इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

ईरान पर हमला होने में देरी पर “सीक्रेट-आपरेशन” का वर्ल्ड लेवल पर बड़ा खुलासा, खुलासों की कड़ी में “सीक्रेट-आपरेशन” है नं. 1 – चंद्रकांत मिश्र (एडिटर इन चीफ)

अमेरिका का अब्राहम लिंकन एअरक्राफ्ट स्ट्राइक कैरियर ग्रुप, फोटो साभार -(सोशल मीडिया)

तेहरान/नई दिल्ली। हाल ही में जबसे अमेरिका ने ईरान पर हमला करने की धमकी दिया है उसके बाद से ही खाड़ी सहित लगभग पूरी दुनिया यह मान कर चल रही है कि किसी भी वक्त अमेरिका संयुक्त रूप से सहयोगी देशों के साथ मिलकर ईरान पर किसी भी समय हमला कर सकता है, जहां इस दौरान बीच में कुछ इस मामले में नरमी भी देखने को मिली लेकिन यह तनाव एक बार फिर से अपने चरम पर है। जहां इस बीच दोनों ही पक्षों को जंगी तैयारियां किये जाने की तमाम मीडिया रिपोर्ट्स भी सामने देखने को मिल रहा है। लेकिन यहां सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर अमेरिका देर क्यों कर रहा है ? जबकि हालात साफ साफ बयां कर रहे हैं कि यह हमला अब तक हो जाना चाहिए था, जहां इस मुद्दे पर दुनिया एक मत नहीं है, ऐसे में सीक्रेट आपरेशन न्यूज पोर्टल समूह अमेरिका द्वारा जंग की पहल करने में की जा रही देरी पर बहुत हीं गंभीरता से अपनी स्वतंत्र रूप से जांच करते हुए प्रमुख कारणों का खुलासा कर रहा है।

दरअसल, इस पूरे घटनाक्रम पर हमनें अत्यंत सूक्ष्मता, शीत युद्ध कालीन तमाम तथ्यों तथा वर्तमान में व्याप्त और कई महत्वपूर्ण बिंदुओं व स्वतंत्र सूत्रों के माध्यम से हमनें पूरी जांच किया, जिसमें हमें यह ज्ञात हुआ है कि इस देरी के पीछे असल व प्रमुख कारण खाड़ी के तमाम अमेरिका के सहयोगी देशों द्वारा इस जंग में अमेरिका को अपने एअर स्पेस इस्तेमाल न करने के मुद्दे पर अड़े रहना है, जिसमें कुछ देशों में माहौल इतना खराब हो गया है कि अमेरिका को ऐसे देशों से अपने तमाम मिलिट्री बेस को कहीं और शिफ्ट करना पड़ रहा है, हालांकि इस माहौल को अभी तक दबा कर रखा गया है ताकि दुश्मन को इस बात की भनक तक न लग सके, जो कि एक विशेष युद्ध नीति का हिस्सा है।

हालांकि, अब यह बात धीरे धीरे सार्वजनिक भी होती जा रही है लेकिन दुनिया का ध्यान इस पर न के बराबर है। ऐसे में अब अमेरिका को एक नये सिरे से जंग की तैयारी करनी पड़ रही है तथा इन तमाम सहयोगी देशों को इस बात के लिए राजी किये जाने की लगातार कोशिश की जा रही है कि आपके एअर स्पेस का इस्तेमाल अमेरिका सिर्फ और सिर्फ डिफेंस के लिए करेगा और हमला करने के लिए वह अपने एअरक्राफ्ट कैरियर का इस्तेमाल करेगा, क्योंकि अमेरिका अपने इन सहयोगी देशों को यह विश्वास दिलाने में लगातार जुटा हुआ है कि हम हमला तो अपने एअरक्राफ्ट कैरियर के माध्यम से करेंगे लेकिन ईरान के रिटालियेशन को काउंटर करने के लिए हमें सहयोगी देशों के एअर स्पेस इस्तेमाल करने की सख्त जरूरत है।

ऐसे में इन देशों में विश्वास कायम करने के लिए हीं साऊथ चाइना सी से मिडिल ईस्ट में अपने सबसे ख़तरनाक एअरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन स्ट्राइक ग्रुप को अमेरिका शिफ्ट कर रहा है, जहां अमेरिका के इस कदम पर करीब-करीब बात भी बन चुकी है, यहीं कारण है कि अब अमेरिका एक बार फिर से दहाड़ना शुरू कर दिया है। मतलब अब्राहम लिंकन एअरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप को इसीलिए मिडिल ईस्ट में शिफ्ट किया जा रहा है, जहां इन तमाम ठोस तथ्यों के आधार पर सीक्रेट आपरेशन न्यूज पोर्टल समूह यह साबित करता है कि ईरान पर हमला होने की देरी के लिए सिर्फ और सिर्फ खाड़ी के तमाम सहयोगी देशों द्वारा अपने एअर स्पेस का इस्तेमाल अमेरिका को न करने देने के चलते हीं हुई है, लेकिन जैसा कि हमने अपने उल्लिखित रिपोर्ट में यह पहले स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका इस आपरेशन को अपने एअरक्राफ्ट कैरियर से ही अंजाम देगा और अपने इन सहयोगी देशों के एअर स्पेस का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ ईरानी रिटालियेशन को काउंटर करने के लिए हीं करेगा।

उल्लेखनीय है कि अतीत में सीक्रेट आपरेशन न्यूज पोर्टल समूह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे तमाम दावे कर चुका है जो कि सौ फीसदी सच साबित हुआ है, जहां इस क्रम में अपने इस दावे को भी हम पब्लिक कर रहे हैं जो यह भी सौ फीसदी सच साबित होगा।

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