इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

70 दिनों से “कतर” में इंडियन नेवी के आठ पूर्व अधिकारियों को क्यों रखा गया है हिरासत में ? सगे संबंधी तथा दोनों देशों की सरकारें भी है खामोश, ऐसा कौन सा राज है कि सभी साधे है चुप्पी ? – चंद्रकांत मिश्र (एडिटर इन चीफ)


भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची, फाईल फोटो, साभार -(सोशल मीडिया से)

नई दिल्ली। लगभग 70 दिनों से “कतर” में भारतीय नौसेना के 8 रिटायर अधिकारियों को हिरासत में रखा गया है, जहां इसका खुलासा बीते 25 अक्टूबर को एक ट्वीट के जरिए हुआ था। बेहद हैरानी की बात यह है इस ट्वीट के सामने आने के 9 दिन बाद पहली बार भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने साप्ताहिक प्रेस कांफ्रेंस के दौरान इन भारतीय अधिकारियों के हिरासत में होने की बात कबूली,लेकिन विस्तृत जानकारी नहीं दिया। जो कि तमाम सवाल खड़े करता है।

इतना ही नहीं इस घटनाक्रम को लेकर कतर भी अभी तक खामोश है। बताया जा रहा है कि भारतीय नौसेना के ये सभी आठों पूर्व अधिकारी क़तर की एक कंपनी ‘अल-ज़ाहिरा अल-आलमी कन्सलटेन्सी एंड सर्विसेज़’ के लिए काम करते हैं। बता दे कि यह कंपनी क़तर की नौसेना को प्रशिक्षण और सामान मुहैया कराती है।

दरअसल,भारतीय विदेश मंत्रालय ने शुरू में तो इस पर कुछ नहीं कहा,लेकिन अब बीते 3 नवंबर को इन आठों भारतीय अधिकारियों के हिरासत में लेने के बात की पुष्टि करते हुए बयान दिया है कि क़तर में स्थित भारतीय दूतावास गिरफ़्तार भारतीयों को कॉन्सुल सेवा देने की कोशिश कर रहा है। लेकिन इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी कि उन्हें क्यों गिरफ़्तार किया गया है ?

मालूम हो कि बीते 25 अक्टूबर को डॉक्टर मैथ्यू भार्गव नाम की एक महिला ने एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भारतीय नौसेना के आठ पूर्व अधिकारी जिन्होंने देश की सेवा की है, वो पिछले 57 दिनों से क़तर की राजधानी दोहा में ग़ैर-क़ानूनी तरीक़े से हिरासत में हैं। उन्होंने आगे भी लिखा, “मैं भारत सरकार और उससे संबंधित अधिकारियों से अपील करती हूं कि वो जल्द आवश्यक क़दम उठाएं और इन अधिकारियों को रिहा करवाकर उन्हें क़तर से भारत लाएं।”
बता दे कि उन्होंने अपने ट्वीट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी टैग किया था।

बताया जा रहा है कि भारतीय नौसेना के ये सभी पूर्व अधिकारी कतर के जिस कंपनी के लिए काम करते हैं उस कंपनी के प्रमुख ख़मीस अल-अजमी एयरफ़ोर्स के एक सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। जहां कंपनी की वेबसाइट पर उसे क़तर के रक्षा मंत्रालय, सुरक्षा और दूसरी सरकारी एजेंसियों का स्थानीय व्यापारिक पार्टनर बताया गया है। कंपनी ने ख़ुद को रक्षा उपकरणों को चलाने और उनकी मरम्मत और देखभाल करने का विशेषज्ञ भी बताया है। इस वेबसाइट पर कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों और उनके पद की पूरी जानकारी भी दी गई है,जिनमें कई भारतीय भी शामिल हैं।

लेकिन अब यह वेबसाइट लाॅगिन नहीं हो रहा है यानि खुल नहीं रहा है। जो कि अंडर कंसट्रक्शन दिखा रहा है। यानि उस पर लिखा हुआ है कि वेबसाइट पर फ़िलहाल काम चल रहा है। जबकि कंपनी के लिंक्डइन पेज पर लिखा है कि यह रक्षा उपकरणों को चलाने और लोगों को प्रशिक्षण देने के मामले में क़तर में सबसे आगे है। इतना ही नहीं इस पर आगे भी लिखा है कि अल-ज़ाहिरा कंपनी सुरक्षा और ऐरोस्पेस के मामले में क़तर में विशेष हैसियत रखती है।

वहीं,इस दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय इस घटनाक्रम में लगभग 66 दिनों तक चुप्पी साधने के बाद इस माह के बीते तीन नवंबर को मंत्रालय के साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान एक सवाल के जवाब में प्रवक्ता अरिंदम बागची ने पहली बार क़तर में उन आठों भारतीयों की गिरफ़्तारी की पुष्टि की। जहां
उन्होंने कहा कि हमें आठ भारतीय नागरिकों की गिरफ़्तारी के बारे में जानकारी है जो क़तर में किसी कंपनी के साथ काम करते थे। उन्होंने आगे भी कहा कि क़तर में भारतीय दूतावास के अधिकारी वहां की सरकार से संपर्क में हैं। बागची ने दावा भी किया कि भारतीय दूतावास के अधिकारियों को गिरफ़्तार लोगों से मिलने की अनुमति दी गई थी। इतना ही नहीं उन्होंने यह भी कहा कि गिरफ़्तार भारतीय लोगों को उनके परिजनों से भी फ़ोन पर बातचीत करने की इजाज़त दी गई थी। हालांकि,इस दौरान बागची ने यह भी साफ किया कि हम उनकी जल्द रिहाई और भारत वापसी के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं। लेकिन विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने यह नहीं बताया कि उन भारतीयों को क़तर में किस कारण गिरफ़्तार किया गया है ?

इस बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि भारतीय नौसेना के जिन आठ पूर्व अधिकारियों को क़तर में गिरफ़्तार किया गया है, उनमें कमांडर पुर्णेंदु तिवारी (रिटायर्ड) भी शामिल हैं जो कि कतर के इस कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर हैं तथा
साल 2019 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति द्वारा कतर में “प्रवासी भारतीय सम्मान” से सम्मानित भी किये गये है।

अब इस पूरे घटनाक्रम पर गौर किया जाये तो कई तरह के सवाल पैदा हो रहे हैं, जैसे कि कतर में भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारियों को हिरासत में लिये जाने के 66 दिनों तक भारत क्यों चुप था ? जब भारत गिरफ्तारी की पुष्टि किया तो गिरफ्तारी का कारण क्यों नहीं बताया ? इन पूर्व अधिकारियों के रिश्तेदार, सगे संबंधी भी अभी तक क्यों खामोश है ? सामने क्यों नहीं आ रहे हैं ? कतर सरकार के साथ-साथ कतर सहित पूरे मिडिल ईस्ट की मीडिया भी क्यों खामोश है ? भारतीय मीडिया भी इसपर विस्तृत चर्चा क्यों नहीं कर रही ? ये सभी सवाल किसी बड़े रहस्य की ओर इशारा कर रहे हैं। अब वह क्या राज हो सकता है, मालूम नहीं है।

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