
सांकेतिक तस्वीर।
माले। तवांग झड़प के बाद दुश्मन के अब मालदीव में भारत के खिलाफ लगातार सक्रिय होने की रिपोर्ट सामने आ रही है। जहां सूत्रों के हवाले से दावा है कि चीन की शह पर मालदीव में भारत विरोधी अभियान लगातार जारी है। क्योंकि,मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन इस अभियान का नेतृत्व करते हुए मांग कर रहे है कि मालदीव से भारत की मौजूदगी पूरी तरह से खत्म होनी चाहिए। जहां इस दौरान यामीन के पार्टी के एक बड़े अधिकारी ने माले में भारतीय उच्चायोग पर हमले के लिए साजिशन लोगों को उकसाया है। हालांकि,यामीन के विरोध में भारत समर्थक माने जाने वाले पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद की मालदीव डेमोक्रेटिक पार्टी ने आवाज उठाई है। दरअसल,इसी साल अंतराष्ट्रीय योग दिवस के मौके पर माले के नेशनल स्टेडियम में भारतीय उच्चायोग की तरफ से आयोजित समारोह पर यामीन समर्थक कट्टरपंथियों ने हमला किया था। इस दौरान योग कर रहे लोगों के साथ मारपीट भी की गई थी।
बता दे कि भारत समर्थक मोहम्मद नशीद पार्टी एमडीपी ने कहा कि वह पूर्ववर्ती यामीन सरकार में शामिल एक बड़े अधिकारी के इस उकसावे की निंदा करती है और पुलिस से पूरे मामले की जांच की मांग करती है। पार्टी ने यह भी कहा कि वह मित्र राष्ट्रों के प्रति हिंसा और घृणा भड़काने के विपक्ष के निरंतर प्रयास की भी निंदा करती है। चूंकि,एमडीपी शुरू से ही भारत के साथ अच्छे संबंधों का पक्षधर रही है। जबकि यामीन की प्रोग्रेसिव पार्टी ऑफ मालदीव चीन के ऐजेंट के रूप में काम करती है।
यहीं कारण है कि बीजिंग के इशारे पर मालदीव में यामीन समर्थक इंडिया आउट कैंपेन चला रहे हैं। उनका कहना है कि मालदीव से भारतीय सैन्य अधिकारियों और उनके उपकरणों को हटाया जाए। इस कैंपन को खुद अब्दुल्ला यामीन ने 2018 में अपने कार्यकाल के आखिरी साल शुरू किया था। उन्होंने तब चीन के इशारे पर भारत से अपने दो हेलीकॉप्टरों और डॉर्नियर विमान को वापस ले जाने को कहा था। ये हेलीकॉप्टर और एयरक्राफ्ट भारत ने मालदीव को खोज और राहत बचाव अभियान के लिए दिए थे। इससे मालदीव के क्षेत्रीय सीमा की भी निगरानी की जाती थी।
मालदीव में चीन अपनी जड़े मजबूत करने के लिए इसलिए लगातार सक्रिय है क्योंकि वह इस बहाने हिंदमहासागर में अपनी मजबूत स्थिति बनाते हुए भारत को घेरने के लिए मालदीव में मिलिट्री बेस बनाने की फिराक में है। इसके लिए चीन ने मालदीव से एक द्वीप को भी लीज पर भी लिया हुआ है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस द्वीप पर मालदीव के लोगों के आने-जाने पर पूरी तरह से रोक है। मालदीव की सरकार और चीन ने इस द्वीप को लेकर कोई सफाई नहीं दी है। इस द्वीप पर भारी मात्रा में बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जा रहा है। इसमें सिर्फ चीनी कंपनियों को काम पर लगाया गया है, जो चीनी सेना के साथ जुड़ी हुई हैं।
गौरतलब है कि चीन पिछले कई सालों से लगातार भारत को चारों तरफ से घेरने के मिशन पर जुटा हुआ हैं। जिसके लिए वह भारत के पड़ोसी देशों में हावी होना चाहता है। जहां वह कुछ देशों में अपनी जड़ों को मजबूत करने में सफल भी रहा जिनमें म्यामांर और श्रीलंका भी शामिल हैं। हालांकि वह इसी तरह की नेपाल में भी कोशिश कर रहा है,इतना ही नहीं बांग्लादेश पर भी डोरे डाल रहा है। फिलहाल, दुश्मन के इस मिशन को फेल करने में भारतीय ऐजेंसियां पूरी तरह से हरकत में है। यही कारण है कि श्रीलंका में चीन अभी तक पूरी तरह से हावी होने में सफल नहीं रहा। बता दे कि अभी हाल ही में अरूणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में चीनी सैनिकों के साथ भारतीय जवानों के बीच झड़प हुई थी।
