इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

मुंबई हमलें के मास्टर माइंड भारत के मोस्ट वांटेड आतंकी हाफिज के घर हुए हमलें में भारतीय खुफिया ऐजेंसी राॅ का नाम आया सामने, इससे पहले भी पाक करता रहा है राॅ को टारगेट – चंद्रकांत मिश्र (एडिटर इन चीफ)


भारतीय कमांडों,सांकेतिक तस्वीर।

इस्लामाबाद। मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमले का मास्टर माइंड पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के घर पर वर्ष 2021 हुए बम धमाके में भारतीय खुफिया ऐजेंसी “राॅ” का नाम सामने आया है। दरअसल,पाकिस्तानी आतंकी हाफिज के घर हुए हमले में पाकिस्तानी गृहमंत्री राणा सनाउल्लाह ने भारतीय खुफिया ऐजेंसी राॅ का नाम लिया है। राणा ने इस्लामाबाद में बेहद चौंकाने वाला दावा करते हुए कहा कि पाकिस्तान में होने वाली हर आतंकवादी घटना में भारत किसी न किसी तरह शामिल है।

बता दे कि पाकिस्तान के पंजाब काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट के इंस्पेक्टर जनरल इमरान महमूद के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पाकिस्तानी गृहमंत्री राणा सनाउल्लाह ने कहा कि हमने दुनिया के सामने अपना रुख लाने और भारत के आतंकवाद के चेहरे का खुलासा करने का फैसला किया है। उन्होंने आगे भी कहा कि दशकों से पाकिस्तान आतंकवाद की आग में जल रहा है। हमारी मस्जिदों, इमामबारगाहों, महत्वपूर्ण इमारतों और सभाओं को निशाना बनाया गया है।

इस दौरान सनाउल्लाह ने पिछले साल लाहौर के जौहर टाउन विस्फोट का जिक्र करते हुए कहा कि आज जो मामला हम आपके सामने रख रहे हैं, हमारे पास इसमें भारत के शामिल होने के सबूत हैं। मालूम हो कि जून 2021 में लाहौर के जौहर टाउन में लश्कर-ए-तैयबा सरगना हाफिज सईद के घर के पास शक्तिशाली विस्फोट हुआ था। इसमें तीन लोगों की मौत हुई थी जिसमें एक पुलिस कांस्टेबल सहित 24 अन्य लोग घायल हो गए थे। यह विस्फोट इतना खतरनाक था कि सड़क पर चार फुट गहरा और आठ फुट चौड़ा गड्ढा हो गया था। जिससे आसपास के कई घरों और दुकानों को नुकसान पहुंचा था।

वहीं,इस प्रेस ब्रीफिंग में वरिष्ठ पुलिस अधिकारी इमरान महमूद ने भी कहा कि यह घटना 23 जून, 2021 को सुबह 11:09 बजे लाहौर के जौहर टाउन में हुई। विस्फोट में करीब 200 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री का इस्तेमाल किया गया था। इसे एक कार में रखा गया था। उन्होंने कहा कि आज तक, किसी भी आतंकवादी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है। चूंकि यह एक रिहायशी इलाका था, कारों और घरों को भारी नुकसान पहुंचा था। जैसे ही यह विस्फोट हुआ, आतंकरोधी सेल (सीटीडी) ने पहली सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की और 16 घंटे के भीतर विभाग ने मामले को ट्रेस कर लिया। महमूद ने यह भी दावा किया कि शुरुआती 24 घंटों में सीटीडी ने तीन आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है।

इस बीच महमूद ने यह भी साफ किया कि इस मामले में पहला आरोपी पीटर पॉल डेविड था। इसे विस्फोट में इस्तेमाल की गई गाड़ी के जरिए खोजा गया था। उन्होंने दावा किया कि वह रॉ के दो एजेंट अली बुदाइश और बबलू श्रीवास्तव से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ था। ये एजेंट उसे टेरर फाइनेंस करते थे। इस विस्फोट में डेविड की सहायता करने वाले दूसरे आरोपी का नाम सज्जाद हुसैन था। उसने विस्फोट में कम्यूनिकेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फोन को नष्ट किया था। डेविड ने एक और आरोपी जिया उल्लाह को भी ट्रेनिंग दी थी। यह मुख्य अपराधी समीउल्लाह हक का भाई था। वह पाकिस्तान में दूसरों की भी मदद करता था।

दरअसल,एक साल पहले हुए इस विस्फोट के कुछ दिनों बाद हीं पाकिस्तान ने भारतीय खुफिया ऐजेंसी राॅ को हीं इसका जिम्मेदार माना था। दावा तो यहां तक किया गया था कि इस हमले का मास्टरमाइंड एक भारतीय नागरिक था जो कि वह व्यक्ति भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ के साथ जुड़ा हुआ है। चूंकि,इस साल की शुरुआत में पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया था कि जौहर टाउन बम विस्फोट मामले में बलूचिस्तान से उसके मास्टरमाइंड और सूत्रधार को गिरफ्तार किया गया है और उसकी पहचान समीउल हक और उजैर अकबर के रूप में हुई थी।

यह पहला मौका नहीं है जब पाकिस्तान ने भारतीय ऐजेंसी का नाम लिया हो, इससे पहले भी पाकिस्तान में जब भी कोई इस तरह की घटनाएं हुई है, बिना देर किये इस्लामाबाद भारतीय ऐजेंसियों को टारगेट करने में जुट जाता है। जबकि वह भूल जाता है कि ये आतंकी और इससे जुड़े संगठन उसी के पाले हुए हैं जो कि सांप की तरह उसे हीं डंसते है। और जब मीडिया के सवालों का सामना होता है तो अपनी नाकामी छुपाने के लिए बिना देर किये भारत का नाम ले लेता है। बता दे कि पूरी दुनिया में केवल पाकिस्तान हीं ऐसा देश है जो कि आतंकवाद से लड़ने के नाम पर अमेरिका और खाड़ी देशों से बड़ा फंड लेता है। यहां तक कि लड़ाकूं विमानों की भी मदद लेता रहा है, साथ में घातक हथियारों की भी आपूर्ति,इसके बावजूद भी वह भारत का नाम जपता रहता है।

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