
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर,फोटो साभार -(जयशंकर के ट्वीटर से)
विएना। अब ऐसे लगने लगा है कि चीन के सामने भारत कतई झुकने वाला नहीं है। यही कारण है कि भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुश्मन की करतूत का बेझिझक पर्दाफाश कर रहे हैं। बता दे कि जयशंकर ने ऑस्ट्रिया दौरे के एक मीडिया इंटरव्यू में कहा कि कैसे चीन दूसरे देशों पर आक्रामकता का प्रदर्शन करता है। उनकी मानें तो चीन वह देश है जो किसी भी समझौते को मानने में यकीन नहीं रखता है।
साक्षात्कार के दौरान जयशंकर ने आगे भी कहा कि बड़ी चिंता की बात यह है कि हमने चीन के साथ कई समझौते किए हैं जिसके तहत वो हमारी सीमा और सीमाई इलाकों में सेना नहीं भेज सकते हैं। लेकिन उन्होंने इन समझौतों को नहीं माना और इस वजह से ही स्थिति काफी तनावपूर्ण है। हमने उनके साथ यह समझौता भी किया है कि वह वास्तविक नियंत्रण रेखा को एकपक्षीय कार्रवाई के तहत नहीं बदल सकते हैं जिसे उन्होंने कई बार बदलने की कोशिश की है। हमारा जो नजरिया है वह हमारे अनुभवों पर आधारित है।
इतना ही नहीं जयशंकर ने आगे यह भी दावा किया कि मेरा व्यक्तिगत अनुभव यही है कि चीन कभी किसी समझौते को नहीं मानता है। इस बीच जब जयशंकर को बताया गया कि चीन कहता आया है कि भारत किसी समझौते को नहीं मान रहा है तो इस पर भी जयशंकर ने कहा कि चीन यह कतई नहीं कह सकता है कि भारत ने कोई समझौता तोड़ा है क्योंकि अक्सर चीन की सेनाएं सबसे पहले सीमा पार करती हैं। उन्होंने कहा रेकॉर्ड भी यही कहता है और स्पष्ट है कि किसने सबसे पहले बॉर्डर क्रॉस किया ?
गौरतलब है कि पूर्वी लद्दाख बार्डर पर दुश्मन लगातार सक्रिय है। जहां इस दौरान वह निर्माण कार्य के अलावा अन्य हरकतों को भी अंजाम देने से चूक नहीं रहा। यही कारण है कि उसने वर्ष 2017 में डोकलाम में घुसपैठ करने की कोशिश की, इसके बाद गलवान संघर्ष को अंजाम दिया और अभी हाल ही में बीते 9 दिसंबर को भी अरूणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में घुसपैठ करने की नाकाम कोशिश की जहां इस दौरान भी संघर्ष हुआ। यही कारण है कि वर्ष 2014 से लेकर अब तक मोदी सरकार के कार्यकाल में चीन ने इतनी बार पैंतरेबाजी की, इससे अब नई चीन के खिलाफ बेहद आक्रामक है। यही कारण है कि हाल के सालों में बार्डर एरिया में जितना चीन मजबूत हो रहा है उतना ही भारत भी कर रहा है। इससे साफ है कि दुश्मन यदि कोई हरकत करता है तो अंजाम उसके खिलाफ होगा।
