इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

रूस-यूक्रेन जंग में बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट आई सामने, ब्लैक सी के किनारे मृत पायी गई हजारों डॉलफिन, वैज्ञानिक ने रूसी पनडुब्बीयों को माना जिम्मेदार, “सीक्रेट-आपरेशन” न्यूज पोर्टल ने विज्ञानी के दावें को किया खारिज – चंद्रकांत मिश्र (एडिटर इन चीफ)


रूसी फौज फाईल फोटो,साभार (सोशल मीडिया)

मॉस्को/कीव। पिछले 6 महिनों रूस और यूक्रेन के बीच भीषण जंग लगातार जारी है। जहां इस बीच जंग से जुड़ी बेहद हैरान कर देने वाली एक रिपोर्ट सामने आई है। जिसमें दावा किया गया है कि ब्लैक सी की हजारों डॉलफिन मछलियों की मौत तेजी से हो रही है। वहीं,इस घटना के लिए वैज्ञानिको ने रूसी पनडुब्बीयों को जिम्मेदार माना है। लेकिन रूसेव के इन तथ्यों से “सीक्रेट आपरेशन” न्यूज पोर्टल समूह बिल्कुल भी सहमत नहीं है, क्योंकि इसके दो कारण है पहला बिना जंग के भी भारी संख्या में दुनियां के तमाम देश समुद्र में अपने युद्धक जहाज व पनडुब्बीयों को तैनात कर रखे हैं तथा साथ ही साथ वें अक्सर ड्रिल भी करते रहते हैं। वहीं दूसरा कारण समुद्र में तो बहुत सारे जीव रहते तो फिर डॉलफिन हीं क्यों शिकार बनी है ?

बता दे कि प्रसिध्द जीवविज्ञानी “इवान रुसेव” के हवाले से दावा किया गया है कि काला सागर में तैनात रूसी जहाज और पनडुब्बियां मछलियों की मौत का प्रमुख कारण हैं। रुसेव, यूक्रेन के दक्षिणी ओडेसा में तुजली लैगून नेशनल पार्क में काम करते हैं। उन्होंने कहा कि पानी के अंदर मरने वाली डॉलफिन की सिर्फ पांच फीसदी ही तटों पर बह कर आ रही हैं। बाकी बची हुई समुद्र में ही डूब जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि हम इन्हें गिन नहीं सकते हैं,लेकिन अनुमान लगा सकते हैं कि अब तक हजारों डॉलफिन मारी जा चुकी होंगी।

दरअसल,रूसेव का मानना है कि सोनार सिस्टम जो कि जहाजों और पनडुब्बियों में लगा होता है। और इस मशीन से चारों ओर एक फ्रीक्वेंसी निकलती है। अगर कोई चीज इसकी फ्रीक्वेंसी के बीच आ जाए तो वह रडार पर दिखने लगता है। इससे पानी के अंदर मौजूद पनडुब्बी और माइन्स का सैनिक पता लगा सकते हैं। रूसेव अपने एक एक फेसबुक पोस्ट में भी इसका जिक्र करते हुए खुलासा कर रहे हैं कि पानी में मौजूद जहाज और पनडुब्बी जानवरों का स्वास्थ्य खराब कर रही हैं। जहाजों और पनडुब्बीयों के रेडिएशन के संपर्क में आने से डॉलफिन मछलियों के उनके अंग निष्क्रिय हो जाते हैं।

ध्वनि तरंगों या इकोलोकेशन के जरिए डॉलफिन पानी के अंदर चीजों को खोज पाती हैं। ये उन्हें नेविगेशन, भोजन खोजने और शिकारी जानवरों से बचने में मदद करता है। लेकिन सोनार का रेडिएशन,जहाज के इंजन और हथियारों की आवाज डॉल्फिन के लिए संकट पैदा कर रही है। इस कारण वह चीजों को नेविगेट नहीं कर पा रही हैं। बुल्गारिया की रोपोटामो नदी के किनारे भी डॉल्फिन मृत मिली थी, जिनके शरीर पर पानी के अंदर माइन्स से जलने के निशान थे।

वहीं,रूसेव के दावें की विश्लेषण करने के बाद “सीक्रेट आॅपरेशन” न्यूज पोर्टल समूह इस नतीजे पर पहुंचा कि बिना जंग के भी दुनिया के तमाम देश समुंदर में भारी संख्या में अपने युध्दक जहाज व पनडुब्बीयो को तैनात कर रखे हैं जो कि अक्सर ड्रिल भी करते रहते हैं और ऐसा बहुत पहले से ही होता चला आ रहा है तब इस कारण से डॉलफिन मछलियों की क्यों मौत नहीं हुई ? जबकि समुंदर में तो बहुत सारे जीव रहते हैं तो सिर्फ डॉलफिन हीं क्यों इसका शिकार बनी ? अन्य जीव नहीं, ऐसा क्यों ? इसलिए “सीक्रेट आपरेशन” के ये दो सवाल रूसेव के दावें पर भारी पड़ रहे हैं। ऐसे में इन डॉलफिन की मौत के पीछे एक विशेष प्रकार की महामारी ही प्रतीत हो रही है अथवा रूस को बदनाम करने की साजिश भी हो सकती है।

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