
नेपाली गोरखा सैनिक,फाईल फोटो,साभार-(नेपाली सेना के प्रवक्ता के ट्वीटर से)
काठमांडू। रूस-यूक्रेन जंग में बेहद चौंकाने वाली जानकारी “सीक्रेट आॅपरेशन” मीडिया समूह को मिली है। जिसके आधार पर हम अब तक का सबसे बड़ा खुलासा कर रहे हैं। दरअसल,हमें बेहद गोपनीय तरीके से विश्वस्त सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली है कि ब्रिटिश ऐजेंसियां अब बड़े पैमाने पर नेपाल के बहादुर गोरखा सैनिकों को रूसी फौज के खिलाफ यूक्रेन की मदद में जंग में उतारने की बड़ी तैयारी पर है। इतना ही नहीं इस मिशन को बेहद गोपनीय तरीके से ब्रिटिश ऐजेंसियां अंजाम देने में जुट चुकी है।
दरअसल,विदेशी सूत्रों द्वारा हमें पता चला है कि ब्रिटेन अब ‘बहादुरी का दूसरा नाम गोरखा’ से मशहूर नेपाल के बहादुर गोरखा सैनिकों को इस जंग में उतारने की बड़ी तैयारी कर चुका है। हालांकि,इन सैनिकों को इस जंग में शामिल होने की रिपोर्ट की अभी तक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन सूत्रों के हवाले से जो जानकारी सामने आई है वह साफ तौर पर संकेत दे रही है कि अब ब्रिटेन गोरखा सैनिकों को इस जंग में उतारने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
खबर तो यहां तक है कि इस मिशन को ब्रिटेन ने अभी तक पूरी तरह से गोपनीय रखा हुआ है। ताकि रूसी ऐजेंसियों को इसकी भनक तक न लगे। क्योंकि,जंग के शुरूआत से ही नाटों और रूस की खुफिया ऐजेंसियां पूरी तरह से चौकन्नी होकर एक-दूसरे पर लगातार निगरानी बनाये हुई है। बताया जा रहा है कि ब्रिटेन के अधीन जो गोरखा रेजिमेंट है, उसी के माध्यम से इस मिशन को अंजाम दिया जा रहा है। मतलब यह है कि ब्रिटिश फौज में पहले से ही शामिल गोरखाओं को ब्रिटिश ऐजेंसियों के तरफ से तमाम प्रलोभन देकर उनके सगे संबंधियों को रूस के खिलाफ यूक्रेन की मदद में इस जंग में शामिल होने की बात कही गई है। जिस वजह से तमाम ब्रिटिश गोरखा इस मिशन को पूरा करने में जुट गए हैं।
इससे पहले भी नाटों देशों के तमाम नाटों सेना के रिटायर सैनिकों के रूस के खिलाफ यूक्रेन की मदद में जंग लड़ने की रिपोर्ट सामने आ चुकी है। यहां तक कि जंग के दौरान तमाम ऐसे सैनिक भी पकड़े गए थे जो कि अमेरिका और ब्रिटेन की सेनाओं में अपनी सेवाएं दे चुके थे। हालांकि, इस तरह के सैनिकों का इस जंग में शामिल होने के लिए कई बार यूक्रेन व नाटों की तरफ से औपचारिक ऐलान भी किया जा चुका है। चूंकि, जंग के शुरूआत से हीं अमेरिका के लीडरशिप में नाटों यूक्रेन को लगातार तमाम सैन्य संसाधनों से संबंधित सप्लाई जारी रखे हुए हैं।
वहीं,इस तरह के विदेशी सैनिकों को रूस की मदद में यूक्रेन के खिलाफ जंग में शामिल होने का खुलासा पहले भी कई बार किया जा चुका है। जहां इस दौरान तमाम ऐसे दावें सामने आये थे जिनमें यह कहा गया था कि सीरिया और अफगानिस्तान के पूर्व सैनिक इस जंग में बहुत पहले ही डिप्लाय हो चुके हैं,जिसकी पुष्टि भी हो चुकी है।
गौरतलब है कि वर्ष 1947 में भारत के आजादी के दौरान भारत, नेपाल और ब्रिटेन के बीच गोरखा सैनिकों को लेकर एक त्रिपक्षीय समझौता हुआ था। जिसमें सबसे ज्यादा गोरखा सेना के रेजिमेंट भारतीय सेना को मिले थे जबकि कुछ रेजिमेंट ब्रिटेन को भी मिला। बाकि अन्य रेजिमेंट नेपाली सेना में हीं रहकर नेपाल की सुरक्षा में जुट गए। हालांकि, ब्रिटेन के इस मिशन से भारत के लिए भी दिक्कतें हो सकती है। क्योंकि,भारतीय सेना में गोरखा की कई रेजिमेंट है जो कि तमाम रिटायर गोरखा भी इस जंग का हिस्सा बन सकते हैं। जिस वजह से भारत-रूस की दोस्ती पर बट्टा लग सकता है।
अब ऐसे में सूत्रों के हवाले से मिल रही जानकारी और इस जंग से जुड़े तमाम तथ्यों के विश्लेषण के आधार पर “सीक्रेट आॅपरेशन” मीडिया समूह दावा करता है कि ब्रिटेन इन नेपाली गोरखा सैनिकों को रूस के खिलाफ जंग में उतारने की पूरी तैयारी कर चुका है। बस देर हैं उस पर अमल करने में। मालूम हो कि इससे पहले भी सीक्रेट आॅपरेशन मीडिया समूह इस जंग से जुड़े तमाम खुलासे करता चला आ रहा है जो कि अभी तक सच साबित हुई है।
