानों की जासूसी करेगा। फिलहाल,अमेरिका,नाटों और दूसरे देशों ने अब तक इस डील पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।

गौरतलब है कि कनाडा, ब्राजील, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों ने हुवावे के खिलाफ जांच कराई। जहां ब्रिटेन ने साफ तौर पर कहा था कि हुवावे अपने नेटवर्क का इस्तेमाल चीन की फौज के लिए जासूसी में करती है। भारत ने भी इस कंपनी को एंट्री नहीं दी है।

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