
सांकेतिक तस्वीर।
मॉस्को। रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग के दौरान रूस के लिए एक बुरी खबर सामने आई है,जिसमें यूक्रेन की इंटेलीजेंस ऐजेंसी के हवाले से यह दावा किया गया है कि रूसी फौज की 127वीं रेंजीमेंट के कमांडर्स ने यूक्रेन के दक्षिणी शहर खेरसॉन में लड़ाई करने से इंकार कर दिया है। इतना ही नहीं अब यहां पर कमांडर्स के अंदर ही बगावत हो जाने का भी दावा किया गया है।
दरअसल,यूक्रेन में दक्षिणी ऑपरेशन कमांड की इंटेलीजेंस की तरफ से यह खुलासा किया गया है कि जिन सैनिकों ने बगावत की है,उन्होंने अपने सीनियर्स से कहा कि वो अब युद्ध नहीं लड़ सकते हैं क्योंकि न तो पानी है और न ही उन्हें राशन मिला है। सिर्फ इतना ही नहीं कई सैनिकों को उनकी सैलरी तक भी नहीं मिल सकी है।
वहीं,रूस की इंटेलीजेंस ऐजेंसी जीआरयू और एफएसबी की तरफ से हर उस सैनिक की जांच की जा रही है जो इस बगावत के लिए जिम्मेदार है। उधर,यूक्रेन की सेना ने भी बताया है कि इन रूसी सैनिकों को उनके पदों से हटा दिया गया है। बगावत करने वाले सैनिकों के साथ अब काफी बुरा सलूक होने वाला है। इन सैनिकों को रूस के कब्जे वाले क्षेत्र में बने डिटेंशन सेंटर्स पर भेजा जाएगा।
बताया जा रहा है कि ऐसा यह तब हुआ जब खेरसॉन में रूस की तरफ से बनाई गई स्थानीय सरकार की तरफ से कहा गया कि उन्हें एक जनमत संग्रह को निरस्त करना पड़ रहा है। यह जनमत संग्रह इस बात से जुड़ा था कि सुरक्षा कारणों की वजह से इस शहर को रूस में मिलना चाहिए या नहीं। पकड़े गए एक सैनिक के पिता का दावा है कि इस तरह के कैंप्स की सुरक्षा ऐसे लोगों के हवाले होती हैं जो कुख्यात वैंगर ग्रुप के होते हैं या जिन्हें राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की प्राइवेट सेना भी कहा जाता है। रूस की 127वीं रेजीमेंट रूसी यूनिट्स की एक और यूनिट है जिसने युद्ध के बीच ही आदेश मानने से इनकार कर दिया है।
इसी कड़ी में 113वीं राइफल रेजीमेंट के हवाले से टेलीग्राम पर एक वीडियो इसी साल के जून में पोस्ट किया गया था,जिसमें यह दावा किया गया था कि सैनिकों का कहना है कि वो अब और ज्यादा लड़ नहीं सकते हैं क्योंकि उनके पास पूरे उपकरण नहीं हैं और जंग में लगातार चोट लगने और बीमारी की वजह से वो युद्ध लड़ने में अब असमर्थ हैं। साथ ही उनके सीनियर्स ने भी उनकी शिकायतों को गलत तरीके से अथॉरिटीज के सामने रखा है।
इतना ही नहीं इस फुटेज में कमांडर को कहते हुए यह भी सुना जा सकता था कि हमारी कंपनी ने ठंड और भूख का सामना करते हुए भी जंग लड़ी और हम पिछले कुछ समय से बिना मैटेरियल सपोर्ट, मेडिकल सप्लाई और खाने के ही जंग लड़ रहे हैं। बता दे कि दक्षिणी यूक्रेन में तैनात रूस के कमांडर्स को बड़े पैमाने पर बगावत का सामना करना पड़ रहा है। और ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि इन सैनिकों बेसिक सप्लाई और सैलरी नहीं मिल रही है।
लेकिन अब खबर है कि क्रेमलिन इस समस्या का संज्ञान ले चुका है और वह इस समस्या के निस्तारण के संबंध में जरूरी एवं प्रभावी कार्यवाही तत्काल शुरू भी कर दिया है ताकि फौज के दूसरे रेजिमेंट या कंपनी में बगावत फिर से न शुरू हो जाए।
