
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी, फोटो साभार -(एंटनी के ट्वीटर से)
ताइपे/वॉशिंगटन। रूस-यूक्रेन जंग के बीच ताइवान और चीन के बीच जारी भीषण जंगी तनातनी के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने ताइवान को लेकर पूरी दुनिया को चौंकाते हुए बड़ा खुलासा किया है। एंटनी ने कहा कि हम पहले जैसा सोचा करते थे, चीन उससे भी तेज गति से ताइवान पर कब्जे का निर्णय ले चुका है। उन्होंने आगे भी बताया कि ताइवान को लेकर चीन की सोच अब पूरी तरह से बदल चुकी है। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि शी जिनपिंग के राष्ट्रपति के रूप में तीसरा कार्यकाल खत्म होने से पहले ही ताइवान पर कब्जे को लेकर खूनी संघर्ष हो सकता है। ताइवान भी चीन के किसी भी हिमाकत का करारा जवाब देने के लिए पहले से ही तैयार है। ऐसे में अगर ताइवान और चीन के बीच युद्ध हुआ तो रूस-यूक्रेन जंग से भी ज्यादा बड़ी तबाही देखने को मिल सकती है। ताइवान के पास अमेरिकी हथियारों का बड़ा जखीरा है। ताइवान दुनिया का इकलौता ऐसा देश है, जो अपने क्षेत्रफल के हिसाब से सबसे अधिक मिसाइलों का मालिक है।
दरअसल,अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कैलिफोर्निया के स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में कहा कि हाल के वर्षों में चीन का ताइवान के प्रति दृष्टिकोण में बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि चीन ने मौलिक निर्णय लिया था कि ताइवान जलडमरूमध्य में अब यथास्थिति स्वीकार्य नहीं होगी। बीजिंग बहुत तेज गति से ताइवान का विलय करने को लेकर दृढ़ संकल्पित है। इस दौरान ब्लिंकन ने ताइवान पर चीन के आक्रमण या विस्तार को लेकर कोई टाइमलाइन या दूसरी जानकारी शेयर नहीं की।
वहीं,बाइडेन प्रशासन के अधिकारी, चीन पर ताइवान जलडमरूमध्य में शक्ति संतुलन को नष्ट करने का आरोप लगातार लगाते रहे हैं, लेकिन आक्रमण के संबंध में चीन के इरादों पर बयान बहुत ही कम आया है। अमेरिकी अधिकारी अपने किसी भी बयान के प्रति अत्याधिक संवेदनशील माने जाते हैं। उनके बयान के पीछे कोई न कोई हित या मतलब जरूर छिपा होता है। ऐसे में अमेरिकी विदेश मंत्री का ताइवान पर चीन के कब्जे पर दिया गया बयान काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका का मानना है कि ताइवान पर चीन का आक्रमण एक ऐसी घटना होगी, जिसका भू-राजनीतिक और आर्थिक परिणाम पूरी दुनिया को भुगतने पड़ेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन कई बार साफ तौर पर कह चुके हैं कि उनका देश ताइवान की रक्षा करने के लिए वचनबद्ध है। उन्होंने ताइवान की रक्षा के लिए अमेरिकी सेना भेजने की भी बात की है।
