
सांकेतिक तस्वीर।
बाकू/नई दिल्ली। तुर्की और इजरायल के दोस्त अजरबैजान ने आर्मेनिया के साथ जारी जंगी तनातनी के बीच अजरबैजान ने भारत से बड़ी मदद की मांग करते हुए कहा है कि अगर क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए भारत कोई प्रस्ताव लाता है तो आर्मेनिया के साथ वह बातचीत के लिए तैयार है। इतना ही नहीं अजरबैजान, भारत के इस तरह की पहल का स्वागत करेगा।
बता दे कि अजरबैजान का यह फैसला ऐसे समय में आया है,जब कुछ समय पहले ही दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बनी थी। अजरबैजान के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता लेला अब्दुल्लायेवा ने आर्मेनिया के साथ मौजूदा संकट के बारे में बात करते हुए एक मीडिया इंटरव्यू के दौरान बताया कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं। हम दोनों पक्षों के बीच संबंधों को सामान्य करने के लिए किसी भी तरह की पहल का स्वागत करते हैं, जिससे क्षेत्र में शांति और स्थिरता आए।
इस दौरान एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता ने बताया कि अगर भारत किसी तरह की मदद या प्रस्ताव के साथ आता है तो अजरबैजान इस तरह की पहल के लिए हमेशा तैयार है।
इतना ही नहीं उन्होंने आगे यह भी कहा कि अजरबैजान के आर्थिक, मानवीय, सांस्कृतिक और पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों में अच्छे द्विपक्षीय संबंध हैं। हम भारत के साथ संयुक्त राष्ट्र जैसे बड़े विदेशी संगठनों के साथ सहयोग कर रहे हैं।
दरअसल,आर्मेनिया और अजरबैजान के बीच नागोर्नो-कारबाख को लेकर कई बार आपस में भयानक सैन्य संघर्ष की रिपोर्ट्स में सामने आती रही है।
हालांकि, मंगलवार को भारत के विदेश मंत्रालय के हवाले से यह कहा गया है कि भारत का विश्वास है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय विवाद को डिप्लोमेसी और बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। सैन्य हमला किसी भी समस्या का समाधान नहीं है। हम दोनों देशों से स्थाई समाधान के लिए बातचीत के जरिए आगे बढ़ने को प्रोत्साहित करते हैं।
बताते चले कि वर्ष 1991 में सोवियत संघ टूटने के बाद वर्ष 1994 में दोनों देशों के बीच भयंकर युद्ध हुआ था। इस कारण लाखों लोगों को पलायन करना पड़ा था और हजारों लोगों की मौत हुई थी। लेकिन बाद में दोनों देशों के बीच युद्धविराम के बावजूद दोनों के बीच सैन्य संघर्ष होता रहा है। इससे पहले सितंबर 2020 में भी इन दोनों देशों के बीच हुए सैन्य संघर्ष के दौरान अजरबैजान ने पहले से ही आर्मेनिया द्वारा कब्जाये गए नागोर्नो-काराबाख पर कब्जा कर लिया था। जहां इस दौरान इस संघर्ष में आर्मेनिया को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इस संघर्ष में तुर्की, इजरायल और पाकिस्तान ने खुलकर अजरबैजान को सैन्य समर्थन किया था,जबकि रूस का समर्थक रहे आर्मेनिया को रूस की तरफ से कोई मदद नहीं मिल सकी थी।
