
दुश्मन के टैंक पर कब्जा करने वाले भारतीय जवान (फाईल फोटो)
नई दिल्ली। वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान देश की तीनों सेनाओं ने हिस्सा लिया और अपने अद्भुत पराक्रम का प्रदर्शन भी किया, जहां बाद में भारत को ऐतिहसिक जीत हासिल हुई जिसमें 93 हजार पाकिस्तानी सैनिकों ने आत्म समर्पण किया था जो कि दुनिया का अबतक का सबसे बड़ा सैनिक समर्पण था। लेकिन इस युध्द में देश की एक और फोर्स ने हिस्सा लिया था, जो कि इस फोर्स ने लड़ाई के दौरान भारी कीमत चुकाई थी, जिसके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता, वह फोर्स “सीमा सुरक्षा बल” (बीएसएफ) है। इस युद्ध में बीएसएफ के जांबाजों ने भारतीय सेना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर न केवल युद्ध लड़ा था, बल्कि देश के लिए सर्वोच्च कुर्बानियां भी दी थीं, बांग्लादेश मुक्ति संग्राम और भारत-पाक युद्ध 1971 के दौरान बीएसएफ के जांबाजों ने अपने सभी फ्रंट पर दुश्मन को उसकी औकात दिखा दी थी।

बताते चले कि वर्ष 1971 के युद्ध में बीएसएफ राजस्थान, गुजरात, जम्मू-कश्मीर, पंजाब, पूर्वी बंगाल और एनईएफ के साथ पूर्वी और पश्चिमी फ्रंट पर दुश्मन के खिलाफ अपने अद्भुत पराक्रम का प्रदर्शन किया था। जहां बाद में इस युद्ध में बीएसएफ के जांबाजों के युद्ध कौशल की खासी प्रशंसा हुई थी।

यह युध्द 13 दिनों तक चला,इस युद्ध में बीएसएफ का हर जांबाज अपनी जान की बाजी लगाकर युद्ध लड़ रहा था। इस दौरान बीएसएफ के करीब 125 जांबाजों ने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया,वहीं 392 जांबाज जवान गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस लड़ाई में बीएसएफ के 133 जवान लापता हो गए,जिनका आज तक कुछ पता नहीं चल सका। यहां विशेष ध्यान देने वाली बात यह है कि लापता इन जवानों के बारें में दुनिया के तमाम समाचार संस्थान और विशेषज्ञ अक्सर दावा करते रहे कि वो आज भी पाकिस्तान की जेलों में है और वे सभी अपना यादाश्त भूल चुके हैं,यहां तक की कई बार इस संबंध में आवाजें भी उठी,फिल्म भी बनी लेकिन पाकिस्तान हमेशा इन सभी दावों को खारिज करता रहा है।
युध्द समाप्ति के बाद बीएसएफ के अद्भुत शौर्य की बहुत तारीफ हुई,और इस युद्ध में अपनी जांबाजी का प्रदर्शन करने वाले 360 जांबाज जवानों को विशेष सम्मान से सम्मानित किया गया।
