एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

रूस-यूक्रेन जंग के बीच रूसी रक्षा मंत्रालय ने उन तमाम देशों की जारी की सूची, जो इस जंग में यूक्रेन की कर रहे हैं मदद – सतीश उपाध्याय/अमरनाथ यादव


सांकेतिक तस्वीर।

कीव/मॉस्को। इस साल के फरवरी से लेकर अब तक जबसे रूस-यूक्रेन के बीच जंग शुरू हुआ है,उसके बाद से ही अमेरिका सहित नाटों के तमाम देश इस जंग में यूक्रेन के साथ खड़े है। जहां इस दौरान ये तमाम देश यूक्रेन की मदद में तमाम सैन्य संसाधनों के अलावा भारी मात्रा में घातक हथियारों के साथ-साथ गोला-बारूद भी लगातार यूक्रेन पहुंचा रहे हैं। जिन्हें चाहकर भी रूसी फौज रोक नहीं पा रही है। हालांकि सैन्य संसाधनों की आपूर्ति के शक में रूस ने दुनिया भर के तमाम जहाजो को सीज कर रखा हुआ है। इसके बाद भी यूक्रेन को लगातार मदद मिल रही है। जहां अब रूसी रक्षा मंत्रालय ने उन देशों की लिस्ट जारी की है,जो यूक्रेन को बड़े पैमाने पर हथियार देकर यूक्रेन की मदद कर रहे हैं।

जिनमें रूस ने पहला आरोप अमेरिका पर लगाते हुए कहा कि अमेरिका ने मार्च 2014 में रूस में हुए तख्तापलट में बड़ी भूमिका निभाई थी। अमेरिका ने पिछले छह महीनों में मार्च से सितंबर तक – यूक्रेन को सैनिकों की वर्दी, नाइट विजन उपकरण और संचार उपकरण के लिए 32 मिलियन डॉलर दिए हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यूक्रेन को M142 HIMARS रॉकेट सिस्टम, एम777 होवित्जर, गोला-बारूद, स्ट्रिंगर मिसाइल, हार्पूर मिसाइल, सैनिकों के लिए वर्दी, सैन्य राशन की बड़ी खेप सौंपी है। बराक ओबामा ने 18 दिसंबर, 2014 को कांग्रेस से अनुमोदित “यूक्रेन फ्रीडम सपोर्ट एक्ट” पर हस्ताक्षर किए। तब से ही अमेरिका लगातार यूक्रेन को घातक हथियारों की सप्लाई कर रहा है। 2015 में, अमेरिका ने यूक्रेन को 230 Humvee बख़्तरबंद वाहनों और रेवेन ड्रोन की आपूर्ति की थी।

इसी कड़ी में रूस ने यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति के मामले में यूनाइटेड किंगडम को दूसरे स्थान पर रखा है। ये दोनों देशों की सैन्य सहयोग योजना,ऑपरेशन ऑर्बिटल, 2015 से प्रभावी है। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने तो युद्ध के बीच यूक्रेन की राजधानी कीव का दौरा कर अपना समर्थन भी प्रकट किया था। ब्रिटेन ने कम से कम 75 सैक्सन बख़्तरबंद वाहन और लैंड रोवर डिफेंडर आर्मर्ड रिकॉनसेंस एंड कम्यूनिकेशन वाहनों को कीव को सौंपा था। ब्रिटेन ने यूक्रेन को मेडिकल इक्विपमेंट, टैक्टिकल गियर, नाइट विजन इक्विपमेंट और जीपीएस नेविगेटर प्रदान किए हैं। इनकी कीमत यूके से 4.5 मिलियन डॉलर से अधिक है। 2022 में, लंदन ने यूक्रेन को लाइट एंटी टैंक मिसाइलों की बड़ी खेप सौंपी थी।

वहीं,रूस के इस सूची में लिथुआनिया भी शामिल है जो कि वह पहला देश था,जिसने यूक्रेन को सैन्य सहायता प्रदान की थी। लिथुआनिया ने कई बार यूक्रेन को सोवियत काल के छोटे हथियारों और गोला-बारूद की आपूर्ति की है। इन हथियारों को लिथुआनिया ने नाटो में शामिल होने के बाद सर्विस से हटा दिया था। 2016 में लिथुआनिया ने यूक्रेन को 150 टन से अधिक सैन्य आपूर्ति सौंपी थी। इनमें कलाश्निकोव असॉल्ट राइफलों के लिए मुख्य रूप से 5.45 मिमी के लाखों राउंड थे। 2017 और 2019 में भी लिथुआनिया ने यूक्रेन को गोला-बारूद की आपूर्ति की थी। 2022 में लिथुआनिया ने यूक्रेन को थर्मल इमेजिंग निगरानी उपकरणों के अलावा नॉर्वेजियन नासाएमएस मल्टीपल-लॉन्च रॉकेट सिस्टम को सौंपा था।

