
ईरानी सैनिक,एक वाॅर ड्रिल के दौरान, साभार -(ईरानी डिफेंस के ट्वीटर से)
तेहरान। ईरान द्वारा भारत के साथ विश्वासघात किये जाने की रिपोर्ट सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि ईरान के जिस चाबहार पोर्ट को बनाने में भारत ने भारी निवेश किया था, उसे अब तेहरान ने चीन को इस्तेमाल करने की इजाजत दे दिया है। दरअसल,भारत ने ईरान के इस पोर्ट को बनाने में अरबों डॉलर का निवेश किया है। क्योंकि,भारत की यह योजना थी कि इसी चाबहार पोर्ट के जरिए ही वह रूस और मध्य एशिया के देशों किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, ताजिकिस्तान के साथ व्यापारिक रिश्ते को और मजबूत करता। इस बीच यह भी जानकारी सामने आई है कि भारत ने हाल ही में इस बंदरगाह पर अपनी कई शक्तिशाली क्रेन को भेजा था।
बता दे कि ईरानी मीडिया ने रिपोर्ट किया है कि दक्षिणी ईरान में स्थित चाबहार बंदरगाह पर पहली बार सीधे तौर पर चीन का मालवाहक जहाज पहुंचा है। चाबहार फ्री जोन के सीईओ अमीर मोकद्दम के हवाले से दावा किया गया है कि शनिवार को इस चीनी जहाज से सामानों का उतारा जाना शुरू हो गया है। ऐसा पहली बार हुआ है जब चीन सीधे ईरान में भारत के बनाए चाबहार बंदरगाह से जुड़ गया है। इससे पहले तक चीनी जहाज सामान लेकर ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट तक जाते थे और वहां से सामानों को छोटे-छोटे जहाजों में लादकर चाबहार तक पहुंचाया जाता था।
इस बीच विशेषज्ञों के हवाले से यह दावा किया जा रहा है कि चीन चाबहार को सीपीईसी से जोड़ सकता है। मालूम हो कि यह वही सीपीईसी है जिसे चीन पाकिस्तान में चला रहा है। अब यहां सबसे बड़ा यह सवाल उठता है कि क्या चाबहार पोर्ट का चीन द्वारा इस्तेमाल किये जाने की जानकारी नई दिल्ली को है ? या नई दिल्ली की सहमति से ईरान ऐसा कर रहा है ? फिलहाल, भारत के तरफ से इस घटनाक्रम के संबंध में अभी तक कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन भारत के पैसे से बने इस पोर्ट का इस्तेमाल चीन द्वारा किये जाने की रिपोर्ट निश्चित रूप से सबसे बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि यह बताने की जरूरत नहीं है कि चीन नई दिल्ली का दोस्त है या दुश्मन। गौरतलब है कि इस पोर्ट का निर्माण साल 2000 में शुरू किया गया था जिसके जरिए बाल्टिक सागर को हिंद महासागर से जोड़ दिया गया है। इससे ईरान और रूस दोनों ही अमेरिकी प्रतिबंधों से बच जा रहे हैं।
