
देश के PM नरेंद्र मोदी, साभार (सोशल मीडिया)
नई दिल्ली/लखनऊ। नुपूर शर्मा के उस कथित टिप्पणी को लेकर शुक्रवार को देश भर में मुस्लिम समुदाय ने भारी विरोध प्रदर्शन किया,जहां इस दौरान यूपी के कुछ जिलों में इन प्रदर्शनकारियों ने जमकर उत्पात मचाया,पत्थरबाजी करने के साथ-साथ आगजनी व तोड़फोड़ की घटनाओं को अंजाम दिया। हालांकि पुलिस की सतर्कता के चलते इन घटनाओं पर समय से काबू कर लिया गया। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने कई बड़े सवालों को जन्म दिया है जो कि मुस्लिम पक्ष जस्टिफाई नही कर पा रहा।
बताते चले कि करीब दो सप्ताह पूर्व भाजपा के कुछ नेताओं द्वारा पैगंबर मुहम्मद के संबंध में कुछ टिप्पणी की गई थी,जिसे लेकर खाड़ी देश भारत के खिलाफ एक साथ खड़े हों गए थे,जहां भारत सरकार ने इन नेताओं के उस बयान से किनारा करते हुए साफ कर दिया कि इस तरह के बयानों से सरकार का कोई लेना देना नहीं है, इसके साथ ही भारत सरकार ने यह भी कहा कि वह सभी धर्मो का सम्मान करता है,जिसके बाद ही भाजपा के इन नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया,इतना ही नहीं इन नेताओं के खिलाफ मुंबई के एक थाने में मुकदमा भी दर्ज कर लिया गया जो कि विधिक कार्यवाही के अंतर्गत प्रचलित है।
इतना सबकुछ हो जाने के बाद भी तमाम लोग अभी भी इन नेताओं के विरूद्ध उनकी हत्या की लगातार धमकी दे रहे हैं।
जिस क्रम में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद देश भर भारी विरोध प्रदर्शन किया गया, इतना ही नहीं यूपी के प्रयागराज सहित कई जिलों में हिंसक झड़प की रिपोर्ट सामने आई है।
अब सवाल उठता है कि चीन में पिछले कई सालों से लगातार क्रूरता व ज्यादती के शिकार हो रहे लाखों मुस्लिमों के मुद्दे पर दुनिया भर के मुस्लिम देश व मुस्लिम संगठन क्यों चुप्पी साधे हुए हैं ? इतना ही नहीं पाकिस्तान सहित दुनिया के कई मुस्लिम देशों में मुस्लिमों पर सालों से अत्याचार हो रहा है,लेकिन क्या मजाल है कि कोई भी मुस्लिम संगठन या मुस्लिम देश एक शब्द बोल दें,और सबसे हैरानी भरी बात यह है कि पाकिस्तान व बांग्लादेश में मुस्लिम पक्ष द्वारा आये दिन हिंदू धर्म से संबंधित मंदिर व देवी देवताओं की मूर्ति तोड़ा जा रहा है, जहा पर मुस्लिम समुदाय एक दम से खामोश है।
फिलहाल, शुक्रवार की घटना को लेकर भारतीय ऐजेंसियां बेहद सतर्क है और माहौल बिगाड़ने वालो पर सख्ती के साथ कार्यवाही में जुट गई है। लेकिन ऐसे लोगों को समझना होगा कि ये लोग भारत में रह रहे हैं और भारतीय संविधान के तहत उन पर विधिक कार्यवाही होनी है,ऐसे में देश के बाहर से मिल रहे समर्थन का कोई मतलब नहीं निकलता है। इसलिए बेहतर होगा कि भारत की संवैधानिक व्यवस्था के अंतर्गत ऐसे लोग आचरण करें वर्ना कानून तोड़ने वालों के विरूद्ध सख्ती के साथ भारतीय ऐजेंसियां कार्यवाही करेगी।
