
तिब्बत के “शिगत्से” एअरपोर्ट पर दुश्मन की बड़ी तैनाती, फोटो साभार-( अमेरिकी रक्षा वेबसाइट “वार-जोन” के ट्वीटर से
बीजिंग। रूस-यूक्रेन जंग को लेकर जहां पूरी दुनिया में तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका लगातार बढ़ी हुई है तो वहीं चीन, भारत के खिलाफ पूर्वी लद्दाख बार्डर पर लगातार तनाव बढ़ाने वाली हरकतों को अंजाम देने से बाज नहीं आ रहा है। जहां इस बीच इस महीने के बीते 9 दिसंबर को अरूणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में दुश्मन के साथ भारतीय सैनिकों की एक झड़प होने की रिपोर्ट सामने आई थी। वहीं अब दुश्मन की भारत के खिलाफ बार्डर पर बड़ी सैन्य तैयारियों का भी खुलासा हुआ है। हालांकि, पूर्वी लद्दाख बार्डर पर दुश्मन लगातार अपनी सैन्य तैयारियों को बढ़ाता रहा है जिसका खुलासा समय-समय पर होता रहा। लेकिन इस बार के दावें ने नई दिल्ली से लेकर वाशिंग्टन तक हिलाकर रख दिया है।
दरअसल,तवांग सैन्य झड़प के बाद अमेरिकी रक्षा वेबसाइट वॉर जोन की तरफ से एक ट्वीट में चीन के बुरे इरादों का खुलासा किया गया है। जिसमें दावा किया गया है कि चीन ने एलएसी के दूसरी तरफ तिब्बत के शीगत्से एयरपोर्ट पर कई खतरनाक हथियार तैनात कर रखे हैं। सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर वॉरजोन ने आगे भी बताया है कि शीगत्से पर ड्रोन से लेकर, फाइटर जेट्स, रि-फ्यूलर्स, अर्ली वॉर्निंग सिस्टम तक मौजूद हैं। इस बेस पर पिछले कई सालों से लड़ाकू विमान तैनात हैं। एयरबेस अब एयरस्पेस सर्विलांस से भी लैस है।
दावें में यह भी बताया गया है कि शीगत्से पीस एयरपोर्ट, तिब्बत का पांचवां एयरपोर्ट है जो सैन्य और असैन्य मकसद से प्रयोग हो रहा है। लेकिन चीन इसका अधिकतर प्रयोग मिलिट्री के लिए करता है। 30 अक्टूबर 2010 को यह एयरपोर्ट शुरू हुआ था। बता दे कि शीगत्से, तिब्बत का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। इस एयरपोर्ट का निर्माण कार्य सन् 1968 में शुरू हुआ था और 1973 में यह बनकर तैयार हुआ था। साल 2010 तक यह सिर्फ मिलिट्री प्रयोग के लिए था। इसके बाद 532 लाख युआन के साथ इसका विस्तार किया गया था। शीगत्स और ल्हासा की दूरी करीब 220 किलोमीटर है।
इतना ही नहीं इस कड़ी में आगे यह भी कहा गया है कि चीन, तिब्बत में लगातार इंफ्रास्ट्रक्चर में तेजी ला रहा है। पिछले साल ल्हासा से न्यिंगची तक बुलेट ट्रेन की शुरुआत की गई थी। न्यिंगची, अरुणाचल प्रदेश से कुछ ही किलोमीटर दूर है। तिब्बत में न्यिंगची, शीगत्से और नागरी में चीन के पांच एयरपोर्ट हैं और ये भी भारत-नेपाल बॉर्डर के एकदम करीब हैं। तिब्बत में पिछले साल 15 बड़े कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स को लॉन्च किया गया था। इनमें हाइवे तक शामिल हैं।
गौरतलब है कि चीन पूर्वी लद्दाख बार्डर पर लगातार कई सालों से भारत के खिलाफ बड़े सैन्य तैयारियों में जुटा हुआ हैं। जिसके तहत वो लगातार निर्माण कार्य जारी रखा हुआ है। जिसका कि समय समय पर खुलासा भी होता रहा है। हालांकि इस दौरान कई ऐसे भी दौर आये हैं जब चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच झड़पें भी हुई। जिसमें गलवान संघर्ष और अब अरूणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर की घटना प्रमुख रूप से शामिल हैं। वैसे तो पहले भी चीन के साथ झड़पें होती रही है जहां बाद में डिप्लोमैटिक तरीके से दोनों देशों के बीच समस्या का समाधान होता रहा है लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में तवांग झड़प इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि रूस-यूक्रेन जंग में तीसरे विश्वयुद्ध की आशंका लगातार बढ़ी हुई है। इसीलिए इस झड़प को सामान्य झड़प नहीं समझा जा रहा है। चूंकि चीन की बदनियती का इतिहास रहा है कि वह ऐसे ही झड़पों के बहाने युध्द तक पहुंचता रहा है। उदाहरण के तौर पर 62 और 67 का जंग।