रूस के सूची में पोलैंड भी है जो कि यूक्रेन और पोलैंड ने हथियारों, सैन्य उपकरणों की आपूर्ति और ट्रेनिंग को लेकर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। रिपोर्टों के अनुसार, पोलैंड ने यूक्रेन को 50 M57 मोर्टार, 9 MT-LB मल्टीपरपज आर्मर्ड पर्सनल व्हीकल, 15 हैवी मशीन गन, दो AK-176M गन माउंट, पैराशूट सिस्टम और 100 रिकोलेस गन भेजे हैं।

रूस के मुताबिक यूक्रेन की सहायता करने में चेक रिपब्लिक भी है। जो कि वर्ष 2018 में,एक निजी चेक कंपनी, चेकोस्लोवाक ग्रुप ने ऐलान किया था कि वह यूक्रेन को 200 BVP-1 इंफेंट्री फाइटिंग व्हीकल की सप्लाई करेगा। इतना ही नहीं, उसने 2S1 Gvozdika होवित्जर को ओवरहॉल भी किया था। यूक्रेनी रक्षा मंत्रालय ने चेक डिफेंस सिस्टम्स ए.एस. ने रैपिरा आर्टिलरी गन खरीदने की डील भी फाइनल की थी। दावा किया गया था कि 2021 में चेक रिपब्लिक ने यूक्रेन को 26 Dana-M2 सेल्फ प्रोपेल्ड तोप की आपूर्ति की थी।

वहीं,वर्ष 2015 में बुल्गारिया ने भी अमेरिकी पैसे से यूक्रेनी सेना के लिए गोला-बारूद का उत्पादन किया। इसके तरह आरपीजी -7 वी हैंड-हेल्ड एंटी-टैंक ग्रेनेड लांचर और उसके गोले का निर्माण किया गया। फरवरी 2021 में, कीव ने बुल्गारिया से GP-25/30 अंडरबैरल ग्रेनेड लॉन्चर के लिए 100,000 40mm राउंड, ड्रैगुनोव स्नाइपर राइफल्स और कलाश्निकोव सबमशीन गन के लिए 7.62x54mm गोला बारूद के 1.5 मिलियन राउंड खरीदे।

2014 में, फ्रांस से बुलेटप्रूफ जैकेट की एक खेप यूक्रेन पहुंची है। फरवरी 2021 में फ्रांस ने यूक्रेनी स्पेशल फोर्सेज के लिए 60 APILAS एंटी-टैंक रॉकेट लांचर की आपूर्ति की थी। उसी साल अक्टूबर में अमेरिका ने कीव को सैन्य उपकरणों का एक कार्गो शिप सौंप दिया, जिसमें अन्य हथियारों के अलावा फ्रांसीसी एपीआईएलएएस हैंडहेल्ड एंटी टैंक रॉकेट लॉन्चर शामिल थे।

2018-2020 में यूक्रेन ने तुर्की से भी Bayraktar TB2 अनमैंड एरियल व्हीकल की खरीद की। इसके जरिए ही यूक्रेनी सेना ने डोनबास में रूस समर्थित विद्रोहियों के खिलाफ जबरदस्त हवाई हमले किए थे। 2022 में शुरू हुए युद्ध के दौरान भी तुर्की के इस ड्रोन ने रूसी सेना को भारी नुकसान पहुंचाया है।

इन देशों को चिन्हित करते हुए रूस ने दावा किया है कि उसके आॅपरेशन को यही देश प्रभावित कर रहे हैं। जिस वजह से रुसी फौज टास्क से अभी भी दूर है। इतना ही नहीं इनमें कुछ ऐसे भी देश शामिल है जो जंग से जुड़ी इंटेलीजेंस रिपोर्ट भी यूक्रेन को मुहैया करा रहे हैं जिस वजह से रूसी फौज के टाॅप लेवल के तमाम जनरल भी इस जंग में मारे गए हैं। यहां तक कि रूस के कई युद्धपोत भी दुश्मन का निशाना बन चुके हैं। यही वजह है कि रूस अभी भी अपने लक्ष्य से दूर है।

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