एक्सक्लूसिव रिपोर्ट

घाटी के शोपियां से आतंकी हमलों के डर से कई कश्मीरी पंडित परिवारों के पलायन की रिपोर्ट एक बार फिर आई सामने, खुफिया ऐजेंसियां धारा 370 को मान रही है बड़ी वजह – राकेश पांडेय/गौरव बरनवाल


सांकेतिक तस्वीर।

जम्मू-कश्मीर। घाटी में लगातार हो रहे कश्मीरी पंडितों पर आतंकी हमलों के कारण बीते दिनों में कई कश्मीरी पंडितों ने अपना घर छोड़ दिया। एक रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि घाटी के शोपियां से करीब 10 ऐसे पंडित परिवार थे, जो अभी हाल ही में अपना घर छोड़कर जम्मू गए हैं।

बता दे कि एक मीडिया रिपोर्ट्स में कश्मीरी पंडित डॉली के हवाले से यह बताया गया है कि उन्होंने हिम्मत करके वहां रहना चाहा, लेकिन वहां डर का माहौल इस कदर हावी कि उन्हें भी अन्य लोगों के साथ गांव छोड़ना ही पड़ा। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर आगे जाकर स्थिति ठीक होती है, तो मैं अपने घर वापस आ जाउंगी। किसी को अपना घर छोड़कर जाना अच्छा नहीं लगता है। मुझे घर छोड़ते हुए बहुत दुख हो रहा है।

इससे पहले चौधरीगुंड गांव में बीते 15 अक्टूबर को टारगेट किलिंग के इरादे से आतंकियों ने पूरन कृष्ण भट्ट पर फायरिंग कर दी थी। जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए थे। जहां उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया,लेकिन डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। उससे दो महीने पहले, शोपियां के छोटीगम गांव के सेब के बाग में भी इसी तरह से एक कश्मीरी पंडित की हत्या कर दी गई थी।

गौरतलब है कि इसी साल जून में लगातार आतंकियों द्वारा टारगेट किलिंग के चलते भारी संख्या में कश्मीरी पंडित घाटी छोड़ने लगे थे, जिसके बाद सरकार ने सरकारी नौकरी कर रहे पंडितों के लिए ट्रांसफर पॉलिसी में बदलाव किया था। हालांकि, पंडितों का कहना था कि उनका ट्रांसफर घाटी के बजाय जम्मू में कर दिया जाए।

वहीं,घाटी में जारी नरसंहार के संबंध में भारतीय खुफिया एजेंसियों का कहना है कि टारगेट किलिंग पाकिस्तान की कश्मीर में अशांति फैलाने की नई योजना है। माना जा रहा है कि इसका मकसद, आर्टिकल 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास की योजनाओं पर पानी फेरना है। क्योंकि,आर्टिकल 370 हटने के बाद से ही कश्मीर में टारगेटेड किलिंग कि घटनाएं बढ़ी हैं, जिसमें खासतौर पर आतंकियों ने कश्मीरी पंडितों, प्रवासी कामगारों और यहां तक कि सरकार या पुलिस में काम करने वाले उन स्थानीय मुस्लिमों को भी सॉफ्ट टागरेट बनाया है, जिन्हें वे भारत का करीबी मानते हैं।

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