इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

‘सीक्रेट-आॅपरेशन’ के विश्लेषण में ‘अग्निपथ’ के तहत ‘अग्निवीर’ एक असफल डिफेंस प्रोजेक्ट – चंद्रकांत मिश्र (एडिटर इन चीफ)


सांकेतिक तस्वीर।

नई दिल्ली। केंद्र में जबसे NDA की सरकार आई है,तबसे लगातार देश का डिफेंस हर स्तर पर पहले से कही बेहतर मजबूत हो रहा है। देश की तीनों सेनाओं को आधुनिक सैन्य संसाधनों से लैश किया जा रहा है,जिससे दुश्मन भी अपनी ताकत में इजाफा करने में जुट गया है। इस बीच बीते मंगलवार को केंद्र सरकार ने तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारियों के मौजूदगी में ‘अग्निपथ’ प्रोजेक्ट के अंतर्गत ‘अग्निवीर’ सैनिकों की भर्ती का ऐतिहासिक ऐलान किया,जहां इसकी पूरी संरचना को विधिवत् तरीके से सार्वजनिक किया गया। अब इस नये डिफेंस प्रोजेक्ट को लेकर देश में एक अलग बहस छिड़ गई है,कुछ लोग इसे असफल मान रहे है तो वही कुछ इसकी गुणगान में कसीदे पढ़ रहे हैं।

लेकिन ‘सीक्रेट आॅपरेशन’ न्यूज पोर्टल समूह के विश्लेषण में केंद्र सरकार की यह परियोजना देश के डिफेंस को बेहद कमजोर करने वाली योजना दीख रही है। दरअसल,सरकार ने इस योजना के तहत भर्ती होने वाले सैनिकों को मात्र 4 साल के लिए ही अधिकृत किया है,जहां ये अग्निवीर सैनिक 4 साल बाद सेवानिवृत्त होकर एक प्रमाण पत्र के साथ दूसरी नौकरियों के लिए फिर से कोशिश करेंगे,जहां इनको अन्य नौकरियों में प्राथमिकता दी जायेगी,अब यहा बताना जरूरी है कि इसके पहले से ही यह नियम है कि भारतीय सेना से रिटायर होने वाले जवानों को अन्य सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता रहती है,लेकिन आंकड़ों पर गौर किया जाये तो तस्वीर साफ हो जाती है कि अन्य नौकरियों में जवानों की नाम मात्र नौकरी मिलती है,जबकि पूरे देश से सीमित संख्या में ही जवान सेना से रिटायर होते हैं। यानि जब सीमित संख्या को प्राथमिकता होने के बावजूद भी सभी जवानो को नौकरी नहीं मिल पा रही है तो बड़ा सवाल खड़ा होता है कि जब भारी संख्या में हर चौथे साल ये अग्निवीर रिटायर होंगे तब इनके साथ क्या होगा ?

दूसरी बात एक नौजवान को सैनिक बनने के लिए उसको कितनी तपस्या करनी पड़ती हैं ? यह बात किसी से छुपी नहीं है। और ऐसे में इन नौजवानों को सिर्फ 4 साल मिल रहा है जबकि अन्य सरकारी नौकरियों के लिए प्रयासरत नौजवान सिर्फ एक ही टारगेट की तैयारी करता है और सफल होने पर पूरा जीवन उसी विभाग में बिता देता है। ऐसे में देखा जाये तो यह देश के नौजवानों के साथ बहुत बड़ा विश्वासघात है,सरासर बेईमानी है।

तीसरी बात इस भर्ती प्रक्रिया में उन सभी मानदंडों का उपयोग हो रहा है जो कि एक रेगुलर आर्मी भर्ती के दौरान किया जाता है। तो फिर क्या जरूरत है किसी नौजवान को एक सैनिक बनने के लिए इतनी तपस्या करने की ?

चौथी बात किसी भी प्रोफेशनल आर्मी मैन को फ्रंट व अन्य अनुभव को हासिल करने में उसका पूरा जीवन बीत जाता है फिर भी ऐसे अनुभवी लीडरशिप के बावजूद भी कभी कभार डिफेंस के तमाम आॅपरेशन फेल हो जाते हैं और ऐसे में 4 साल के सेवाकाल वाले जवानों से बेहतर परिणाम की उम्मीद कैसे किया जा सकता है ?

पांचवी बात अगर इजरायल के पैटर्न पर इस प्रोजेक्ट की रूप रेखा बनाई गई है तो फिर पूरी तरह से इजरायल का ही सिस्टम फालो किया जाना चाहिए था न कि खिचड़ी के जैसा।

कुल मिलाकर हमारे विश्लेषण में यह साफ है कि इस प्रोजेक्ट में बहुत सारी कमियां है और ऐसा लगता है कि जैसे इसे बहुत ही जल्दबाजी में अमल में लाया गया है,इसलिए बेहतर होगा इस पर सरकार रेशटोर करते हुए ईमानदारी से इस परियोजना में सुधार करते हुए,पुराने सिस्टम के तहत हीं आर्मी भर्ती करें नहीं तो नौजवानों का मोराल डाउन होगा, जो कि देश हित में कतई नहीं होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *