इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट

ब्रिटिश इंटेलीजेंस ऐजेंसी के सूत्र का बड़ा दावा, हजारों की संख्या में ब्रिटेन में मौजूद है रूसी जासूस – राकेश पांडेय/अमरनाथ यादव


सांकेतिक तस्वीर, फोटो साभार-(यूस नेवी के ट्वीटर से)

लंदन। रुस-यूक्रेन जंग के बीच ब्रिटिश इंटेलीजेंस ऐजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। दावा किया गया है कि रूस के लगभग 1,000 जासूस ब्रिटेन में इस वक्त मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि ये जासूस अपने आप को आम लोगों के बीच मिलाए हुए हैं। इतना ही नहीं इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि व्लादिमीर पुतिन के ये सीक्रेट ऐजेंट सामान्य काम कर रहे हैं। ये कैब ड्राइवर से लेकर वेटर तक हो सकते हैं। ये हमेशा अपनी पहचान को छिपाए रहते हैं। ये रूसी ऐजेंट रूसी खुफिया ऐजेंसी SVR को सीधे रिपोर्ट कर रहे हैं। दावा तो यहां तक किया जा रहा है कि ये जासूस ब्रिटेन सरकार में भी घुसपैठ कर रखे है।

दरअसल, एक मीडिया रिपोर्ट में ब्रिटिश इंटेलीजेंस ऐजेंसी के एक खुफिया सूत्र के हवाले से यह आरोप लगाया है कि रूस के पास जासूसों का इतना बड़ा नेटवर्क है कि उनके लोग हर क्षेत्र में काम कर रहे हैं। सूत्र ने आगे भी कहा है कि हमें ये नहीं सोचना चाहिए कि कुछ लोग जासूस नहीं हो सकते। पुतिन के जासूसों में छात्र, ट्रेड यूनियन, प्रोटेस्ट करने वाले ग्रुप, शिक्षक, कैब ड्राइवरों के साथ-साथ राजनेता, सिविल सेवा और पुलिस भी शामिल है।

इस बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि हाल के वर्षों में लंदन में स्थित रूसी दूतावास में काम करने वाले ज्ञात जासूसों की संख्या में कमी आई है। लेकिन रूसी सरकार के लिए गुप्त रूप से काम करने वाले संदेहास्पद लोगों की संख्या बढ़ी है। बता दे कि यह जानकारी ऐसे समय में सामने आई है जब रूस यूक्रेन के युद्ध में पुतिन की सेना को खेरसॉन से एक अपमानजनक वापसी करनी पड़ी है। इसके बाद ही यह आशंका तेज है कि पुतिन अपनी हार के कारण कठिन उपायों का सहारा लेंगे। अपनी साख बचाने के लिए वह किसी भी तरह का कदम उठा सकते हैं।

एक अनुमान के मुताबिक इस समय ब्रिटेन में लगभग 73,000 रुसी प्रवासी रह रहे हैं। इनमें से एक अंश को ब्रिटिश खुफिया सेवा रूस का जासूस मानती है। लेकिन जासूसों में सिर्फ रूसी हैं ऐसा नहीं है। बता दे कि बीते शुक्रवार को जर्मनी में ब्रिटिश दूतावास में काम करने वाले एक गार्ड डेविड स्मिथ को रूस के साथ जानकारी साझा करने का दोषी पाया गया है। माना जाता है कु पुतिन के जासूस सबसे सुरक्षित जगहों पर भी मौजूद है। इसमें न्यूक्लियर पावर स्टेशन, एयरफोर्स और नेवी बेस भी शामिल हैं। हाल ही में यह खबर आई थी कि ब्रिटेन की पूर्व पीएम लिज ट्रस का मौबाइल भी रूस ने हैक कर लिया था।

मालूम हो कि रूस का जासूसी वाला खेल कोई नया नहीं है। इसका दौर शीतयुद्ध के दौरान ही शुरू हुआ था। इस दौरान रूस ने पूरे नाटों समूह में अपने जासूसों का एक बड़ा नेटवर्क फैला रखा था। उसके बाद से ही रूसी ऐजेंसियां नाटों देशों में लगातार सक्रिय है। हालांकि, नाटों भी पीछे नहीं है। वे भी रूस में अपने तमाम जासूस पहले से ही नियुक्त कर रखें है। इतना ही नहीं दोनों ही पक्ष एक-दूसरे पर हर तरह नजर बनाये हुए हैं। चाहे वह सेटेलाईट का रास्ता हो या फोन टेपिंग का,अब इंटरनेट का जमाना है तो ऐसे में सायबर अटैक भी जासूसी जंग का एक बड़ा हथियार साबित हो रहा है। जहां अक्सर अमेरिका इसकी चपेट में आता रहा है। हालांकि, रूस को भी कभी-कभी इसका जोखिम उठाना पड़ जाता है।

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