
नक्सली (फाईल फोटो)
मुंबई। देश के 11 राज्यों के 123 जिलों में फैले नक्सलियों के नेटवर्क पर अब शामत आती दिख रही है,जिसमें महाराष्ट्र अब इस नेटवर्क से मुक्त होता दिख रहा है,चूंकि बीते शनिवार को महाराष्ट्र पुलिस के C-60 कमांडों फोर्स ने छत्तीसगढ़ की सीमा से सटे गढ़चिरौली जिले में नक्सलियों के दो-तीन शीर्ष कमांडरों समेत 26 नक्सलियों को शूटआउट में ढेर कर दिया है। और इस शूटआउट में 50 लाख रुपये का इनामी नक्सली कमांडर मिलिंद भी मारा गया है। जिस वजह से अब रिपोर्ट आ रही है कि महाराष्ट्र में अब कोई कमांडर नहीं है जो नेटवर्क को लीड कर सकें। बताया जा रहा है कि महाराष्ट्र पुलिस की यह कार्रवाई पिछले बुधवार को 15 पुलिस कमांडों की शहादत के बाद की गई थी। इस ऑपरेशन में शामिल सभी जवान महाराष्ट्र पुलिस के कमांडों फोर्स सी-60 के सदस्य थे,जिसे विशेष रूप से 1990 में नक्सल मूवमैंट के खिलाफ आपरेशन जारी रखने के लिये गठित किया गया था।
सी-60 कमांडों फोर्स के बारे में बताया गया है कि यह फोर्स पहले भी इस इलाके में इस तरह के कई ऑपरेशन करता रहा है। और शनिवार के दिन वाला यह ऑपरेशन इंटल इनपुट के आधार पर किया गया था,इस इंटल रिपोर्ट में फोर्स को टारगेट की लोकेशन के साथ-साथ,मूवमैंट के एक-एक के कमांडरों की सटीक रिपोर्ट दी गई थी। जिसमें एक टारगेट मिलिंद तेलतुम्बडे भी था जो कि 50 लाख रुपये का इनामी भी था तथा यह मूवमैंट में महाराष्ट्र का बड़ा चेहरा और मुख्य कमांडर भी था।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2009 में देश के 123 जिले माओवादी हिंसा से प्रभावित थे और 65 जिले बहुत ज्यादा माओवादी हिंसा से प्रभावित थे। लेकिन आज देश के मात्र 65 जिले माओवाद प्रभावित हैं और मात्र दो से तीन जिलों में माओवादी हिंसा सर्वाधिक है। बाकी जिलों में छिटपुट माओवादी गतिविधियां होती हैं। एक अन्य रिपोर्ट में कहा गया है कि गढ़चिरौली में माओवादी छिपते रहे हैं। चूंकि गढ़चिरौली में माओवादियों द्वारा हिंसक घटनाएं बहुत कम हुई हैं।
बल्कि आज वे मात्र छत्तीसगढ़ में हावी हैं, वह भी बस्तर डिवीजन के दो-तीन जिलों में। एक जमाने में बस्तर के जंगलों में गश्त करने से फोर्स डरती थी, लेकिन आज उस क्षेत्र में सुरक्षा बलों की चौकियां हैं। आज बस्तर के जंगलों के छोटे-छोटे इलाके में माओवादी छिपे हुए रहते हैं और पुलिस जब उधर सर्च ऑपरेशन चलाती है, तो वे उस इलाके की भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए तत्काल भाग जाते हैं और फिर उन क्षेत्रों में लौट आते हैं। छिटपुट ही हिंसक घटनाएं घटती है जो कि प्रभाव हीन ही रहती है।
एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार संयुक्त आंध्र प्रदेश (तेलंगाना समेत) में किसी समय साल में चार सौ-पांच सौ लोग नक्सली हिंसा में मारे जाते थे,अब एक-दो लोगो की मारे जाने की रिपोर्ट आती हैं।
फिलहाल महाराष्ट्र के गढ़चिरौली का आॅपरेशन सौ फीसदी सफल रहा और इस आॅपरेशन ने मूवमैंट के रीढ़ पर बड़ी चोट पहुंचाई है,और सुनने में आ रहा है कि महाराष्ट्र में मूवमैंट का कोई कमांडर बनने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है, निश्चित रूप से महाराष्ट्र पुलिस की यह C-60 कमांडों फोर्स अपने टास्क को पूरा करने में वेल प्रोफेसनल तरीके से माहिर है और इसका जीता जागता उदाहरण शनिवार का गढ़चिरौली का शूटआउट है।
