
चीनी राष्ट्रपति शि जिनपिंग,सैन्य वर्दी में,साभार(सोशल मीडिया)
बीजिंग/वाशिंग्टन। चीन में उईगर मुस्लिमों पर चीन द्वारा सालों से जारी बर्बरता एवं क्रूरता की रिपोर्ट अब UN द्वारा सार्वजनिक कर दिया गया है। जिसे अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र संघ में पूरी दुनिया के सामने पेश किया गया था। जिसे रोकने के लिए बीजिंग ने पूरी ताकत लगा दिया था लेकिन इसके बावजूद भी वह इस रिपोर्ट को रोकने में नाकाम रहा। बता दे कि इस पूरे रिपोर्ट में चीन के उन सभी अत्याचारों को बिंदुवार तरीके से परिभाषित किया गया है।
बता दे कि इस रिपोर्ट में साफ किया गया है कि चीन अपने डिटेंशन कैंप में उईगर मुसलमानों के साथ किस तरह अत्याचार कर रहा है ? पीड़ितों को इलेक्ट्रिक चेयर से बांधा जाता है,फिर उन्हें ड्रग दिया जाता है,भूखा रखा जाता है। उन पर लगातार नजर रखी जाती है। उन्हें बिना किसी कारण इन कैंपों में बंद कर देते हैं। चूंकि,48 पन्नों की ये रिपोर्ट चीन पर मानवाधिकारों के हनन के गंभीर आरोप लगाने के लिए काफी है।
इस रिपोर्ट में एक पीड़िता का भी उल्लेख किया गया है जो कि वह इस डिटेंशन कैंप में 9 माह रह चुकी है। उसने रोते हुए अपनी आपबीती में बताया कि आधी रात के बाद चीन के सैन्य अधिकारी हमारी सेल में आते थे,जहां वे किसी लड़की को पसंद करके एक ब्लैक रूम में ले जाते थे। इस रूम में कोई कैमरा नहीं होता था। ये सिलसिला हर रात चलता था। उसने आगे यह भी कहा कि एक या उससे ज्यादा चीनी सैनिक मास्क पहनकर आते और बलात्कार करते हैं।
इससे पहले साल 2019 में चीन ने कहा था कि ये कैंप मामूली केसों में शामिल अपराधियों के लिए पुनर्वास केंद्र हैं। वहीं,संयुक्त राष्ट्र ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि आतंकवाद के गंभीर या मामूली केसों और चरमपंथी कामों में कोई खास अंतर नहीं है। रिपोर्ट में इस तरह के डिटेंशन कैंपों में बलात्कार और यौन शोषण के आरोपों को सही पाया है।
दरअसल,कई भुक्त भोगियों के इंटरव्यू में लोगों ने यहां हुए अत्याचारों के बारे में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। लोगों ने बताया कि उन्हें एक टाइगर चेयर पर बैठाकर बिजली के डंडों से पीटा जाता था। बिजली के डंडों से पीटने के बाद उनके ऊपर पानी भी फेंका जाता था। घंटों तक छोटे स्टूलों पर बैठने के लिए मजबूर किया जाता था।
संयुक्त राष्ट्र के इस इंटरव्यू में लोगों ने बताया कि उन पर लगातार नजर रखी जाती थी और उनके सेल में 24 घंटे लाइट जलती रहती थी। उन्हें पूजा करने और धार्मिक नियमों का पालन करने की मनाही थी। यहां तक कि वो अपनी भाषा में भी बात नहीं कर सकते थे। इसके अलावा उन्हें पीएलए की तारीफ करने वाले गीत को गाने के लिए मजबूर किया जाता था।
संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा हुआ है कि इन डिटेंशन कैंपों में लोगों की भरपेट खाना भी नहीं दिया जाता था। उन्हें लगातार भूखा रखा जाता था। इन लोगों को इंजेक्शन या दवाइयों के जरिए ड्रग्स दिए जाते थे। इन्हें खाने के बाद बहुत सुस्ती महसूस होती थी या फिर नींद आ जाती थी। इसके चलते यहां रहने वाले ये लोग बेहद कमजोर हो गए।
इतना ही नहीं इन कैंपों में रहने वाली महिलाओं ने बताया कि उनके साथ यौन शोषण और बलात्कार किया जाता था। इंटरव्यू में महिलाओं ने बताया कि पूछताछ के दौरान कैंप के गार्ड उनके साथ ओरल सेक्स करने के लिए मजबूर करते थे। उनके कपड़े उतारने के लिए जबरदस्ती की जाती थी। यौन शोषण तो लोगों के सामने किया जाता था। इन कैंपों में रहने के लिए कोई समय तय नहीं है।
अब यहां सबसे बड़ा बड़ा सवाल उन मुस्लिम देशों के उपर खड़ा होता है जो कि दुनिया भर के मुस्लिमों का रहनुमा बनने का दावा करते हैं। ऐसे देश चीन के इस अत्याचार की तरफ अपनी आंखें और कान दोनों ही बंद कर लेते हैं जबकि UN की रिपोर्ट्स में तमाम ऐसे दावें किये गये हैं कि जिसे देखकर बड़े से बड़ा शैतान दिल भी भावनाओं में बहने से खुद को रोक नहीं सकता है। लेकिन बेहद अफसोस है कि दुनिया भर के एक भी मुस्लिम देश चीन द्वारा सालों से किये जा रहे इस बर्बरता एवं क्रूरतापूर्ण अत्याचार पर अपना मुंह सिलकर रखते हैं एक बार भी मुंह खोलने के लिए नहीं तैयार है। यहीं दुनिया भर के तमाम मुस्लिम संगठन भी इस गंभीर मुद्दे पर अंधे-बहरे बने रहते हैं।
