
सांकेतिक तस्वीर।
बीजिंग। चीन में सोलोमन द्वीप के राजदूज जॉन मोफत फुगुई की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत होने की रिपोर्ट सामने आई है। चीन में वह ऐसे पांचवें विदेशी राजनयिक हैं जिनकी मौत हुई। क्योंकि,पिछले दो साल में राजधानी बीजिंग में अब तक पांच विदेशी राजनयिकों की इसी तरह से मौतें हुई है। मालूम हो कि फुगुई का निधन गुरुवार को हुआ था। उनकी मृत्यु किस वजह से हुई ? यह कारण अभी तक साफ नही हो सका है।
बताया जा रहा है कि फुगुई की मौत से पहले यूक्रेन के राजदूत सेर्ही काम्यशेव की भी फरवरी 2021 में मृत्यु हो गई थी। काम्यशेव बीजिंग में होने वाले शीत ओलंपिक की जगह का निरीक्षण करके लौटे थे। इसके अलावा जर्मनी के 54 वर्षीय जन हेके की भी सितंबर 2021 में बीजिंग में मौत हो गई थी। हेके उस समय चांसलर एंजेला मर्केल के विदेश नीति सलाहकार थे। उन्हें राजदूत का पद संभाले हुए बस दो हफ्ते ही हुए थे कि उनका निधन हो गया था।
इतना ही नहीं फिलीपीन के पत्रकार से राजनयिक बने 74 साल के जोस सैंटियागो ‘चिटो’ स्टा रोमान की भी अप्रैल 2022 में अन्हुई प्रांत में क्वारंटाइन में मृत्यु हो गई थी। इसके बाद अगस्त में म्यांमार के मिशन प्रमुख यू मायो थांट पे ने युन्नान प्रांत की प्रांतीय राजधानी कुनमिंग में मृत्यु हो गई। फ़ुगुई मई 2021 में चीन में सोलोमन द्वीप के पहले राजदूत बने, जब उनके देश ने सितंबर 2019 में ‘वन चाइना’ नीति के तहत ताइपे से बीजिंग को राजनयिक मान्यता दी। इस फैसले के बाद ताइवान के साथ तीन दशकों से जारी सोलोमन द्वीप का संबंध खत्म हो गया था। अधिक का संबंध समाप्त हो गया।
मालूम हो कि अप्रैल 2022 में चीन और सोलोमन द्वीप के बीच एक सुरक्षा समझौता हुआ था। जहां इस समझौते को लेकर अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया चिंतित हो गए थे। उन्हें इस बात की चिंता थी कि समझौते के बाद प्रशांत महाद्वीप में चीन अपना सैन्य प्रभाव बढ़ा सकता है। क्योंकि,इस समझौते को लेकर यह दावा सामने आया था कि चीन अब सोलोमन द्वीप पर अपने सैन्य ठिकाने बना सकता है। जिसे लेकर अमेरिका से लेकर सिडनी तक हड़कंप मचा था। फिलहाल, चीन में इस तरह से विदेशी राजनयिको की हो रही मौत से कई तरह के सवाल खड़े हो रहे है।
