
द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान अमेरिकी युद्धपोतों की फ्लीट, फोटो साभार -(यूस के नेवल इंस्टींटयूट के ट्वीटर से)
मॉस्को। इस साल 24 फरवरी को जबसे रूस-यूक्रेन के बीच जंग छिड़ा है उसके बाद से ही तमाम ऐसे आधारहीन दावें सामने आते रहें हैं,जो कि थोड़े हीं दिन में दम तोड़ते रहे हैं ऐसे दावें। हालांकि, इस तरह के तमाम तथाकथित दावें भी जंग का हिस्सा रहे हैं। क्योंकि,इन तथाकथित दावें को जंग में इस्तेमाल करने की ऐतिहसिक परंपरा रही है। चूंकि, फर्जी दावें को जंग के बीच प्रचारित करने से कभी-कभी दुश्मन भ्रमित हो जाता है। शायद इसीलिए ऐसी हरकतों को अंजाम दिया जाता है। यही बात रूस-यूक्रेन जंग में भी लागू होती है। क्योंकि,इस जंग अब तक जितने भी दावें सामने आये वे सभी अमेरिका व यूरोपीय देशों की अधिकृत ऐजेंसियों और समाचार समूहों की तरफ से आये। जो कि महज थोड़े हीं दिन बाद हवा हो गए,लेकिन इन फर्जी दावें को सच मानकर चलने वाली उन संस्थाओं पर तरस आता है जो कि दशकों से अपनी साफ छवि के लिए जानी जाती रही है,जिनमें सरकारी और गैर सरकारी दोनों हीं शामिल हैं।
इसी कड़ी में पिछले कुछ महिनों से लगातार यह दावा सामने आ रहा है कि यूक्रेन के साथ जारी भीषण जंग के बीच रूस के गोला-बारूद का भंडार अब खत्म होने के कगार पर है। इतना ही नहीं यही दावा नाटों देशों और अमेरिका के लिए भी किया जा रहा है। लेकिन जब इस खुलासे को लेकर “सीक्रेट आॅपरेशन” मीडिया हाउस ने तथ्यों के आधार पर विश्लेषण किया तथा और भी माध्यमों से इस दावें की पड़ताल किया तो पाया गया कि गोला-बारूद व हथियारों की कमी से संबंधित ये सभी दावें बिल्कुल ही झूठे,निराधार और पूरी तरह से फर्जी हैं। इतना ही नहीं यहां यह भी साफ किया जा रहा है कि अमेरिका,नाटों तथा रूस यानि दोनों पक्षों के पास अभी भी भारी पैमाने पर गोला-बारूद व अन्य घातक हथियारों के भंडार मौजूद है,जिसे हम साबित भी कर सकते हैं।
“सीक्रेट आॅपरेशन” मीडिया समूह इस जंग में शामिल दोनों पक्षों के पास भरपूर मात्रा में गोला-बारूद व अन्य घातक हथियारों के भंडार की मौजूदगी के अपने इस दावें को साबित करने के लिए शीतयुद्ध के दौर का उल्लेख कर रहा है। दरअसल, द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद 12 मार्च 1947 से 26 दिसंबर 1991 तक शीतयुद्ध का बेहद खतरनाक दौर था। जहां इस दौरान दुनिया के कई हिस्सों में भयानक लड़ाइयां लड़ी गई,लेकिन इन युध्दों में दुनियां की दो महाशक्तियां अमेरिका, नाटों और सोवियत संघ (रूस) लगातार इन लड़ाइयों में पूरी ताकत के साथ शामिल रहीं।
इन युध्दों में शामिल ये दोनों महाशक्तियां यानि अमेरिका के लीडरशिप में नाटों और सोवियत संघ इस दौरान अपने-अपने पक्ष को भरपूर मात्रा में गोला-बारूद व अन्य घातक हथियारों की आपूर्ति करते रही। बता दे कि इनमें कई लड़ाई दशकों तक चली और अंत में बेनतीजा रही। जिसमें कोरियाई प्रायद्वीप,वियतनाम युध्द आदि। हालांकि और भी युध्द हुए जिनमें क्यूबा जंग प्रमुख रूप से है। क्योंकि यह जंग परमाणु युद्ध तक पहुंच चुकी थी। अब यहां अपने आप ही साफ हो जाता है कि शीतयुद्ध के दौर में जब कई दशकों तक कई जंगें हुई और उस समय दोनों महाशक्तियों के पास गोला-बारूद और अन्य हथियारों की कमी नही हुई तो आज रूस-यूक्रेन जंग में गोला-बारूद के भंडार कम कैसे हो रहे हैं ?
बता दे कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से हीं दुनिया के तमाम देशों को प्रमुख रूप से सिर्फ दो हीं महाशक्तियां (अमेरिका और रूस) गोला-बारूद और अन्य सभी तरह के घातक हथियारों की आपूर्ति करती रही है। यानि पिछले 77 सालों से ये आपूर्ति लगातार जारी है। जहां इस दौरान हुए तमाम युध्दों में सप्लाई कई गुना बढ़ी रही। जब ऐसी परिस्थितियों में मांग के अनुसार सप्लाई से अमेरिका और रूस पीछे नहीं हटे तो रूस-यूक्रेन जंग जो कि अभी साल भर भी नहीं चला है तो इसमें हथियारों व मिसाइलों के भंडार की कमी कैसे हो गई ?
ऐसे में इन सभी उपरोक्त तथ्यों के विश्लेषण के आधार पर “सीक्रेट आॅपरेशन” मीडिया हाउस ताल ठोंककर दावा करता है कि रूस-यूक्रेन जंग के बीच रूस या नाटों तथा अमेरिका के पास हथियारों,गोला-बारूद की बिल्कुल भी कमी नहीं है और अभी भी इन दोनों पक्षों के पास हथियारों के भरपूर भंडार मौजूद है। तथा दोनों पक्षों के पास हथियारों व गोला बारूद की कमी वाले इन तमाम दावों को सीक्रेट आॅपरेशन मीडिया समूह सिरे से खारिज करते हुए बिल्कुल झूठा व निराधार करार देता है।
गौरतलब है कि द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से सोवियत संघ के खिलाफ अमेरिका ने नाटों देशों का एक सैन्य संगठन का निर्माण किया। जहां इसी दौरान 12 मार्च 1947 में सोवियत संघ और नाटों के बीच शीतयुद्ध छिड़ गया जो कि सोवियत संघ के विघटन के बाद 26 दिसंबर 1991 को समाप्त हो गया। लेकिन विघटित रूस अभी भी नाटों के खिलाफ कई लड़ाइयों में नाटों के सामने खड़ा रहता है। जिसमें सीरिया गृह युद्ध प्रमुख रूप से शामिल हैं।
