
भारत का मोस्ट वांटेड दाउद (फाईल फोटो)
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भारत का मोस्ट वांटेड डॉन दाऊद इब्राहिम को लेकर एक बड़ा दावा किया है। ED ने कहा कि राकांपा मंत्री नवाब मलिक के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गवाह खालिद उस्मान शेख ने प्रवर्तन निदेशालय को बताया है कि दाऊद इब्राहिम इकबाल कासकर सहित अपने अन्य भाई-बहन और रिश्तेदारों को हर महीने 10-10 लाख रुपए भेजता था। बता दे कि ED ने इकबाल कासकर को मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया था।
बताते चले कि खालिद उस्मान शेख इकबाल कासकर के बचपन के दोस्त अब्दुल समद का छोटा भाई है। वर्ष 1990 में दाऊद और अरुण गवली के बीच हुए गैंगवार में अब्दुल समद मारा गया था। वहीं इकबाल कासकर और अब्दुल समद दाऊद के गिरोह में काम किया करते थे। उस्मान खालिद शेख ने ही ED को गैंगवार में भाई के मारे जाने की भी जानकारी दी है।
दरअसल,उस्मान खालिद शेख ने ऐजेंसी को बताया कि जब मेरे भाई की मौत हुई तो तब इकबाल कासकर दुबई में था। इसके बाद जब वो भारत आया तो मेरी मां से मिलने घर आया और अपनी संवेदना व्यक्त की। इसके बाद इकबाल ने मुझे और मेरे भाई शब्बीर उस्मान को अपने घर बुलाया जिस पर हमें उससे मिलने जाना पड़ा। बता दें शब्बीर उस्मान एक ड्रग्स के मामले में अभी जेल में है।
इसी कड़ी उसने आगे भी कहा कि जब हम इकबाल से मिलने उसके घर जाते थे तब अपने घर पर खाना खिलाता और एक घंटे के करीब बातचीत करने के बाद वापस भेजता था। उसी दौरान इकबाल ने बताया था कि दाऊद अपने भाई-बहन, रिश्तेदारों और गुर्गों को हर महीने 10-10 लाख रूपए भेजता है। ये सारा पैसा दाऊद अपने गुर्गों के जरिए भेजता है। इसी दौरान इकबाल कासकर ने मुझे बताया था कि दाऊद उसे भी हर महीने 10 लाख रुपए देता है।
यही नहीं खालिद उस्मान ने आगे भी कहा कि सलीम पटेल दाऊद को उसके नाम से जानता था। सलीम ने बताया वो उसका पड़ोसी था। सलीम दाऊद और इकबाल कासकर की बहन हसीना पारकर, जिसकी अब मौत हो चुकी है उसका ड्राइवर था। उस्मान ने यह खुलासा किया कि सलीम पटेल हसीना पारकर के लिए वसूली और जमीन विवाद सुलझाने का काम करता था। हसीना पारकर ने पैसे कमाने के लिए दाऊद के नाम का इस्तेमाल किया। बताया कि सलीम और हसीना ने मिलकर मुंबई के बांद्रा में ऐसे ही एक फ्लैट पर जबरजस्ती कब्जा कर लिया था। ये बात सलीम ने मुझे खुद बताई थी कि दाऊद के नाम का इस्तेमाल वसूली और जमीन हड़पने के लिए किया था।
अब ऐसे में केंद्रीय खुफिया ऐजेंसियों पर बड़ा सवाल उठता है कि दाऊद के बारे में जिन ऐजेंसियों को खुलासा करना चाहिए वो ऐजेंसियां अब तक क्या कर रही थी ? जबकि ED एक आर्थिक अपराध से संबंधित ऐजेंसी है जो कि इतनी बड़ी जानकारी सामने लाई है, तो ऐसे में केंद्रीय खुफिया ऐजेंसियों पर सवाल उठना स्वभाविक है,क्योंकि देश का सबसे बड़ा वांटेड अपराधी के बारे में अभी तक संबंधित ऐजेंसियां क्या कर रही थी ? जबकि इन ऐजेंसियों के नाक नीचे दाऊद अपने रिश्तेदारों को लगातार काफी समय पैसा भेजता रहा और ये लोग अंधे बहरे बने बैठे हैं।
