
सांकेतिक तस्वीर।
काबुल/तेहरान। खूंखार आतंकी संगठन अल कायदा के नये सरगना को लेकर संयुक्त राष्ट्र संघ यानी UN की सिक्योरिटी काउंसिल ने सोमवार को रिपोर्ट जारी कर बड़ा खुलासा किया है कि ओसामा बिन लादेन का वफादार “सैफ अल आदेल” अलकायदा का नया चीफ बन गया है। जो अभी ईरान से ऑपरेट कर रहा है। बता दे कि इससे पहले इस आतंकी संगठन का सरगना अल जवाहिरी था जो कि बीते साल के जुलाई में अमेरिकी ऐजेंसियों के एक आॅपरेशन के दौरान मार अफगानिस्तान के काबुल में गिराया गया था। जिसके बाद से ही संगठन के चीफ का पद रिक्त था।
दरअसल,यून के इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि अयमान अल जवाहिरी की अमेरिका की तरफ से गई स्ट्राइक में मौत के बाद सैफ अल आदेल को अलकायदा का चीफ चुना गया है। रिपोर्ट में आगे भी कहा गया है कि तालिबान 2021 में सत्ता में आने के बाद इंटरनेशल लेवल पर अपनी स्वीकार्यता को बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। जिसके चलते उसने अमेरिका के साथ एक एग्रीमेंट साइन किया था जिसमें लिखा गया था कि वो अपनी सरजमीं से किसी भी आतंकी संगठन को ऑपरेट नहीं करने देगा। ऐसे में अगर अल कायदा सैफ अल आदेल को नया चीफ घोषित कर देता है तो इससे तालिबान की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। चूंकि आदेल पर पहले से ही अमेरिका ने 82 करोड़ का ईनाम घोषित कर रखा था।
इस बीच कई UN सदस्यों के हवाले से यह कहा गया है कि आदेल के काफी समय से ईरान में रहने के चलते अलकायदा उसके चीफ बनने पर चुप्पी साधे हुए है। इन सदस्यों का कहना है कि ईरान एक शिया बहुल देश है जिसकी कमान शिया क्लेरिक्स के हाथों में है। जबकि अलकायदा एक सुन्नी आतंकी संगठन है। गौरतलब है कि अल कायदा के एक्सप्लोसिव एक्सपर्ट सैफ अल आदेल का जन्म 1960 के दशक की शुरुआत में मिस्र में हुआ। माना जाता है कि उसका असली नाम मोहम्मद सलाह अल-दीन जैदान है, लेकिन सैफ अल-आदेल नाम के पीछे एक कहानी है। सैफ अल-आदेल का अर्थ है ‘सोर्ड ऑफ जस्टिस’ यानी न्याय की तलवार। इसीलिए उसने अपना नाम बदला।
इतना ही नहीं सैफ अल आदेल मिस्र की सेना में कर्नल भी रह चुका है। जो कि वर्ष 1988 में मिस्त्र के राष्ट्रपति अनवर अल सादात की हत्या के बाद वह मिस्र छोड़ कर देश के बाहर अफगानिस्तान में मुजाहिदों के साथ सोवियत सेना को बाहर करने में जुट गया था। माना जाता है कि वह यहां से लेबनान गया। खारतूम के खाली खेतों में आतंकियों को विस्फोटक बनाने और इस्तेमाल करने की ट्रेनिंग दी। यही नहीं आदेल अल कायदा के मजलिस-ए-शूरा और मिलिट्री कमेटी का मेंबर है। उसने अफगानिस्तान, सूडान और पाकिस्तान में कई ट्रेनिंप कैंप भी चलाए। सोमालिया के रास कंबोनी में केन्या की सीमा के पास उसने ट्रेनिंग कैंप भी खोला था। बता दे कि अमेरिका में 9/11 हमले से पहले सैफ अल आदेल कंधार शहर का रक्षा प्रमुख था। आदेल ने अमेरिका में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले का विरोध किया था। हमले से ठीक 2 महीने पहले आदेल ने बिन लादेन को ऐसा न करने की सलाह दी थी।
