
सांकेतिक तस्वीर।
नई दिल्ली/माले। हाल के बीते दिनों से चीन लगातार भारतीय मीडिया के चर्चा में बना हुआ है। क्योंकि,तवांग झड़प के बाद से हीं आये दिन चीन की तमाम साजिशों का खुलासा हो रहा है। जहां इसी कड़ी में भारत के पड़ोसी देश मालदीव में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं। इस चुनाव में मालदीव में भारत और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्द्धा लगातार तेज होती जा रही है। भारत और चीन दोनों ही इस कोशिश में लग गए हैं कि मालदीव की अगली सरकार पर उनका प्रभाव हो। बता दे कि मालदीव में वर्तमान सोलिह सरकार जहां भारत समर्थक है और नई दिल्ली ने कर्ज से लेकर कोरोना संकट से निपटने में उसकी खुलकर मदद की है,वहीं अब्दुल्ला यामीन की विपक्षी पार्टी चीन के इशारे पर नाच रही है।
चूंकि,साल 2018 के चुनाव में राष्ट्रपति सोलिह की मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी ने अब्दुल्ला यामीन की पार्टी को सत्ता से बेदखल करते हुए कार्यभार संभाला था। यामीन की सरकार चीन के सामने नतमस्तक हो गई थी और उसने जमकर कर्ज लिया था। अब उसकी कीमत सोलिह सरकार को चुकानी पड़ रही है। चूंकि,भारत चाहता है कि उसकी नेबरहूड पॉलिसी और सागर लक्ष्य के तहत मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र में हिंद-प्रशांत रणनीतिक फ्रेमवर्क में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाए।
क्योंकि,चीन भारत को घेरने के लिए बनाई गई अपनी रणनीति ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ के तहत मालदीव को अपने साथ लाना चाहता है। इसकी वजह यह है कि मालदीव रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्थान पर है। इससे भारत और चीन के बीच मालदीव में एक वर्चस्व की जंग शुरू हो गई है। जिस वजह से इस चुनाव को गंभीरता से लेते हुए चीन विपक्षी दलों की मदद से एक बार फिर से सक्रिय हो गया है। चीन प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव और अब्दुल्ला यामीन की पीपुल्स नैशनल कांग्रेस के गठबंधन पर दांव लगा रहा है। इस बीच सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि चीन मालदीव में एक नौसैनिक बेस बनाना चाहता है।
यही कारण है कि मालदीव में चीन के इस मिशन को फेल करने के लिए भारतीय ऐजेंसियां लगातार हरकत में है। वहीं नई दिल्ली ने मालदीव की सोलिह सरकार को आश्वासन दिया है कि उन्हें न केवल राजनीतिक रूप से बल्कि सैन्य तरीके से भी लगातार मदद दी जाएगी। बता दे कि भारत को घेरने के लिए चीन पिछले कई सालों से भारत के पड़ोसी देशों को अपने प्रभाव में लेने के लिए लगातार सक्रिय है। इस दौरान चीन,म्यामांर में आर्मी रूल के जरिए हावी हो हीं चुका है। उसकी यही कोशिश बांग्लादेश,श्रीलंका,नेपाल और अब मालदीव में भी है।
दरअसल, चीन नई दिल्ली के पड़ोसी देशों में हावी होने के साथ-साथ इन देशों में अपने सैन्य ठिकाने बनाना चाहता है,लेकिन भारत दुश्मन के इस हरकत पर बहुत बारीकी से नजर रख रहा है। जहां अवसर मिलने पर दुश्मन के इस मिशन को फेल करने से नहीं चूकता। यही कारण है कि मालदीव में दुश्मन के इस मिशन को झटका देने के लिए भारत लगातार हरकत में है।
गौरतलब है कि बीते 9 दिसंबर को अरूणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में दुश्मन सैनिकों द्वारा भारतीय सीमा में घुसपैठ करने की कोशिश को रोकने के दौरान भारतीय सुरक्षाबलों के साथ झड़प हो गई थी। जहां इस दौरान चीनी सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट सामने आई थी। जिसे देखते हुए दोनों देशों के बीच एक बार फिर तलख़ी बढ़ती हुई नजर आ रही है। जबकि घटनास्थल से संबंधित दोनों देशों के क्षेत्रीय सैन्य कमांडर फ्लैग मीटिंग के जरिए विवाद सुलझाने और मौके पर स्थिरता का दावा कर रहे हैं।
