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बेंजामिन नेतनयाहू ने अपनी जीत का किया बड़ा दावा -राजेंदर दूबे (स्पेशल एडिटर)

तेल अवीव
इजरायल में मंगलवार को हुए मतदान के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बड़ी जीत का दावा किया है। ईरान के साथ लगातार खराब होते रिश्ते और नेतन्याहू के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए पूरी दुनिया की निगाह इजरायल के चुनाव पर टिकी हुई है। भारत के लिए भी इजरायल का चुनाव महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पीएम नेतन्याहू के कार्यकाल में इजरायल के साथ रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। फेसबुक पर मंगलवार देर रात जारी एक बयान में नेतन्याहू ने कहा कि इजराइलियों ने दक्षिणपंथ और मेरी नेतृत्व वाली लिकुड पार्टी को बड़ी जीत दी है।

सर्वे में भी नेतन्याहू की पार्टी सबसे आगे
चुनाव बाद के सर्वेक्षणों में कहा जा रहा था कि लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आएगी और चुनाव नतीजों में दक्षिणपंथी पार्टियां अपना दबदबा बनाऐंगी। नेतन्याहू की पार्टी के खिलाफ तेलेम और येश अतिद पार्टियां चुनाव मैदान में हैं। इसरायल के इतिहास में कोई भी पार्टी आज तक पूर्ण बहुमत से सरकार नहीं बना पाई है।

पार्टी को वोट देते हैं मतदाता
इजरायल की संसद नेसेट का चुनाव अनुपातिक मतदान प्रणाली के आधार पर होता है। जिसमें मतदाता को बैलेट पेपर पर प्रत्याशियों की जगह पार्टी को मतदान करना होता है। पार्टियों को मिले मत प्रतिशत के अनुपात में उन्हें संसद की सीटें आवंटित कर दी जाती हैं। यह प्रक्रिया 28 दिनों के अंदर पूरी कर ली जाती है। अगर किसी पार्टी को 10 फीसदी वोट मिलता है तो उसे संसद की कुल 120 सीटों का 10 फीसदी यानी 12 सीटें दी जाती हैं।

न्यूनतम 3.5 फीसदी वोट पाना है जरूरी
किसी भी पार्टी को नेसेट (संसद) में पहुंचने के लिए कुल मतदान में से न्यूनतम 3.25 फीसदी वोट पाना जरूरी है। यदि किसी पार्टी का वोट प्रतिशत 3.25 से कम होता है तो उसे संसद में सीट नहीं दी जाती है। चुनाव से पहले इजरायल की हर पार्टी अपने उम्मीदवारों के प्रिफरेंस के आधार पर एक सूची जारी करती है। इसी के आधार पर चुनाव में जीत के बाद सांसद को चुना जाता है। अगर किसी सांसद की कार्यकाल के दौरान मौत हो जाती है तो इस सूची में शामिल बाद के नेताओं को मौका दिया जाता है।

इजरायली संसद में 120 सीट
इजरायल की संसद को नेसेट कहा जाता है। नेसेट प्राचीन हिब्रू शब्द है जो यहूदी परंपरा के अनुसार 120 ऋषियों और पैगंबरों की एक विधानसभा थी। नेसेट के सदस्य का कार्यकाल चार साल का होता है। इसी के जरिए इजरायल के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का चुनाव होता है। नेसेट में ही इजरायल का कानून बनता है। इसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। यहां मतदान करने की न्यूनतम उम्र 18 साल है।

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