
तेहरान में स्थित अज़रबैजानी दूतावास की इमारत,फाईल फोटो,साभार-(अजरबैजान के ईरानी दूतावास के ट्वीटर से)
तेहरान। आर्मेनिया के साथ जारी भीषण जंगी तनातनी के बीच ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित अज़रबैजान के दूतावास पर शुक्रवार को भीषण हमला होने की रिपोर्ट सामने आई है। जहां इस हमले के दौरान अजरबैजानी राजनयिक की सुरक्षा में तैनात सिक्योरिटी चीफ की मौत हो गई, साथ ही दो सुरक्षा गार्ड के घायल होने की भी खबर है। वहीं इस हमले के बाद ईरान से लेकर अजरबैजान तक हड़कंप मच गया है।
बताया जा रहा है कि एक शख्स ने कलाशनिकोव स्टाइल राइफल से इस हमले को अंजाम दिया है। फिलहाल,अभी तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है, और ना ही इसके पीछे का मकसद साफ हो पाया है।
वहीं,अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलियेव ने ट्वीट कर इस हमले की कड़ी निंदा की है। राष्ट्रपति इल्हाम अलियेव ने कहा” हम तेहरान में आज हमारे दूतावास पर किए गए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करते हैं। अलियेव ने आगे भी कहा कि मैं फर्स्ट लेफ्टिनेंट ओरखान रिजवान ओगलू असगारोव के परिवार के लिए गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं, जिन्होंने दूतावास और उसके स्टाफ को बचाने के लिए अपनी जान दे दी।”
इस बीच अज़रबैजान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी कर कहा कि “अभी इस हमले की जांच की जा रही है।”
बयान में आगे कहा गया है कि हमलावर ने गोलीबारी कर एक सुरक्षा चौकी को भी नष्ट कर दिया। मालूम हो कि अज़रबैजान की उत्तर-पश्चिमी सीमा ईरान से लगती है नागोर्नो-काराबाख क्षेत्र को लेकर अज़रबैजान और आर्मेनिया में संघर्ष के बाद से दोनों देशों (ईरान और अज़बैजान) के बीच तनाव है। हाल ही में इस्लामी गणतंत्र को हिला देने वाले राष्ट्रव्यापी विरोध के बीच ईरान ने बीते अक्टूबर में अज़रबैजान सीमा के पास एक सैन्य अभ्यास शुरू किया था। यही नहीं,अज़रबैजान के इज़रायल के साथ घनिष्ठ संबंध हैं, जिसे तेहरान क्षेत्र में अपने प्रमुख दुश्मनों में से एक के रूप में देखता है।
दरअसल,इजराइल और अज़रबैजान में वर्ष 1992 से ही कूटनीतिक रिश्ते हैं। क्योंकि सोवियत संघ से आजाद होने के ऐलान के सिर्फ छह महीने बाद ही अज़रबैजान और इजराइल में ये रिश्ते बन गए थे। इसकी वजह इन दोनों देशों के एक ही मकसद होना है। ये दोनों देश ईरान और राजनीतिक इस्लाम पर नजर रखने के मकसद से साथ हैं। बता दे कि इस समय मिडिल-ईस्ट में भारी तनाव का प्रमुख केंद्र ईरान बना हुआ है। उधर, इजरायल,अमेरिका के साथ सऊदी अरब संयुक्त रूप से ईरान के खिलाफ पूरी जंगी तैयारी में जुटे हुए है तो वही अजरबैजान भी आर्मेनिया विवाद के साथ जारी भीषण तनातनी के चलते ईरान के खिलाफ अमेरिकी गुट के साथ खड़ा है। जहां इसी दौरान ईरान में अजरबैजानी दूतावास पर हमला होना, पहले से ही जारी जंगी तनाव को और भी भढ़का सकता है।
हालांकि, यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी दूतावास पर हमला हुआ हो, क्योंकि जबसे रूस-यूक्रेन जंग छिड़ा हुआ है उसके बाद से ही दुनिया के कई देशों में यूक्रेन के दूतावासों पर कई तरह के हमले होने की रिपोर्ट सामने आती रही है, इतना ही नहीं इसी कड़ी में रूसी अंबैसी भी इस तरह के हमलों का सामना कर चुके हैं।
