इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

भारत-चीन के बीच बढ़ती करीबी पर “सीक्रेट आपरेशन” का बड़ा खुलासा, आपरेशन सिंदूर हीं बना दोस्ती का बड़ा कारण – चंद्रकांत मिश्र (एडिटर इन चीफ)

सांकेतिक तस्वीर।

नई दिल्ली/बीजिंग। हाल ही में जिस तरह से भारत और चीन बेहद नजदीक आ रहे हैं, पेंटागन समेत पूरा क्वाड समूह भी बेहद हैरान व परेशान सा हो गया है, इतना ही नहीं दुनिया की कई वेल प्रोफेशनल इंटल एजेंसियां,तमाम डिफेंस एक्सपर्ट व अन्य संबंधित तमाम लोग तरह तरह के कयासबाजियों से इस समय जूझते नजर आ रहे हैं, किसी के पास इन दोनों जानी दुश्मन को अचानक नजदीक आने का कोई ठोस कारण समझ में नहीं आ रहा है। जहां ऐसे में “सीक्रेट आपरेशन” न्यूज पोर्टल समूह इस घटनाक्रम के संबंध में अपनी स्वतंत्र जांच व विश्लेषण अभी हाल ही में शुरू किया और नतीजा बेहद चौंकाने वाला प्राप्त हुआ।

इस दौरान हमें यह अनुभव मिला कि भारत और चीन के बेहद नजदीक आने का सबसे बड़ा व महत्वपूर्ण कारण आपरेशन “सिंधूर” हीं है। जिसे इसी साल के बीते मई माह में इंडियन एअर फोर्स व भारत की अन्य दोनों सेनाओं तथा संबंधित अन्य एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से पाकिस्तान के खिलाफ सर्व किया गया था, जहां इस दौरान दुश्मन को भारी जान-माल का नुक़सान उठाना पड़ा था। इस दौरान भारत की तरफ से दुश्मन के खिलाफ जारी इस मिलिट्री आपरेशन के बीच यह रिपोर्ट बेहद महत्वपूर्ण तथ्यों के साथ इंटरनेशनल मीडिया में टाप पर ट्रेंड हो रही थी कि पाकिस्तान को भारत के इस आपरेशन में खुद को डिफेंस काउंटर करने के लिए चीन की तरफ से भारी पैमाने पर सैन्य संसाधनों मदद आपूर्ति की गई थी।

इन तमाम मीडिया रिपोर्यट्स में यहां तक दावा किया जा रहा था कि चीन की तरफ से ऐसे जो भी सैन्य संसाधनों की पाकिस्तान को आपूर्ति की गई थी तो उसके पीछे चीन का यह मकसद था कि पाकिस्तानी सेना के माध्यम से वह अपने इन हथियारों, सैन्य संसाधनों की मारक क्षमताओं का पूर्ण परीक्षण करवा सकें और हुआ भी यही, क्योंकि इस दौरान चीन के ये हथियार पाकिस्तान के डिफेंस काउंटर करने में लगभग पूरी तरह से फेल रहे, यानि जब पूरी दुनिया को यह मालूम हो गया कि भारत और पाकिस्तान के बीच जंगी तनाव बढ़ाने में चीन का पूरा सहयोग रहा और चीन की तरफ से भारी मात्रा में पाकिस्तानी सेना को सैन्य आपूर्ति भी की गई थी तो चीन पूरी तरह से डर गया,इस क्रम में हमें यहां तक जानकारी मिली है कि चीनी सुरक्षा ऐजेंसियों व उसकी इंटल ऐजेंसियों को यह डर सताने लगा कि कहीं भारत क्वाड समूह की मदद से उसके खिलाफ लाईन आफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर कोई बड़ा मिलिट्री आपरेशन न लांच कर दे।

क्योंकि, चीनी सेना और उसकी इंटल ऐजेंसियों को यह बखूबी मालूम हो चुका था कि आपरेशन सिंधूर के बाद अचानक LAC पर इंडियन मिलिट्री, इंडियन एअर फोर्स व अन्य संबंधित एजेंसियां संयुक्त रूप से मिलिट्री मूवमेंट बढ़ा दी है, इतना ही नहीं क्वाड समूह से जुड़े सदस्य भी लगातार उस समय हरकत कर रहे थे, जहां इन्हीं सब तमाम कारणों से चीन,नई दिल्ली के सामने एक तरह से यानि अप्रत्यक्ष रूप से सरेंडर कर दिया और परिणाम सामने है, अब रही बात भारत की तो, भारत ने अपने जानी दुश्मन चीन के साथ अपने आक्रामक रूख को नरम क्यों कर लिया तो कुशल रणनीति के अनुसार कभी-कभी एकाक कदम पीछे हटाना भी बड़ी बुध्दिमानी होती हैं,शायद इसीलिए नई दिल्ली और बीजिंग इतना नजदीक आ गये।
रही बात क्वाड प्रोटोकॉल की तो इस नजदीकी से क्वाड के साथ जारी भारत के संबंधों पर जरा सा भी असर नहीं पड़ेगा, अर्थात क्वाड अपना काम करेगा और डिप्लोमैटिक चैनल अपना।

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