इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

भारत के यूपी और असम से सटे अंतर्राष्ट्रीय बार्डर पर देश के भीतर मुस्लिमों की अचानक बढ़ी आबादी ने भारतीय ऐजेंसियों की उड़ाई नींद, खुलासे के बाद केंद्रीय गृहमंत्रालय हुआ अलर्ट – हेमंत सिंह/नित्यानंद दूबे


फाईल फोटो, साभार -(सोशल मीडिया)

नई दिल्ली। भारत के यूपी और असम में इंटरनेशनल बॉर्डर से लगते जिलों में पिछले सिर्फ 10 साल में अप्रत्याशित जनसंख्या में बदलाव की रिपोर्ट सामने आई है। जहां ग्राम पंचायतों के इस ताजे रिपोर्ट के आधार पर UP और असम की पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को अलग-अलग अपनी एक स्पेशल रिपोर्ट भेजी हैं।

जहां इन दोनों ही रिपोर्ट में यह कहा गया है कि बॉर्डर के साथ लगते जिलों में मुस्लिम आबादी 2011 के मुकाबले 32% तक बढ़ गई है,जबकि पूरे देश में यह बदलाव 10% से 15% के बीच है। यानी,मुस्लिम आबादी सामान्य से 20% ज्यादा बढ़ी है।

ऐसे में इस ताजे रिपोर्ट ने भारतीय सुरक्षा ऐजेंसियों और राज्यों की पुलिस का सिरदर्द बढ़ा दिया है। ऐजेंसियां इस बदलाव को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माना है। इसलिए दोनों राज्यों ने सिफारिश की है कि BSF के अधिकार क्षेत्र का दायरा 50 किमी से बढ़ाकर 100 किमी किया जाए। यानी BSF को सीमा से 100 किमी पीछे तक जांच और तलाशी करने का अधिकार होगा।

वहीं,केंद्रीय गृह मंत्रालय के सूत्र इस डेमोग्राफिक बदलाव को सिर्फ आबादी बढ़ने का मसला नहीं मान रहे है। बल्कि इसे भारत में घुसपैठ के नये डिजाइन के रूप में देख रहे हैं। यहीं नहीं इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर मुद्दा मानते हुए मंत्रालय बड़ी कार्यवाही की तैयारी में जुटा हुआ हैं।

दरअसल,रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि नेपाल की सीमा से लगते UP के पांच जिलों पीलीभीत,खीरी,महराजगंज, बलरामपुर और बहराइच में मुस्लिमों की आबादी 2011 के राष्ट्रीय औसत अनुमान के मुकाबले 20% से ज्यादा अधिक बढ़ी है। अब ऐसे में राज्यों की पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि अब यह पता लगाना है कि जो लोग पंचायतों के रिकॉर्ड में नए दर्ज हुए हैं,उनमें कितने वैध और कितने अवैध हैं ? वहीं,सुरक्षा ऐजेंसियों को यह भी संदेह है कि बाहर से आकर लोग बस गए हैं। जो कि इनके कागजात की जांच बेहद जटिल है।

इतना हीं नहीं नेपाल बार्डर के UP के सीमावर्ती जिलों में मस्जिदों और मदरसों की संख्या भी अप्रैल 2018 से लेकर मार्च 2022 तक 25% बढ़ी है। जबकि 2018 में सीमावर्ती जिलों में कुल 1,349 मस्जिदें और मदरसे थे,जो अब बढ़कर 1,688 हो गए हैं।

ऐसे में अब यह साफ हो चुका है कि सीमाई इलाकों में काफी समय से घुसपैठ जारी है। और बाहर से आने वाले लोग ज्यादातर मुस्लिम हैं। समय-समय पर ऐसी खुफिया रिपोर्ट्स मिलती रही हैं।

उधर,इसी क्रम में बांग्लादेश से लगते असम के जिले धुवरी, करीमगंज,दक्षिण सलमारा और काछर में मुस्लिम आबादी 32% तक बढ़ी है। जबकि 2011 में हुई जनगणना के राष्ट्रीय औसत अनुमान के लिहाज से आबादी में बढ़ोतरी 12.5% और राज्य स्तरीय अनुमान के मुताबिक 13.5% होनी चाहिए थी।

फिलहाल,इस ताजे खुलासे ने भारतीय सुरक्षा ऐजेंसियों की नींद उड़ा दी है,हालांकि इस लीक पर पहले से ही आशंका थी लेकिन लापरवाही के चलते कभी इस लीक को मजबूत करने की कोशिश नहीं की गई और आज नतीजा सबके सामने है। अब ऐसे में आॅपरेशन “वैरीफिकेशन” को बखूबी अंजाम देने में ऐजेंसियों को तमाम मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *