
फाईल फोटो।
इस्लामाबाद। पाकिस्तान में पहले से ही जारी भीषण सियासी तूफान के बीच हाल ही में केन्या में मारे गए पाकिस्तानी पत्रकार को लेकर एक बार फिर पूरे पाकिस्तान में सियासी उबाल अपने उफान पर है। यह सियासी तूफान पूरे पाकिस्तान में इस कदर हावी हो गया है कि पत्रकार हत्याकांड की साजिश में सफाई देने के लिए खुद पाक फौज और डीजी ISI को सामने आना पड़ा। जहां पहले से ही घोषित पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान द्वारा आजादी मार्च को लेकर पाक फौज और इमरान खान इस समय आमने-सामने आ गए हैं।
वहीं,इमरान खान के इस कदम से शहबाज शरीफ सरकार घबराई हुई है। उन्हें इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के समर्थकों से इस्लामाबाद की सुरक्षा का डर सता रहा है। इससे पहले भी इमरान खान ने नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री रहते 2014 में लाहौर से इस्लामाबाद तक आजादी मार्च निकाला था। इस दौरान व्यापक तौर पर हिंसा हुई और इमरान खान के समर्थकों ने इस्लामाबाद में प्रधानमंत्री निवास पर हमला किया था। इस घटना में 500 से अधिक पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हुए थे। ऐसे में शहबाज शरीफ सरकार पुरानी घटना से सबक सीखते हुए पहले से ही सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम करने जा रही है। बता दे कि आने वाले चार नवंबर को इमरान खान अपने समर्थकों के साथ इस्लामाबाद में प्रवेश करेंगे। इस बीच पाकिस्तानी गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह ने ऐलान किया है कि इस्लामाबाद की सुरक्षा में पाकिस्तानी सेना को तैनात किया जायेगा।
इतना ही नहीं पाकिस्तान के गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह ने कहा है कि इस्लामाबाद को पीटीआई के लॉन्ग मार्च के दौरान किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटने के लिए पाकिस्तानी सशस्त्र बलों को भी बुला रहे हैं। इसमें पाकिस्तानी सेना के अलावा रेंजर्स भी शामिल हैं। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट पहले ही इमरान खान के लाहौर से इस्लामाबाद तक लॉन्ग मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर चुकी है।
जहां इस बीच इमरान खान ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के चीफ नदीम अंजुम को तो सीधे-सीधे धमकी दे दी है। इमरान ने कहा कि डीजी आईएसआई! कान खोलकर सुन लो, मैं बहुत कुछ जानता हूं। मैं सिर्फ इसलिए चुप हूं क्योंकि मैं अपने देश को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता।
बता दे कि इससे एक दिन पहले आईएसआई चीफ ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए इमरान खान के खिलाफ जमकर आरोप लगाए थे। नदीम अंजुम ने कहा था कि इमरान खान रात के अंधेरे में पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा से मिलते हैं और दिन के उजाले में उन्हें देशद्रोही करते हैं। यह एक साथ नहीं चलने वाला है।
दरअसल,पाक फौज के जनरल बाजवा और डीजी ISI से पहले से ही खार खाये इमरान खान उस समय बेहद आक्रामक हो गए जब जनरल बाजवा के तथा शहबाज शरीफ के ध्रुव विरोधी और इमरान के बेहद करीबी पत्रकार अरशद शरीफ की केन्या में गोली मारकर हत्या कर दी गई। जहां इस हत्याकांड में सीधे-सीधे डीजी ISI और जनरल बाजवा तथा शहबाज शरीफ को कथित रूप से इमरान खान द्वारा दोषी ठहाराने की कोशिश की गई। इतना ही नहीं इस कत्ल को एक बड़ा सियासी मुद्दा बनाते हुए इमरान ने आजादी मार्च के नाम से बड़ा आंदोलन करने की तैयारी भी कर लिया। जिसे देखते हुए पाकिस्तानी ऐजेंसियों में बेहद हड़कंप सा मच गया है।
