
चेचन लड़ाकें,फोटो-(सोशल मीडिया)
मॉस्को। रूस-यूक्रेन जंग के बीच अब पुतिन के लिए एक बड़ा झटका देने वाली रिपोर्ट सामने आई है। जिसमें दावा किया जा रहा है कि रूस का अशांत क्षेत्र चेचेन्या एक बार फिर गृहयुद्ध की आग में झुलसने को तैयार है। इस बार चेचेन्या के विद्रोहियों ने अपने ही सरदार के खिलाफ बगावत का ऐलान कर दिया है। दरअसल,चेचन्या रिपब्लिक का चीफ रमजान कादिरोव व्लादिमीर पुतिन की मदद में यूक्रेन के खिलाफ जंग लड़ रहा है। ऐसे में अगर चेचेन्या में फिर से हिंसा शुरू हुई तो पूरा रूस अस्थिर हो सकता है। क्योंकि साल 2003 से अभी तक चेचेन्या में शांति बरकरार है।
दरअसल,रूस जबसे यूक्रेन पर हमला बोला है,उसके बाद से ही चेचन लड़ाको का चीफ रमजान कादिरोव पुतिन की मदद में अपने लड़ाको के साथ यूक्रेन के खिलाफ जंग लड़ रहा है। जहां रमजान के इस फैसले का विरोध उसी समय शुरू हो गया था। लेकिन अब रिपोर्ट सामने आई है कि रमजान का विरोध करने वाले विद्रोहियों ने यूक्रेन के समर्थन में अपनी कई बटालियनें बना ली हैं। ऐसी ही एक यूनिट का नाम एक शीर्ष चेचन कमांडर और इस्लामी नेता शेख मंसूर के नाम पर रखा गया है। चूंकि,शेख मंसूर ने हीं 18 वीं शताब्दी के अंत में रूस के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। इस बटालियन के एक प्रवक्ता इस्लाम बेलोकिएव ने हाल ही में एक वीडियो जारी कर कहा कि चेचन विद्रोही अपनी मातृभूमि को स्वतंत्र कराने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने दावा किया कि विद्रोही स्थानीय आबादी के साथ रूसी सैनिकों की संख्या और उनके मूवमेंट के साथ-साथ हथियारों के प्रकार और हथियारों की मात्रा के बारे में खुफिया जानकारी जुटा रहे हैं।
इसी कड़ी में बेलोकिव के हवाले से आगे यह भी दावा किया गया है कि वे दुश्मन के पोजीशन को जानते हैं,जहां रूसी सैन्य ठिकाने हैं। अगर चेचन्या में गृहयुद्ध शुरू होता है,तो रूस गिर जाएगा। रूसी रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि चेचन्या में और संघर्ष के खतरे बेकार नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि अगर चेचेन्या में हिंसा शुरू होती है तो रूस को यूक्रेन से अपने सैनिकों को वापस बुलाना पड़ सकता है।
गौरतलब है कि वर्ष 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद इस इलाके में आतंकवाद और रूसी सेना से युद्ध ने सबकुछ बर्बाद करके रख दिया। ऐतिहासिक रूप से चेचेन्या पिछले 200 साल से रूस के लिए समस्या बना हुआ है।चेचेन्या का पुराना इतिहास भी रक्तरंजित रहा है। यहां के लड़ाके 15वीं सदी में ओटोमन साम्राज्य के खिलाफ लड़े थे। रूस के बढ़ते प्रभाव के कारण 1817 में चेचेन्या में कॉकस युद्ध शुरू हो गया। साल 1858 में रूस ने चेचेन्या में इमाम शमील के विद्रोह को कुचला था। उनके नेतृत्व में इस्लामी लड़ाके इस क्षेत्र को रूस से अलग एक देश बनाने की मांग को लेकर हिंसक गतिविधियों में लिप्त थे। वहीं,वर्ष 1991 में जब सोवियत संघ का विघटन हुआ तब चेचेन्या के विद्रोहियों को भी एक मौका दिखा। उन्होंने तब नए नए रूसी गणराज्य के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया। उनकी मांग थी कि चेचेन्या को भी रूस से अलग एक देश की मान्यता दी जाए। लेकिन, रूस किसी भी कीमत पर इन विद्रोहियों को मान्यता देने और आजादी के लिए तैयार नहीं था। इस बीच चेचन लड़ाको और रूस के बीच कई समझौते भी हुए।
लेकिन वर्ष 1999 में व्लादिमीर पुतिन ने रूसी राष्ट्रपति का पद संभालते ही चेचेन्या पर सख्ती शुरू कर दी। उन्होंने 2003 में चेचेन्या में एक विवादास्पद जनमत संग्रह करवाया और उसे और अधिक स्वायत्तता दे दी। इस जनमत संग्रह के जरिए चेचेन्या में नए संविधान का निर्माण भी किया गया। इसके बाद पुतिन के आदेश पर चेचेन्या में चुनाव भी करवाए गए। इस चुनाव में रूस समर्थक नेता अखमद कदिरौफ की एकतरफा जीत हुई जबकि पूर्व राष्ट्रपति अस्लान मस्खादौफ को चुनाव में शामिल होने की मंजूरी नहीं दी गई। 2004 में चेचेन विद्रोहियों ने बम विस्फोट कर रूस समर्थक राष्ट्रपति अखमद कदिरौफ को मार डाला। जिसके बाद से चेचेन्या में हालात एक बार फिर बिगड़ने लगे थे।
फिलहाल,चेचन्या रूस की एक कमजोर नस है,ऐसे में यदि यहां हिंसा भढ़कती है तो इसका विपरीत असर रूस के यूक्रेन के खिलाफ जारी लड़ाई पर पड़ेगा,जो कि पुतिन को बड़ा झटका दे सकता है। ऐसे में क्रेमलिन की पूरी कोशिश होगी यहां शांति बनी रहे लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। क्योंकि बिना बाहरी समर्थन के किसी भी देश में इस तरह के हरकत को अंजाम नहीं दिया जा सकता। अब ऐसे में बताने की जरूरत नहीं है कि चेचन्या में सशस्त्र बटालियन कैसे तैयार हो गई ? वो भी रूस-यूक्रेन जंग के बीच।
