
सांकेतिक तस्वीर।
माले। आजादी के बाद से हीं भारत का पड़ोसी और मित्र देश मालदीव की एक आपराधिक अदालत ने रविवार को चीन के ऐजेंट के तौर पर मशहूर मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन को भ्रष्टाचार के मामले में 11 साल जेल की सजा सुनाई है। यही नहीं यामीन के खिलाफ 50 लाख डॉलर का जुर्माना भी लगाया गया है। यामीन को मनी लॉड्रिंग और घूस लेने का दोषी पाया गया है। बताया जा रहा है कि यामीन को कोर्ट ने एक सरकारी द्वीप को लीज पर देने के दौरान घूस लेने के आरोप में दोषी पाया है। यामीन ने यह अपराध राष्ट्रपति रहने के दौरान साल 2013 से 2018 के बीच किया था। इस सजा के बाद देश में प्रदर्शन की भी खबरें हैं।
बता दे कि यह वही यामीन हैं जो चीन के सीक्रेट ऐजेंट के तौर पर काम कर रहा था। दुश्मन के निर्देश पर इसने मालदीव से भारतीयों को बाहर करने के लिए ‘इंडिया आउट’ कैंपेन को फिर से तेज कर दिया है। चूंकि,मालदीव में चीन की बढ़ती धमक भारत के लिए बेहद चिंतित करने वाली रिपोर्ट थी। क्योंकि,चीन हिंद महासागर में अपना दबदबा कायम करने के लिए मालदीव में अपना नेवल बेस बनाना चाहता है। बता दे कि मालदीव में अगले साल राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के तौर पर यह चुनाव भी लड़ रहा था।
मालूम हो कि यामीन का कार्यकाल भ्रष्टाचार, मीडिया पर दबाव और अपने राजनीतिक विरोधियों के दमन के लिए जाना जाता रहा है। यामीन चीन के ऐजेंट के तौर पर काम कर रहा था। यही कारण है कि यह ‘इंडिया आउट कैंपेन’ चल रहा है। क्योंकि,चीन चाहता है कि यामीन मालदीव और भारत के बीच हुई डिफेंस डील को रद्द करवा दे। इसीलिए यामीन ने आरोप लगाया है कि भारत मालदीव में अपनी सैन्य उपस्थिति बढ़ाना चाहता है। हालांकि,यामीन के इस आरोप को भारत समर्थक मालदीव के सत्तारूढ़ दल ने खारिज कर दिया है। वहीं,यामीन को सजा मिलते हीं उसने इसे भारतीय साजिश करार दिया है। कुल मिलाकर इस घटनाक्रम से साफ हो जाता है कि मालदीव में दुश्मन का सीक्रेट मिशन फेल हो चुका है, क्योंकि उसका ऐजेंट यामीन अब जेल की सजा भुगतने जा रहा है।
