चीन की विस्तारवादी नीति की वजह से उसका पड़ोसी देशों के साथ तनाव बना रहता है। अब जापान ने पहली बार साल 2024 से F-35B फाइटर जेट्स को तैनात करने का फैसला लिया है। इसकी मदद से जापान चीनी सेना के संभावित खतरे से निपटने की तैयारी करेगा। सूत्रों ने Yomiuri अखबार को बताया कि पहला F-35B जेट दूरदराज के द्वीपों की रक्षा के लिए दक्षिणी मियाजाकी प्रान्त में एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के न्यूताबारू एयर बेस पर तैनात किया जाएगा। यह हवाई क्षेत्र विवादित डियाओउ द्वीप समूह से लगभग 1,030 किमी उत्तर-पूर्व में है, जिस पर चीन अपना दावा करता आया है। हालांकि, यह द्वीप जापान द्वारा नियंत्रित किया जाता है और इसे सेनाकाकू द्वीप के नाम से जाना जाता रहा है।
डियाओउ के पास चीन ने गतिविधियों को किया तेज
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में चीनी कोस्टगार्ड्स ने डियाओउ के नजदीक गतिविधियों को तेज किया है। यह टोक्यो के लिए किसी संभावित खतरे से कम नहीं है। जापान का इस द्वीप पर साल 2012 से कंट्रोल रहा है। टोक्यो की चिंताओं को जाहिर करने हुए जापान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कंफर्म किया हैकि वॉरशिप्स के साथ चीनी एयरक्राफ्ट नियाओनिंग मियाको और ओकिनावा द्वीपों के पास देखे गए थे। यह एक साल में पहली बार था, जब इन एयरक्राफ्ट्स कैरियर को स्पॉट किया गया। हालांकि, वॉरशिप ने जापान की सीमा में घुसपैठ नहीं की थी।
जापानी पायलटों ने शुरू की ट्रेनिंग
F-35B यूएस-निर्मित फाइटर का वर्टिकल-टेक ऑफ और लैंडिंग (VTOL) वैरिएंट है। जापानी पायलटों ने अब F-35B फाइटर जेट्स की ट्रेनिंग लेनी भी शुरू कर दी है, जिनमें से प्रत्येक की लागत 13 बिलियन येन (यूएस $117 मिलियन) है। पहले F-35B स्क्वाड्रन में 18 लड़ाकू विमान शामिल होंगे। वहीं, जापान की कुल 42 जेट्स खरीदने की योजना है। जापान के डाइटो बंका विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफेसर गैरेन मुलॉय जोकि रक्षा मुद्दों में काफी माहिर माने जाते हैं- ने कहा कि F35-B इजूमो क्लास वेसल्स के साथ ऑपरेट किए जाएंगे।
जापान के साथ अमेरिका कर सकता है संयुक्त अभ्यास
वहीं, अमेरिका और जापानी सरकारें डियाओउ की सुरक्षा के लिए अपनी क्षमता बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर संयुक्त अभ्यास करने पर चर्चा कर रही हैं। राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने 28 जनवरी को पुष्टि की थी कि विवादित द्वीप श्रृंखला जापान-अमेरिका सुरक्षा संधि के अनुच्छेद 5 के अधीन है। अनुच्छेद 5 में कहा गया है कि अमेरिका सशस्त्र हमले के दौरान जापान के प्रशासन के तहत आने वाले क्षेत्रों का बचाव करेगा। हालांकि, अमेरिका ने संप्रभुता के मुद्दे के बारे में एक तटस्थ स्थिति भी बनाए रखी है और कहा है कि यह शामिल पक्षों के बीच का मुद्दा है।
