इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

ईरान और सऊदी अरब के बीच जारी जंगी तनातनी के दौरान फारस की खाड़ी में अमेरिकी लड़ाकूं विमानों की उड़ने की रिपोर्ट आई सामने, रिपोर्ट को पेंटागन ने नहीं किया खारिज, तनाव बरकरार – विजयशंकर दूबे/राजेंद्र दूबे


ईरानी ड्रोन,फोटो साभार -(ईरानी डिफेंस के ट्वीटर से)

वाशिंग्टन/रियाद। जबसे रूस-यूक्रेन जंग छिड़ा हुआ है उसके बाद से ही दुनिया में कई और जंग के फ्रंट खुलने के मुहाने पर खड़े हों गए हैं। जहां अब सऊदी अरब पर ईरानी सेना के बीच युध्द छिड़ने का खतरा पैदा हो गया है। वहीं, हमले के खतरे के बीच अमेरिका ने फारस की खाड़ी में स्थित अपने हवाई ठिकानों से ईरान की तरफ फाइटर जेट उड़ाए हैं। जिसका खुलासा अमेरिकी मीडिया ने किया है,जिसमें यह कहा गया है कि अभी हाल ही में अमेरिका के सेंट्रल कमांड ने ईरानी सीमा के पास इन फाइटर जेट को भेजा।

दरअसल,इससे पहले सऊदी अरब ने अमेरिका को चेतावनी दी थी कि ईरान उसके और इराक के ऊपर हमले की योजना बना रहा है। बता दे कि ईरानी मिसाइलों और ड्रोन विमानों के हमले के खतरे पर विश्‍वसनीय सूचना मिलने के बाद अमेरिकी सेना अलर्ट पर हो गई थी। इस बीच वाइट हाउस के नेशनल सिक्‍यारिटी काउंसिल ने भी कहा है कि वह ईरानी हमले के खतरे को लेकर चिंतित है और खाड़ी के देश सऊदी अरब से लगातार संपर्क में है।

हालांकि,अमेरिका ने ईरानी खतरे के बारे में आई रिपोर्ट की पुष्टि नहीं की है। इतना ही नहीं वाइट हाउस ने भी अमेरिकी लड़ाकूं विमानों की उड़ान के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है। वहीं,अमेरिका के सेंट्रल कमांड के प्रवक्‍ता जो बूसियो के हवाले से यह दावा किया गया है कि वह सऊदी अरब के साथ लंबे समय के लिए रणनीतिक सैन्‍य भागीदारी को लेकर लंबे समय से चली आ रही भागीदारी को लेकर प्रतिबद्ध हैं।

फिलहाल,यह अभी तक साफ नही हो सका है कि अमेरिका ने किसी जगह पर अपने फाइटर जेट को उड़ाया है, फिर भी अमेरिका फारस की खाड़ी में बड़े पैमाने पर फाइटर जेट तैनात किए हुए है। इसमें सऊदी अरब में तैनात एफ-22 फाइटर जेट भी शामिल हैं। उधर,ईरान ने सऊदी अरब या इराक पर हमले की योजना की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया है। इतना ही नहीं ईरान ने यह भी दावा किया कि ये आरोप आधारहीन और गलत हैं। इससे पहले अमेरिकी मीडिया ने खुलासा किया था कि ईरान अपने देश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों से लोगों का ध्‍यान हटाने के लिए इराक और सऊदी अरब पर हमला कर सकता है।

गौरतलब है कि ईरान में इस साल के मध्‍य सितंबर से ही हिजाब को लेकर जोरदार प्रदर्शन चल रहा है। जहां इस दौरान ईरान ने कई बार आरोप लगाया है कि अमेरिका, इजरायल और सऊदी अरब इस हिजाब विरोध को भड़का रहे हैं। इतना ही नहीं ईरान ने पूर्वी इराक में कुर्दिश मिलिशिया पर कई भीषण हमले भी किए।

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