इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

चीन-ताइवान के बीच जारी जंगी तनाव में अमेरिकी ऐजेंसियों ने किया बेहद चौंकाने वाला खुलासा, कहा लड़ाई से पहले घबराहट में चीन अपने सैनिकों की करा रहा है जासूसी – चंद्रकांत मिश्र/अमरनाथ यादव


सांकेतिक तस्वीर।

ताइपे/वाशिंग्टन। चीन-ताइवान के बीच जारी जंगी तनाव के बीच अमेरिकी ऐजेंसियों ने बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। दरअसल,अमेरिकी ऐजेंसियों ने अपने एक रिपोर्ट में दावा किया है कि ताइवान की घेराबंदी के बाद चीन घबरा गया है,घबराहट का आलम यह है कि वो अपने ही सैनिकों की जासूसी करवा रहा है। इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में आगे यह भी कहा गया है कि चीन अपने हीं सैनिकों की ब्रेन मैपिंग कराने के साथ-साथ इन सैनिकों को ब्रेसलेट पहनाकर उनका बायोलॉजिकल डाटा भी जमा कर रहा है। चूंकि,चीन को डर है कि अगर वो ताइवान पर हमला करता है तो चीन के सैनिक ताइवान के नागरिकों पर हमला करने से पीछे हट सकते हैं।

वहीं,अमेरिकी ऐजेंसियों के खुलासे के बाद “सीक्रेट आपरेशन” न्यूज पोर्टल ने भी इस रिपोर्ट का पूरा विश्लेषण किया तथा वर्तमान में जारी रूस-यूक्रेन जंग के भी उन तमाम रिपोर्ट्स का भी अवलोकन किया जिनमें कि इस तरह से संबंधित तमाम दावें सामने आये थे। जहां इस दौरान हमने यह अनुभव किया कि जंग में शामिल होने वाले सैनिकों में जो आक्रामक पक्ष के सैनिक होते हैं उनकी अपेक्षा रक्षात्मक वर्ग वाले सैनिकों की मानसिक स्थिति बहुत ही मजबूत व भावुक होती है। चूंकि, रक्षात्मक वर्ग अपने देश की रक्षा के लिए मरने मिटने से पीछे नहीं हटता,क्योकि उस समय उसकी मानसिक स्थिति बहुत ही भावुक होती है जबकि आक्रामक वर्ग भले ही आदेश के पालन में लड़ने के लिए तैयार होता है लेकिन उसकी मानसिक सोच खुद को एक विलेन के तौर पर देखता है,ऐसे में स्वभाविक है कि कोई भी इंसान खुद को कभी विलेन के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता और यही कारण है कि आक्रामक पक्ष पूरे मन से जंग नहीं लड़ता लेकिन रक्षात्मक वर्ग हर ढंग से पूरी तैयारी के साथ लड़ाई लड़ता है और जंग में फतह भी अक्सर रक्षात्मक वर्ग की ही हुई है।

क्योंकि,रुस-यूक्रेन जंग में तमाम रूसी सैनिक इस लड़ाई के समर्थन में नहीं थे,लेकिन आदेश वश वह जंग में शामिल जरूर है लेकिन पूरे मन से नहीं। शायद इसीलिए चीन लड़ाई से पहले अपनी फौज की मानसिक स्थिति का अध्ययन कर रहा है,क्योकि उसे डर है कि कहीं जंग में रूस वाली स्थिति न बन जाये, फिलहाल इसके पीछे एक और भी कारण समझ में आ रहा है और वह है वियतनाम युध्द। जहां चीन वियतनाम के खिलाफ जंग तो छेड़ दिया लेकिन उसे जीत नहीं सका और फिर वहां से दुम दबाकर भागना पड़ा। तो ऐसे में दोबारा जग हंसाई न हो इसलिए वह चीनी सैनिकों की जासूसी कराने के साथ-साथ उनकी मानसिक स्थिति का भी अध्ययन कर रहा है। ऐसे में अमेरिकी दावे में बल है और इस दावे को हम पूरी तरह से स्वीकार कर रहे हैं।

गौरतलब है कि बीते अगस्त के पहले सप्ताह में चीन के लाख ऐतराज़ करने बावजूद भी अमेरिकी स्पीकर नैंसी ने ताइपे की यात्रा की थी, जहां चीन भढ़ककर ऐलान ए जंग का बिगुल फूंक दिया था जिसके लिए चीनी नौसेना ताइवान को 6 ओर घेरकर ड्रिल भी शुरू कर दी थी। जहां इस दौरान आये दिन चीन के लड़ाकूं विमान बार बार ताइवान के एअरस्पेस में घुसपैठ की घटना को अंजाम देते रहे। हालांकि चीन के इन तमाम हरकतों का अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने मखौल उड़ाते हुए कह दिया था कि चीन कुछ नहीं करेगा।

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