
नेपाली गोरखा सैनिक, फोटो साभार -(नेपाली डिफेंस के ट्वीटर से)
काठमांडू। दुश्मन का मिशन नेपाल एक बार फिर फेल हो गया, इससे पहले चीन मालदीव में पूरी ताकत के साथ सक्रिय था। जहां उसका ऐजेंट जो कि राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार था एक भ्रष्टाचार के पुराने मामले में 11 साल के लिए जेल चला गया, चूंकि वह भारत विरोधी और चीन का खास था। जहां इसी कड़ी में नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड के विश्वासमत हासिल करने के दिन बड़ा सियासी उलटफेर हो गया है। प्रचंड को अविश्वास प्रस्ताव में धोखा देकर सरकार बनाने की उम्मीदें पाले पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को बड़ा झटका लगा है। नेपाल की संसद में सबसे बड़ी पार्टी नेपाली कांग्रेस ने अब ऐलान किया है कि वह बहुमत साबित करने के दौरान प्रचंड का समर्थन करेगी। बता दे कि केपी ओली चीन का बेहद खास सिपहसालार के रूप में मशहूर है। क्योंकि ओली हमेशा भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने से चूकते नहीं थे। वहीं,नेपाली कांग्रेस के इस मास्टर स्ट्रोक से ओली के बहाने चीन को बड़ा झटका लगा है।
बताया जा रहा है कि नेपाली कांग्रेस पार्टी की सेंट्रल वर्क कमिटी ने मंगलवार को हुई बैठक में फैसला किया है कि वह प्रचंड के समर्थन में वोट करेगी लेकिन सरकार में शामिल नहीं होगी। पार्टी के संयुक्त महासचिव महेंद्र यादव के हवाले से कहा गया है कि वह संविधान को बचाने के लिए प्रचंड सरकार के समर्थन में वोट देने का फैसला किया है। हालांकि,प्रचंड को समर्थन देने के फैसले पर पार्टी के अंदर काफी मतभेद हैं। इससे पहले सोमवार को प्रचंड ने पूर्व प्रधानमंत्री शेर बहादुर देउबा से मुलाकात करके उनसे अपनी सरकार के लिए समर्थन मांगा था।
दरअसल,नेपाली कांग्रेस 88 सांसदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। अगर नेपाली कांग्रेस और केपी ओली की पार्टी दोनों ही समर्थन करती हैं तो प्रचंड को 269 सांसदों का समर्थन मिल जाएगा। सीपीएन-माओवादी सेंटर के 68 वर्षीय नेता ने 26 दिसंबर को तीसरी बार प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी,इस दौरान प्रचंड ने नेपाली कांग्रेस के नेतृत्व वाले चुनाव पूर्व गठबंधन को छोड़कर विपक्ष के नेता केपी शर्मा ओली से हाथ मिला लिया था। प्रधानमंत्री प्रचंड की नियुक्ति के बाद नेपाल का पहला संसद सत्र सोमवार को यहां शुरू हुआ है।
गौरतलब है कि चीन, भारत के सभी पड़ोसी देशों में पूरी तरह से हावी होने के मिशन पर लगातार सक्रिय है। क्योंकि इन देशों के बहाने वह भारत को चारों ओर से घेरना चाहता है। लेकिन अक्सर उसका यह मिशन फ्लाप साबित हो जाता है। यही कारण है कि अभी हाल ही में मालदीव में भी इसी तरह चीन का ऐजेंट जो कि भारत विरोधी था तथा वह राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार भी था लेकिन ऐन मौके पर चुनाव से पहले एक पुराने मामले में वह 11 सालों के जेल चला गया। इसी कड़ी में ठीक इसी तरह से नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री ओली शर्मा के बहाने वह काठमांडू में भी हावी होना चाहता था लेकिन अब प्रचंड ओली के समर्थन से सरकार न बनाते हुए एक बार फिर से बीजिंग को झटका दे दिये है।
