एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

रूस ने यूक्रेन के खिलाफ अब तक की सबसे घातक मिसाइलों को किया तैनात, जो हिरोशिमा से भी अधिक मचा सकती है भयानक तबाही, इन मिसाइलों के आगे अमेरिका भी खड़े कर लिये अपने हाथ – सतीश उपाध्याय/रविशंकर मिश्र


सांकेतिक तस्वीर।

कीव/मॉस्‍को। रुस-यूक्रेन के बीच जारी भीषण जंग पिछले 6 महिनों से अधिक बीत चली है,इसके बावजूद भी रुसी फौज अभी भी अपने टास्क से दूर है। जहां अब रुसी रक्षा मंत्रालय ने बीते 18 अगस्‍त को ऐलान कर दिया था कि उसने ऐसे तीन मिग-31 फाइटर जेट्स को तैनात किया है जो खतरनाक किंझल मिसाइलों से लैस हैं। रक्षा मंत्रालय ने आगे भी कहा कि इन बेहद खतरनाक मिसाइलों को कैलिनिनग्राद क्षेत्र में चकालोवेस्‍क एयरफील्‍ड पर अतिरिक्‍त सुरक्षा रणनीति के तहत तीन बार तैनात किया जा चुका है। बता दे कि रूस की तरफ से यह ऐलान ऐसे समय में किया गया है जब बालटिक क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है।

बताया जा रहा है कि रूस की ये Kh-47M2 किंझल एरो-बैलेस्टिक मिसाइल हवा से जमीन पर हमला करने में सक्षम है। इसकी रेंज 2000 किलोमीटर बताई जाती है। मिसाइल मैक 12 यानी 14817.6 किलोमीटर प्रति घंटे की स्‍पीड से लॉन्‍च होती है। मिसाइल 500 किलोटन परमाणु हथियार तक ले जाने में सक्षम है। यह भी दावा किया गया है कि इतनी मात्रा जापान के हीरोशिमा में गिराए गए परमाणु बम से 33 गुना ज्‍यादा है। यह सामान्‍य बैलेस्टिक मिसाइल से अलग ये मिसाइल अलग तरह से अपने टारगेट तक का रास्‍ता तय करती है। जिस समय ये मिसाइल हवा में होती है उस समय अलग-अलग तरह से अपना रास्‍ता तय करती है। इसलिए इसे इंटरसेप्‍ट करना सबसे मुश्किल काम है। रूस की ये हाइपरसोनिक मिसाइल सबसे खतरनाक मिसाइल है। किंझल मिसाइल को रूस का वो हथियार करार दिया जाता है जिसका पता लगा पाना दुश्‍मन के लिए बहुत ही मुश्किल है।

ये मिसाइल न सिर्फ अपने टारगेट को निशाना बना सकती है। बल्कि रडार की मदद से किसी मोबाइल टारगेट को भी तबाह कर सकती है। चूंकि रूस की ये किंझल मिसाइले पहली बार 19 मार्च को खबरों में आई थी। उस समय रूस ने ये ऐलान किया था कि उसने डेलीयाटन गांव में हथियारों के एक डीपो को नष्‍ट कर दिया है। इसके साथ ही रूस का ये हाइपरसोनिक हथियार पहली बार मीडिया रिपोर्ट्स में आ गया।

वहीं,रूस के इस मिसाइल के बारे में अमेरिकी राष्‍ट्रपति जो बाइडेन ने भी पहली बार इसके बारे में बयान देते हुए कहा था कि इस मिसाइल को रोक पाना एकदम ही असंभव है। किंझल मिसाइल को ऊंचाई वाली जगहों पर ही तैनात किया जा सकता है तभी ये अपनी स्‍पीड तक पहुंच पाती है। इसलिए ही मैक 3 की स्‍पीड वाले मिग-31 को इससे लैस किया गया है। ये जेट एयर डिफेंस इंटरसेप्‍टर क्षमता से लैस है। मालूम हो कि रूस की वायुसेना के पास 252 मिग-31 के फाइटेर जेट्स मौजूद हैं जो कि इस मिसाइल को फायर करने में सक्षम है।

उधर,यूक्रेन के राष्‍ट्रपति व्‍लोदीमिर जेलेंस्‍की ने आशंका जताई है कि रूस 24 अगस्‍त को अब तक का सबसे घातक हमला कर सकता है। यूक्रेन इस साल अपना 31वां स्‍वतंत्रता दिवस मना रहा है। इसी दिन रूस और यूक्रेन युद्ध के 6 महीने भी पूरे हो रहे हैं। रूस ने यूक्रेन के खिलाफ जारी जंग को ‘स्‍पेशल मिलिट्री ऑपरेशन’ करार दिया है। ऐसे में जेलेंस्की ने देशवासियों से अपील की है कि वो लड़ते रहें। अब ऐसे में सहज हीं अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुतिन का धैर्य अब जवाब दे गया है,यानि यह जंग अब अपने निर्णायक मोड़ पर दीख रही है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यूक्रेन के मददगार देश उसकी हिफाजत इस रूसी मिसाइल से कैसे करते हैं ?

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