
फोटो साभार -(यूक्रेन के डिफेंस मिनिस्ट्री के ट्वीटर से)
कीव। नये साल पर जिस तरह से यूक्रेन ने अपने एक आॅपरेशन में सैकड़ों रूसी सैनिकों को मारने का दावा किया था उसके बाद से ही रूसी फौज की लीडरशिप सवालों के घेरे में आ गई थी। वहीं अब इस आॅपरेशन का राज खुद यूक्रेन ने खोल दिया है,क्योंकि यूक्रेन की तरफ से बताया गया है कि हमले से पहले रूसी सैनिकों द्वारा बड़े पैमाने पर मोबाइल इस्तेमाल करने के दौरान उन्हें ट्रेस करने में आसानी हो गई जिससे यह मालूम हो गया कि दुश्मन डोनटेस्क इलाके में एक स्कूल में भारी संख्या में मौजूद है उसके बाद फिर उनको निशाना बना दिया गया।
वहीं,रूस की तरफ से यह दावा किया गया था कि इस हमले में उसके 89 जवान ही मारे गए थे। लेकिन यह बात मानी कि उनकी लोकेशन की जानकारी मोबाइल सिग्नल की वजह से लीक हुई। दरअसल, रूस ने जंग की शुरूआत से ही अपने सैनिकों के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर रोक लगाई हुई है। इसके बावजूद महीनों से परिवार से दूर रह रहे रूसी सैनिक घर बात करने के लिए मोबाइल चला रहे हैं और अपनी जान खतरे में डाल रहे हैं।
इस बीच न्यूयॉर्क टाइम्स ने भी खुलासा किया है कि फरवरी में जब जंग शुरू हुई तो रूसी सैनिक मोबाइल फोन का खूब इस्तेमाल कर रहे थे। वो अपने घरों में फोन कर रहे थे, टिकटॉक पर वीडियो बना रहे थे। जिससे यूक्रेन को उनकी लोकेशन की जानकारियां मिल जाती थी। इसका नतीजा यह हुआ था कि जंग लड़ रहे सैनिकों के मोबाइल फोन इस्तेमाल करने पर रूस ने बैन लगा दिया था। हालांकि 1 जनवरी को हुई घटना से पता चलता है कि रूसी सैनिक बैन को ठीक से लागू नहीं कर रहे हैं। हमले के बाद रूस की सेना ने बयान जारी किया है। जिसमें कहा गया है यह बिल्कुल साफ है कि हमले की मुख्य वजह बैन के बावजूद सैनिकों का दुश्मन की रेंज में मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना था।
वहीं,यूक्रेनी अधिकारियों के हवाले से यह भी कहा गया कि रूस समर्थित अलगाववादियों ने 2014 से ही उनके सैनिकों के ठिकानों का पता लगाने के लिए मोबाइल फोन के डेटा का यूज किया है। तब रूस समर्थित अलगाववादी अकसर ग्रुप बनाकर फोन का इस्तेमाल कर रहे यूक्रेनी सैनिकों को निशाना बनाते थे। अब लगभग 9 साल बाद यूक्रेन रूस के ही इस हथकंडे का इस्तेमाल उसके खिलाफ कर रहा है।
बता दे कि जंग में इलेक्ट्रॉनिक वॉर फेयर सिस्टम का इस्तेमाल होता है। इस सिस्टम में एक सैनिक वाहन दो या ज्यादा ड्रोन से कनेक्ट होता है। इन ड्रोन में एक खास तरह का डिवाइस इस्तेमाल होता है, जिसे सेल साइट सिम्यूलेटर कहते हैं। ये डिवाइस अपने आस-पास मौजूद फोन के सिग्नल को कैच करता है। इसके बाद वाहन में लगे सिस्टम में फोन के सिग्नल की स्ट्रेंथ और दिशा की जानकारी भेज देता है। इससे ये पता लगाना आसान हो जाता है कि फोन कहां इस्तेमाल हो रहा है। इस तकनीक में रूस माहिर है, लेकिन इस बार यूक्रेन ने रूस की ही तकनीक का इस्तेमाल करके जबरदस्त हमला किया है।
इसी कड़ी में यह भी जानकारी सामने आई है कि रूसी सैनिकों ने युद्ध में मारे गए यूक्रेनियों के भी फोन चुराए हैं। ताकि वो अपने घरों में बात कर सकें। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ रूसी सैनिकों को इस बात पर शक होता है कि उनका कॉल दुश्मन ट्रेस कर रहा है। इसलिए वो या तो संभल कर बात करते हैं या फिर अपने लोकेशन को फोन पर डिस्कस नहीं करते हैं। हालांकि, सैनिकों को ये पता नहीं था कि उनके फोन कॉल रिसीव करते ही या केवल उसके डेटा से ही उनकी लोकेशन का पता लगाया जा सकता है।
फिलहाल, नये साल पर जिस तरह से सरप्राइज अटैक में रूसी फौज को नुकसान हुआ है वह अब तक का बड़ा नुकसान माना जा रहा है, यही कारण है कि रूस इस हमले को बेहद गंभीरतापूर्वक देख रहा है। लेकिन अब इसका खुलासा हो गया कि इस हमले में यूक्रेन सिर्फ मोबाइल के जरिए ही सफल हुआ है। इससे अब रूस को संभलने का मौका मिल गया है।
