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छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में हथियारों का जखीरा बरामद

नारायणपुर, (हि.स.)। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में अबूझमाड़ के दुर्गम जंगलों एवं पहाड़ों में नक्सल विरोधी “माड़ बचाव” अभियान के तहत सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली। नारायणपुर पुलिस, डीआरजी, एसटीएफ और आईटीबीपी की संयुक्त कार्रवाई में नक्सलियों से मुठभेड़ हुई, जिसमें नक्सली अंधाधुंध फायरिंग करते हुए घने जंगल और नदी-नालों का सहारा लेकर भाग निकले। मुठभेड़ के बाद की गई तलाशी अभीयान में सुरक्षाबलों ने बड़ी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार, विस्फोटक सामग्री और नक्सल साहित्य बरामद किया। बरामद हथियारों में एलएमजी, ट्रिची असॉल्ट रायफल, इंसास, एसएलआर, स्टेनगन, मोर्टार, पिस्टल, देशी कट्टा, बीजीएल लॉन्चर, 49 भरमार बंदूक, हैंड ग्रेनेड, डेटोनेटर, वायर, जीपीएस उपकरण सहित 300 से अधिक सामग्री शामिल है।

नारायणपुर एसपी रोबिनसन गुरिया ने शुक्रवार को बड़ी मात्रा में अत्याधुनिक हथियार, विस्फोटक सामग्री बरामदगी की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि हमारा मुख्य उद्देश्य अबूझमाड़ के मूल निवासियों को नक्सलवाद से बचाकर उन्हें विकास और शांति की मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्हाेंने नक्सली संगठन में सक्रिय सभी नक्सलियाें से अपील करते हुए कहा कि हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण नीति अपनाएं और समाज के मुख्य धारा में शामिल हों। उन्हाेंने कहा कि अब नक्सली अबूझमाड़ क्षेत्र में कहीं भी सुरक्षित नहीं हैं और उनके ठिकाने लगातार सिमटते जा रहे हैं।

पुलिस के अनुसार बीते 24 अगस्त को पुलिस अधीक्षक रोबिनसन गुरिया के निर्देश पर डीआरजी, एसटीएफ और आईटीबीपी की संयुक्त टीम टारगेट एरिया कसोड़, कुमुराडी, माड़ोड़ा, खोड़पार और गट्टाकाल की ओर रवाना हुई थी। अभियान के दौरान कुतुल एरिया कमेटी के नक्सलियों ने सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने की नीयत से गोलीबारी शुरू कर दी। जवानों ने जवाबी कार्रवाई की तो सभी नक्सली मौके से भाग निकले। लगातार मूसलाधार बारिश और नदी-नालों के उफान के बावजूद सुरक्षाबलों ने पांच दिनों तक नक्सल विरोधी गश्त अभियान जारी रहा। नतीजतन, नक्सलियों का डंप किया गया हथियार एवं विस्फाेटक सामग्री का बड़ा जखीरा बरामद हुआ है। पुलिस का मानना है, कि इस कार्रवाई से नक्सलियों को न केवल हथियारों का नुकसान हुआ है, बल्कि रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी बड़ा झटका लगा है।
आईजी बस्तर रेंज सुन्दरराज पी. ने कहा कि वर्ष 2025 में नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व को भारी क्षति पहुंचाई गई है। अब नक्सली संगठन के पास हिंसा छोड़कर आत्मसमर्पण करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। इस अभियान ने स्पष्ट कर दिया है कि अब नक्सली अबूझमाड़ में सुरक्षित नहीं हैं। उन्हाेंने कहा कि नक्सल मुक्त बस्तर का सपना धीरे-धीरे साकार होता दिख रहा है।

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